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Jhunjhunu | Jujhar Singh Nehra

Jhunjhunu

नेहरा

सूर्यवंशी वैवस्वत के इक्ष्वाकु, नरिष्यन्त (उपनाम नरहरि) आदि कई पुत्र हुए। नरहरि की सन्तान सिंध में नेहरा पर्वत के समीपवर्ती प्रदेश के अधिकारी होने से नेहरा नाम से प्रसिद्ध हुई।

इस तरह से नेहरा जाटवंश प्रचलित हुआ।

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जयपुर की वर्तमान शेखावाटी के प्राचीन शासक नेहरा जाट थे जिन्होंने सिंध से आकर नरहड़ में किला बनाकर दो सौ वर्ग मील भूमि पर अधिकार स्थिर कर लिया था।

यहां से 15 मील पर इन्होंने नाहरपुर बसाया।

उनके नाम से झुंझनूं के निकट का पहाड़ आज भी नेहरा कहलाता है। दूसरे पहाड़ का नाम मौड़ा (मौरा) है जो मौर्य जाटों के नाम पर प्रसिद्ध है।

मुगल शासन आने से पूर्व शेखावत राजपूतों ने नेहरा जाटों को पराजित कर दिया और इनका राज्य छीन लिया।

नेहरा जाटों की यह नेहरावाटी आवासभूमि शेखावतों के विजयी होते ही शेखावाटी के शेखावतों से बदला लेने के लिए नेहरा जाटों ने मुगलों को समय समय पर भेंट देकर सन्तुष्ट करने का प्रयत्न किया।

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इस कारण ये “शाही भेंटवाल” के नाम से पुकारे जाने लगे। मुगलों से इन्हें कोई सहयोग न मिला क्योंकि मुग़ल राजपूतों से सामूहिक समर्थन प्राप्त कर चुके थे।

नेहरा जाटों में सरदार झूंझा अथवा जुझारसिंह बड़े प्रसिद्ध वीर हुए हैं। उनके नाम से Jhunjhunu नगर विख्यात है। कुंवर पन्नेसिंह जी ने “रणकेसरी सरदार जुझारसिंह” नाम की पुस्तक में लिखा है –

सरदार जुझारसिंह का जन्म संवत् 1721 विक्रमी श्रावण महीने में हुआ था। उनके पिता Jhunjhunu के नवाब सादुल्ला खां के यहां फौजदार के पद पर नौकरी करते थे।

युवा होने पर सरदार जुझारसिंह उसी नवाब की सेना में जनरल हो गये।

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वे भारत में फिर से जाटसाम्राज्य स्थापित हुआ देखना चाहते थे। उन्हीं दिनों उनकी मुलाकात एक राजपूत शार्दूलसिंह से हुई जो नवाब के यहां आकर नौकर लगा था।

दोनों में निर्णय हुआ। शार्दूलसिंह ने वचन दिया कि नवाबशाही को नष्ट कर्ने पर हम आपको अपना सरदार मान लेंगे। अवसर आने पर सरदार जुझारसिंह ने झुंझनूं और नरहड़ के नवाबों को परास्त कर दिया।

अन्त में

सत्रह सौ सतासी, आगण मास उदार।

सादै, लीन्हों झूंझनूं सुठि आठें शनिवार। ”

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विजय प्राप्त करके एक बार पुनः नेहरावंश की ओर राजस्थान का ध्यान आकर्षित कर ही लिया। किन्तु शेखावत और कछवाहा राजपूतों ने एक दरबार करके विजयी सरदार जुझारसिंह को सरदार घोषित करने के नाम पर धोखे से एकान्त में मार डाला।

यह सूचना मिलने पर वहां के जाटों ने विद्रोह कर दिया। जाट-क्षत्रियों के इस विद्रोह को दबाने के लिए शेखावतों ने उन्हें कई तरह के प्रलोभन दे दिए।

सरदार जुझारसिंह अपनी जाति के लिए शहीद हो गये। उनकी कीर्ति आज तक गाई जाती है।

इस घटना के कुछ समय पश्चात् नेहरा जाटों ने शेखावाटी छोड़ दी। वहां से आकर नेहरा जाटों ने देहली से मेरठ वाले मार्ग पर बेगमाबाद गांव बसाया।

वहां से मुदाना, याकूबपुर्र, मवईऔरंगाबाद, गदानागावडीकादराबाद व बिसौखर  आदि 12 गांव नेहरा जाटों ने बसाये। मोदीनगर की औद्योगिक बस्ती इन्हीं की भूमि पर आबाद है।

नेहरा जाटगोत्र के लोग हरयाणा के रोहतक जिले में सुन्दरपुर, निन्दाना, गूढा आदि गांवों में आबाद हैं। कुछ हिसार व जींद जिलों में बसे हैं। पंजाब के पटियाला जिले में ये लोग सिक्खधर्मी हैं।

पाकिस्तान में इनकी बड़ी संख्या है जो कि मुसलमानधर्मी हैं।

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Jhunjhunu नेहरा का शाखागोत्र – भेंटवाल-भेंटवाण

 

1. जाटों का उत्कर्ष, पृ० 310, लेखक योगेन्द्रपाल शास्त्री।
2. भारत का इतिहास पृ० 65, हरयाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड भिवानी, हिन्दुस्तान की तारीख उर्दू पृ० 244
3. जाट इतिहास पृ० 76, लेखक ले० रामस्वरूप जून
असल में सूर्यवंश का प्रचलन तो कश्यपपुत्र विवस्वत् से हुआ था।
4. जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत, पृष्ठान्त-225

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Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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