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kannauj | कन्नौज राज्य | सम्राट हर्षवर्धन बैंस

kannauj – कन्नौज राज्यसम्राट हर्षवर्धन बैंस

सन् 647 ई० में सम्राट् हर्षवर्धन की मृत्यु के पश्चात् भारत अनेक स्वतन्त्र राज्यों में विभक्त हो गया और उनके आपस में युद्ध होते रहते थे। उन राज्यों में जाट व गुर्जर राज्य अनेक प्रदेशों पर रहे और बाद में राजपूत राज्य स्थापित हुए।

सन् 647 ई० से सन् 1192 ई० तक के जाटवंशज राजाओं के राज्य का भारत के अनेक प्रदेशों पर होने का वर्णन पिछले अध्यायों में लिख दिया गया है।

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इस अध्याय में उनका केवल संकेत ही दिया जायेगा तथा उनके अतिरिक्त अधिक कारनामों का संक्षिप्त वर्णन किया जायेगा।

इस काल में गुर्जर और राजपूतों के राज्य और मुसलमान आक्रमणकारियों का भी संक्षिप्त वर्णन किया जायेगा।

kannauj राज्य – हर्षवर्धन बैंस की मृत्यु के बाद उसका कोई उत्तराधिकारी नहीं था, तथा कन्नौज का शासक यशोवर्मन बन गया।

वह वरिक गोत्र का जाट सम्राट था (जाट्स दी ऐनशन्ट रूलर्ज पृ० 211, लेखक बी० एस० दहिया)।

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kannauj – कन्नौज राज्य – सम्राट हर्षवर्धन बैंस

यह बड़ा शक्तिशाली सम्राट् था जिसका शासन बड़े प्रदेश पर था। इसने कश्मीर नरेश मुक्तापीड़ के सहयोग से तिब्बत पर चढ़ाई की और बहुमूल्य सफलता प्राप्त की।

इसके उत्तराधिकारी बड़े दुर्बल थे। प्रतिहार गुर्जरवंश के राजा नागभट्ट ने उनको जीतकर kannauj पर अपना राज्य स्थापित किया।

कन्नौज पर गुर्जर प्रतिहारों का शासन बहुत दिनों तक रहा।

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मिहिरभोज प्रथम (835-890 ई०) और महेन्द्रपाल प्रथम इस वंश के सबसे बड़े राजा हुये।

इस मिहिरभोज प्रथम के उत्तराधिकारी महेन्द्रपाल द्वितीय ने अपने पिता के राज्य की रक्षा की परन्तु उसके पश्चात् महीपाल को राष्ट्रकूट इन्द्र ने सन् 919 ई० में पराजित करके kannauj राज्य का शासक बन गया।

यह इन्द्र राष्ट्रकूट-राठी जाट था |

बुन्देलखण्ड के जैजाक चन्देले (जाटवंशज) ने इन्द्र राठी से कन्नौज को जीत लिया। कन्नौज का पतन होता ही चला गया।

जब सन् 1018 ई० में महमूद गजनवी कन्नौज पहुंचा तो प्रतिहार राजा राज्यपाल ने उसके सामने आत्म समर्पण कर दिया।

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प्रतिहारों के पतन के बाद 11वीं शताब्दी के अन्त में गाहड़वार (गहरवार) या राठौड़ वंश का राज्य कन्नौज पर स्थापित हो गया।

राष्ट्रकूट या राठौड़ एक ही वंश है। (राजस्थान के राजवंशों का इतिहास पृ० 49, 50 लेखक जगदीशसिंह गहलोत)।

kannauj – कन्नौज राज्य – सम्राट हर्षवर्धन बैंस

राठ या राठी जाटवंश है। जब राजपूत संघ बना तब इसी वंश के कई नाम प्रचलित हुए। जैसे राठ-राठी, राष्ट्रवर, राष्ट्रवर्य, राष्ट्रकूट, राठौर-राठौड़, रठीढ़ ।

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kannauj पर इस राठौरवंश के राजा चन्द्रदेव ने राज्य स्थापित किया। इस वंश का सब से अधिक शक्तिशाली राजा चन्द्रदेव का पोता गोविन्दचन्द्र था जिसका राज्य 1114 ई० से 1160 ई० तक रहा।

इस वंश का पांचवां तथा अन्तिम राजा जयचन्द था, जो पृथ्वीराज चौहान का बड़ा शत्रु था। सन् 1194 ई० में चांदवाड़ के युद्ध में मुहम्मद गौरी से बुरी तरह पराजित हुआ तथा मारा गया।

उसकी मृत्यु के साथ ही राठौरवंश का अन्त हो गया और kannauj पर मुसलमानों का अधिकार हो गया।

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Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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