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हमारे लोक देवता

सत्यवादी वीर तेजाजी

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मेरा राम छोटूराम

किसान मसीहा दीनबन्धु सर छोटूराम

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पीड़ा से जन्म लिया हमारी शुरू से किस्मत माड़ी
जब फसल हमारी है क्यों तय करते मूल्य व्यापारी

आज कह दो सरकारों से इसे बेचे लगाकर बोली
हम कच्चे बम्ब जैसे बताओ हमारी कैसी दीवाली

चुनाव जीत छुप जाती है जाने कहाँ ठगों की टोली
हम तो कच्चे रंग जैसे बताओ हमारी कैसी होली


हथियार ही रखे है पर अभी तक चलाने नही है भूले
आज तक भी रायफल की नाल के मुंह रखे हैं खुले

 

 

Jat Regiment

Next Steps…

1.चौ छोटूराम के शब्दों में गांव ओर किसान ही इस देश की रीढ़ है ।
2.चौ चरणसिंह के शब्दों में खुशहाली का रास्ता गांव के खेतों खलिहानों से होकर गुजरता है ।
3. चौ देवीलाल के शब्दों में असली भारत गांव में बसता है ।
4. बाबा महेंद्र सिंह टिकैत के शब्दों में विकास की दौड़ में गांव की हिस्सेदारी बिना देश आगे नही बढ़ सकता ।


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