About Me

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Published: 2018/01/31

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Hello Friends

मेरा नाम रणधीर देशवाल है | मैं रोहतक हरियाणा का निवासी हूँ | मैं एक शोंकिया लेखक था पर समय के साथ साथ मेरे लेखन में बदलाव आया और आज मैं आपके सामने अपनी 3 top वेबसाइट और 5 ब्लॉग के साथ हूँ|

मेरी आरम्भिक शिक्षा मेरे गाँव में ही हुई थी उसके बाद मैंने जाट स्कुल रोहतक से आगे की पढाई की | वर्ष 2007 में मैं लॉ की पढाई करने देहरादून चला गया वहां मैंने करीब करीब 8 साल गुजारे है |

उत्तराखंड के कल्चर का इस अवधि में मुझ पर बहुत घर प्रभाव पड़ा | पढाई पूरी करने के बाद मैं वापस हरियाणा चला आया | यहाँ रोहतक कोर्ट में अपनी प्रेक्टिस स्टार्ट की थी |

बचपन से ही मेरी रूचि इतिहास राजनितिक विषय में ज्यादा रही थी अत: रोहतक आकर मैंने जाट गजट नाम से इतिहास की मैगजीन निकालनी शुरू करी | उसके बाद मेरी कई पुस्तके जैसे क्रांति के योद्धे, जाट गजट 2 , किसान केसरी आदि प्रकाशित हुई जो भारत भर के पाठकों द्वारा सराही गयी |

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वर्ष 1999 में मैंने अपनी 12वीं क्लास टॉप की थी पर मुझे SD कोलेज में नकार दिया गया |

क्योंकि मेरा hindi बोलने का ढंग अलग था मेरे हर शब्द से हरियाणवी छलकती थी | आखिर को आखर बोलता था |

योग्य से भी उपर होते हुए मुझे साफ मना कर दिया गया, पर 39% को चुन लिया गया 76% को नकारा गया |

उस दिन मैंने सोच लिया गाँव के रहने वाले लडकों को शहरों में स्थान नही मिलता | मैं इस स्थिति को बदलना चाहता था |

कम से कम अपने गाँव में तो लडकियों के लिए कोलेज चाहता ही थी क्योंकि रोज पानीपत जाना हमारे बस से बाहर की चीज है |

एक किसान परिवार से होते हुए मुझे यह स्थिति असहनीय थी | मैंने पहले गाँव को इस विषय में जागरूक किया |

मेरे मन में वो टीश 2013 तक रही जब तक मेरे गाँव में सरकारी कोलेज न बन गया |

आज भले ही कोई भाजपा का मंत्री इसका उद्घाटन करके अपना पत्थर लगाये पर यह तकालीन मुख्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र हुड्डा की देन है ।

तत्कालीन गर्वनर ने तब कहा था 21 साल की उम्र में अपने क्षेत्र में कालेज बनवाने की ऐसी मिशाल पूरे भारत में नहीं मिलेगी ।

राजनेता सिर्फ अगले चुनाव की बात करते है पर जननेता अगली पीढ़ी की नींव रखते है ।

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इसके बाद मैंने महर्षि दयानन्द यूनिवर्सिटी रोहतक से इतिहास में पीएचडी करी जिसका टॉपिक था जाट 

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वकालत जैसे पेशे में मुझे सहज अनुभव नही हो रहा था क्योंकि अक्सर लेखक व कवी खुली तबियत के होते है जिन्हें किसी एक जगह बैठ कर जीना रास नहीं आता, मेरे साथ भी यही था |
मैं तब वकालत छोडकर अपनी लेखनी से ही लगाव रखा, पर वर्तमान युग में किताबे अक्सर अलमारियों की धूल झांकती है जबकि हर कोई फोन से जुड़ गया है | इसी चीज को ध्यान में रखकर मैंने भारत के वीर सपूत वेबसाइट की स्थापना करी |
वेबसाइट का अच्छा अनुभव होने के बाद मैंने यह जाटराम वेबसाइट शुरू की जो आज बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है | महीने के 6 लाख के आसपास विजिटर आते है जिससे मेरी अच्छी खासी कमाई भी होती है और प्रसिद्धि भी |

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वर्ष 2011 में मैंने अपनी वकालत की परीक्षा गढ़वाल यूनिवर्सिटी श्रीनगर से टॉप की ,

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thnx you all readers to read About Me .

 मैं आपको कुछ जाट इतिहास की थोड़ी झलक दिखाऊंगा जिनकी हर जाट को जानकारी होना चाहिए ताकि आने वाली नश्लों को अपने समाज की परम्परा, वीरता तथा योगदानों का ज्ञान हो सके |
उन्हें पता चले हम उन पिताओं की सन्तान है जिन्होंने युद्धकाल में तो भारत के लिए युद्ध में खून बहाकर इसकी रक्षा करी तथा साथ साथ शांति के समय में हल चलाकर इस देश की जनता का पेट भी भरा |
गाँव गरीब किसान मजदूर के हकों की आवाज़ उठाना मेरे लेखन का मुख्य मकसद है | मेरा विश्वास है देश की खुशहाली का रास्ता गाँव के खेतों खलिहानों से होकर गुजरता है जब तक इस देश का गरीब किसान मजदूर सम्पन्न नही होगा इस देश की खुशहाली के कोई मायने नही है |
 
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Phone

  • 8816052038

पता

  • सेक्टर-2 रोहतक

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