Sikh

sikh jat state punjab

sikh jatt state

sikh धर्म के सभी दस गुरु खत्री जाति से संबंध रखते थे तथा आपस में सभी के सभी रिश्तेदार थे। लेकिन गुरु नानक जी के दो परम शिष्य बाबा बुड्ढा जी, रणधावा गोत्री तथा बाबा बाला जी संधु गोत्री जाट थे।

सिखों के छठे गुरु हरगोविन्दसिंह जी के समय Sikh धर्म के लिए शहीद होनेवाले पहले शहीद वीर योद्धा बाबा बीरसिंह जी घुम्मन गोत्री जाट थे।

sikh

Sikh के दसवें गुरु गोविन्दसिंह जी के पंच प्यारों में दूसरे प्यारे धर्मचन्द गाँव जटवाड़ा जिला सहारनपुर उत्तरप्रदेश के मलिक गठवाला गोत्री जाट थे। गुरु तेग बहादुर जी का शीश चाँदनी चौंक से किरतपुर ले जानेवाले दोनों वीर जैतो और दुल्लो जाट थे।

गुरु गोविन्दसिंह जी के बच्चों की रक्षा जान पर खेलकर करनेवाली वीरांगना योद्धामाई भागो भी भराइच गोत्र की जाटनी थी।

गुरुओं के अखाड़ों की परम्परा जाटों ने ही डाली जो वहाँ कुश्ती और मार्सलआर्ट का अभ्यास करते थे। गुरु गोविन्दसिंह जी की सेना में अधिक संख्या जाटों की थी।

आज भी Sikh धर्म की शान जाट हैं। याद रहे देश और विदेश के सिक्खों में 70 प्रतिशत संख्या सिक्ख जाटों की है।

Sikh

Sikh मिसलों का संक्षिप्त वर्णन

19 जून, 1716 ई० को बन्दा बहादुर की मृत्यु के पश्चात् पंजाब में सिक्खों के संपीड़न का युग आरम्भ हुआ। 1716 ई० से लेकर 1747 ई० तक मुगल सम्राटों की ओर से नियुक्त किये गये |

पंजाब के सूबेदार अब्दुस्समद खां, जकारिया खां तथा याहिया खां ने हजारों Sikh को इस्लाम धर्म को अस्वीकार करने के कारण मौत के घाट उतार दिया। परन्तु Sikh jat लोग इन अत्याचारों को असाधारण साहस तथा उत्साह से सहन करते गये।

1747 ई० में इनके सौभाग्य से अफगानिस्तान के शासक अहमदशाह अब्दाली ने पंजाब पर आक्रमण करने आरम्भ कर दिये। 1769 ई० तक उसने इस प्रान्त पर कुल दस आक्रमण किये।

पहले पांच आक्रमणों के फलस्वरूप उसने इस प्रदेश में मुगलों और मराठों की शक्ति को कुचल डाला। पिछले पांच आक्रमण उसने Sikh के विरुद्ध किये, परन्तु घोर प्रयत्न करने पर भी वह इनकी शक्ति का दमन करने में असफल रहा।

इसका परिणाम यह हुआ कि पंजाब के विभिन्न भागों में Sikh जत्थों ने अपने राज्य स्थापित कर लिये। इस प्रकार बारह Sikh मिसलों की उत्पत्ति हुई।

मिसल अरबी शब्द है जिसका भावार्थ दल होता है। प्रत्येक दल का एक सरदार होता था। इन मिसलों की संगठित बैठक का नाम गुरमता (गुरुमन्त्रणा) था।

sikh

गुरमता में मिसलों के सरदार बैठते थे। गुरमता में निश्चय हुए प्रस्तावों को मानने के लिए वे बाध्य थे।

Sikh Jat State | पंजाब में सिक्ख जाटों का राज्य

Sikh की इन 12 मिसलों में 10 मिसलें जाटों द्वारा संस्थापित हुई थीं और उनमें शामिल होकर युद्ध करने वालों में अधिकतर संख्या जाटों की ही थी।

दो मिसलों के संस्थापक खत्री सरदार थे, परन्तु उनके जत्थों में अधिक संख्या जाटों की थी। इन मिसलों का संक्षिप्त वर्णन निम्नलिखित है

Sikh

1. भंगी मिसल – इस मिसल के मनुष्य भंग का अधिक व्यवहार करते थे इसलिए ही उन्हें भंगड़ी अथवा भंगी नाम से पुकारा जाने लगा। सन् 1716 ई० में चौ० छज्जासिंह ढ़िल्लों गोत्र के जाटवीर ने इस मिसल की स्थापना की थी।

इसके पुत्र हरिसिंह के समय में इस मिसल की संख्या 12,000 से बढ़कर 20,000 हो गई थी। उसने इन सैनिकों का नेतृत्व करके   गुजरातझंगमुलतानसियालकोटकसूरडेराखान आदि को जीतकर सूबा लाहौर के तीन-चौथाई भाग से मुग़लों का शासन पूर्ण रूप से समाप्त करके यहां अपना अधिकार जमा लिया।

सरदार हरिसिंह ने अमृतसर में राजधानी स्थिर करके वहां एक विशाल किला बनवाया। इसने जम्मू पर चढ़ाई की थी और दूर-दूर तक काफी लूटमार की।

Sikh Jat State | पंजाब में सिक्ख जाटों का राज्य

इस सरदार ने कन्हिया और रामगढ़िया मिसलों को साथ लेकर लाहौर पर अधिकार कर लिया था जो कि अब्दाली ने इनसे छीन लिया। अब्दाली के भारत से चले जाने पर फिर इस मिसल ने लाहौर पर अधिकार कर लिया।

इसने पटियाला के सरदार आल्हासिंह पर भी आक्रमण कर दिया, जिस युद्ध में सरदार हरिसिंह मारा गया।

sikh

इसके पुत्र झण्डासिंह और गण्डासिंह भी बड़े वीर योद्धा थे। अब झण्डासिंह इस मिसल का सरदार बना। उसने 1766 से 1772 तक अनेक युद्ध किये और कई स्थानों पर विजय प्राप्त की।

इस वीर सरदार ने रामनगर पर आक्रमण करके अहमदशाह अब्दाली की सेना से दमदमा नामक तोप छीन ली जो कि बाद में ‘भंगी तोप’ के नाम से प्रसिद्ध हुई।

सरदार झण्डासिंह ने जम्मू के राजा रणजीतसिंह डोगरा पर आक्रमण किया। झण्डासिंह जम्मू के दूसरे युद्ध में स्वर्गीय हुआ। इसका भाई गण्डासिंह कन्हिया मिसल मिसल के साथ पवनकोट में लड़ता हुआ मारा गया।

इसके पश्चात् चड़तसिंह, देशूसिंह, करमसिंह आदि सरदार एक के बाद दूसरा नेता बने जो कि सुकरचकिया मिसल के सरदार महासिंह द्वारा मारे गये। सन् 1799 ई० में महाराजा रणजीतसिंह ने इस मिसल से लाहौर छीन लिया और फिर उसने अमृतसर पर अधिकार कर लिया।

Sikh

Sikh Jat State | पंजाब में सिक्ख जाटों का राज्य

2. कन्हिया मिसल – लाहौर के कान्हा गांव के सिन्धुवंशी जाट चौ० खुशालसिंह के पुत्र सरदार जयसिंह ने अपने गांव कान्हा के नाम पर इस मिसल का प्रारम्भ किया था।

कांगड़े के राजा सरदारचन्द ने, नवाब शेफ अली खां किलेदार के विरुद्ध सरदार जयसिंह को अपनी सहायता के लिये बुलाया। जयसिंह ने किले पर अधिकार कर लिया और राजा संसारचन्द्र को भी धमका दिया।

जम्मू के इस आक्रमण में रणजीतसिंह व उसके पिता स० महासिंह ने जयसिंह की सहायता की थी। जम्मू के लूट के माल पर इनकी अनबन हो गई और इनका युद्ध छिड़ गया।

sikh

जयसिंह ने हार से बचने के लिए बुद्धिमानी से काम लिया। उसने अपनी पोती का विवाह रणजीतसिंह से करके उनके पिता महासिंह को अपना सम्बन्धी बना लिया।

थोड़े दिन बाद अपने पुत्र गुरबक्ससिंह की मृत्यु के शोक में जयसिंह की मृत्यु हो गई। इसके बाद गुरबक्ससिंह की पत्नी सदाकौर राज्य की मालिक हुई। रानी सदाकौर बड़ी निपुण और योग्य शासक थी।

sikh

वह अनेक युद्धों में भी शामिल हुई थी। स० महासिंह के मरने पर इस रानी ने दोनों ही राज्यों का काम संभाला था। वह रणजीतसिंह की बड़ी देख-रेख रखती थी।

इस रानी का राज्य अमृतसर से उत्तर की ओर पहाड़ी प्रदेश में था। उसमें कांगड़ा, कलानौर, नूरपुर, पठानकोट, कोरहा, हाजीपुर, दीनानगर, यकरियान, अटलगढ़ आदि प्रसिद्ध नगर थे।

जवान होने पर महाराजा रणजीतसिंह ने अपनी सास रानी सदाकौर से उसका राज्य छीन लिया।

Sikh Jat State | पंजाब में सिक्ख जाटों का राज्य

Sikh

3. नकिया मिसल – इस मिसल की स्थापना सिन्धुवंशी जाट चौ० हेमराज के पुत्र हीरासिंह ने की थी। जब उसने 1750 ई० में नक्का नामक प्रदेश पर अधिकार कर लिया तब यह मिसल नकिया नाम से प्रसिद्ध हुई।

सरदार हीरासिंह ने 8000 सवारों का सैन्य दल लेकर भड़वाल, चूनिया, दयालपुर, कानपुर, जेठपुर, खण्डिया, शेरगढ़, मुस्तफाबाद, देवसाल, फिरोजाबाद, मन्द्रा, मागठ आदि प्रदेशों पर अधिकार कर लिया था।

उस समय पाकपट्टन में शेख सुजान कुर्रेशी का अधिकार था। हीरासिंह ने शेख पर चढ़ाई कर दी। इस युद्ध में वह वीरगति को प्राप्त हुआ।

इसके बाद नाहरसिंह, वजीरसिंह, भगवानसिंह और ज्ञानसिंह राज के मालिक बने। ज्ञानसिंह के मरने पर महाराजा रणजीतसिंह ने इस राज्य पर अधिकार कर लिया।

Sikh

4. करोड़ियानया/ करोड़सिंहया मिसल – इस मिसल का संस्थापक पंचगढ़ का रहने वाला जाट सरदार करोड़सिंह था। उसने 12,000 सैनिकों को लेकर नादिरशाह को लूटा और मुगलों से 10 लाख रुपये आय के प्रदेश को छीन लिया।

जालन्धर के चारों ओर का प्रदेश इस मिसल के अधीन हो गया। अहमदशाह अब्दाली का जब पटियाला में सिक्खों से युद्ध हुआ, तब करोड़सिंह ने अब्दाली के कोष को लूटा।

इसका उत्तराधिकारी सरदार बघेलसिंह धारीवाल गोत्री जाट बना। इसने 30,000 सवार सैनिकों को साथ लेकर सन् 1768 ई० में सीमा प्रान्त की ओर आक्रमण करके मुगल, पठानों की सत्ता समाप्त की |

sikh

Sikh Jat State | पंजाब में सिक्ख जाटों का राज्य

उसके बाद मेरठ, खुर्जा, अलीगढ़, बिजनौर, बुलन्दशहर, मुरादाबाद, चन्दौसी, हाथरस, इटावा, फर्रूखाबाद आदि नगरों पर आक्रमण करके लूट में बहुत सा धन प्राप्त किया।

सन् 1781 ई० में सरदार बघेलसिंह ने 70,000 सेना के साथ दिल्ली पर आक्रमण करके वहां खूब लूटमार की।

उसने दिल्ली में मुस्लिम वध का आदेश दिया और किले पर अधिकार कर लिया। परन्तु आपसी कलह के कारण, किले को लूटकर बाहर निकल गए।

Sikh

बेगम समरू की बघेलसिंह ने प्राण-रक्षा की थी, इस कारण उस बेगम ने शाह आलम से कहकर सिक्खों को तीन लाख रुपया और दिल्ली में गुरु तेगबहादुर का गुरुद्वारा बनाने की आज्ञा दिलवा दी।

सन्धि के अनुसार स० बघेलसिंह कोतवाली के प्रबन्ध और चुंगीकार ग्रहण करने के लिए अपने सैनिकों के साथ दिल्ली में ही रहे।

उसने तेलीवाड़े देहली में माता सुन्दरी और साहबदेवी (धर्मपत्नी गुरुगोविन्दसिंह जी) की स्मृति में और गुरु तेगबहादुर की शवभूमि रकाबगंज में गुरुद्वारे बनवाए।

sikh

इस सरदार ने शीशगंज गुरुद्वारे की नींव का चबूतरा भी बनवा दिया। कुछ समय बाद बादशाही खिलअत प्राप्त करेके पंजाब में लौट गया। इस वीर योद्धा का सन् 1801 ई० में स्वर्गवास हो गया।

महाराजा रणजीतसिंह ने इनके प्रदेश को अपने साम्राज्य में मिला लिया।

Sikh Jat State | पंजाब में सिक्ख जाटों का राज्य

Sikh

5. शहीद या शहीदान मिसल – इस मिसल का गठन बन्दा बैरागी के समय स० शहदीपसिंह सिंघुगोत्री जाट ने किया। वह 1762 ई० में अपनी सेना की सरदारी करते हुए अब्दाली के साथ अमृतसर युद्ध में शहीद हो गया।

इसके बाद लाहौर के चौ० वीरसिंह सिन्धु जाट के पुत्र करमसिंह को इस मिसल का प्रमुख बनाया गया।

उसने अपनी सेना के साथ सुदूर सीमाप्रान्त के जलालाबाद, लुहारी, सहारनपुर जिले के रणखण्डी और बडवाजमी का बड़ा प्रदेश भी 30 वर्ष तक अपने अधिकार में रखा। इस मिसल का प्रदेश सीधा ब्रिटिश सरकार को गया।

Sikh

6. फैजुल्लापुरी या सिंहपुरिया मिसल – चौ० कपूरसिंह वरिकवंशी जाट सरदार ने इस मिसल की स्थापना की थी। सर्वप्रथम फैजुल्लापुर पर ही इस दल ने अधिकार किया था।

इस कारण इस नाम पर ही ये प्रसिद्ध हुए। संवत् 1790 (1733 ई०) में दिल्ली के शाह की ओर से स० कपूरसिंह को एक लाख की जागीर और ‘नवाब’ की पदवी मिली।

इस वीर ने अपनी तलवार से 500 मुसलमानों का वध किया था। उसके धर्मोपदेश के कारण अगणित जाटों ने सिक्ख धर्म अपनाया। इसी की प्रेरणा से पटियाला राज्य के संस्थापक सिद्धू जाटवीर योद्धा आल्हासिंह ने सिक्खधर्म ग्रहण किया था।

sikh

तीन हजार सवार नवाब कपूरसिंह की आज्ञा पर धर्म पर बलिदान होने के लिए प्रत्येक समय तैयार रहते थे। इन वीरों ने भी दिल्ली तक छापे मारकर काफी लूट मचाई।

इस मिसल ने मुसलमानों से जालन्धर का बहुत सा प्रदेश जीत लिया। सरदार कपूरसिंह ने मरते समय अपना उत्तराधिकार स० जस्सासिंह अहलूवालिया को ही दे दिया।

इस प्रकार यह मिसल जाटों के अधिकार से कलालों के अधिकार में चली गई। कपूरसिंह ने जिस कपूरथला राज्य की स्थापना की थी उस पर भी स० जस्सासिंह अहलूवालिया के वंशधरों की ही परम्परा चलती रही थी।

Sikh Jat State | पंजाब में सिक्ख जाटों का राज्य

Sikh

 

7. निशानवालिया मिसल – गिल जाटों का वह दल जो पन्थ के आगे निशान (चिह्न खालसा पन्थ) लेकर चलता था, निशानवालिया के नाम से प्रसिद्ध हुआ।

मन्सूरवाल (जि० फिरोजपुर) के चौ० रायगिल के पुत्र स० दसोधसिंह ने इस मिसल की स्थापना की थी इसने सरहिन्दकसूर और   मेरठ की लूट की और उस धन से अपने 12,000 सवार संगठित कर लिये।

इस वीर सरदार ने सन्धानवाला, साहनेवाल, सराय लश्करीखां, दोराहा, जीरा, लद्धड़, खेड़ी, अम्बाला और शाहाबाद पर अधिकार करके अम्बाला को अपनी राजधानी बनाया।

sikh

स० दसोधसिंह मेरठ में जाब्ताखां से लड़ते हुए शहीद हुए। इसके भाई संगतसिंह और उसके पुत्र कपूरसिंह, मेहरसिंह, अनूपसिंह एवं अनूपसिंह की पत्नी दयाकौर बहुत समय तक इस मिसल का संचालन करते रहे।

अन्त में महाराजा रणजीतसिंह ने इस मिसल के विजित प्रदेश को अपने शासन में ले लिया।

Sikh Jat State | पंजाब में सिक्ख जाटों का राज्य

Sikh

8. रामगढ़िया मिसल – रामगढ़ नामक स्थान पर इस मिसल की स्थापना एक जाट सिक्ख खुशहालसिंह ने की थी। उसकी मृत्यु के बाद उसके उत्तराधिकारी नौंदसिंह ने जस्सासिंह, मालासिंह और तारासिंह, साहसी वीरों को अपना साथी बनाया|

वे तीनों बढ़ई (तिरखान) थे। नौंदसिंह की मृत्यु के पश्चात् इस मिसल का सरदार, जस्सासिंह को बनाया गया। इस तरह से यह मिसल जाट सिक्खों के हाथ से निकलकर तरखान सिक्खों के हाथ में चली गई।

जस्सासिंह ने अमृतसर और गुरुदासपुर के जिलों पर भी अधिकार कर लिया था। सन् 1808 ई० में महाराजा रणजीतसिंह ने इस मिसल का सारा प्रदेश अपने राज्य में मिला लिया।

Sikh

9. फुलकियां मिसल – इस मिसल के संस्थापक चौ० फूल सिद्धू गोत्र के जाट थे। इनकी सन्तान ने इतना शीघ्र वैभव और स्थिर प्रसिद्धि प्राप्त की कि जिससे पंजाब के समस्त सिक्खों ने इन्हें सर्वप्रथम शासक स्वीकार किया।

जिन दिनों पंजाब में चारों ओर मिसलों द्वारा की गई राज्य क्रान्ति से प्रान्त का वातावरण अशान्त एवं अव्यवस्थापूर्ण था, उस समय चौ० फूल के वंशजनों ने प्रयत्न करके पटियालाजींदनाभा राज्यों की स्थापना की, जिनको फूल के नाम पर फुलकियां राज्य कहा जाता है।

Sikh Jat State | पंजाब में सिक्ख जाटों का राज्य

Sikh

10. सुकरचकिया मिसल – इस मिसल का नाम सुकरचकिया इसलिए पड़ा कि इसके संस्थापक और सदस्य सुकरचकिया गांव  के निवासी थे।

इसकी स्थापना करने वाला नेता बुद्धासिंह शिशि गोत्र का जाट था। इस मिसल के बड़े-बड़े सरदार, बुद्धासिंह के वंशज नौधसिंह, चरतसिंह, महासिंह और रणजीतसिंह थे।

सिक्खों की 12 मिसलों में सुकरचकिया मिसल सबसे शक्तिशाली थी। इस मिसल का सबसे शक्तिशाली नेता सरदार महासिंह का पुत्र रणजीतसिंह था।

Sikh

उसने सब मिसलों को जीतकर एक शक्तिशाली Sikh Jat राज्य बनाया जिसकी राजधानी लाहौर थी। वह शेरे पंजाब कहलाये।

Sikh धर्म से यदि जाट को एक मिनट के लिए हटा लिया जाये तो ये थोथा चना रह जायेगा | गारंटी से बोलता हूँ |

चौधरी रणधीर देशवाल जिला रोहतक हरियाणा