Jatram Blog

मरने की कीमत मिले – दीनबन्धु सर छोटूराम

पंजाब कर्जमुक्ति कानून दीनबन्धु चौधरी छोटूराम – मरने की कीमत मिले

चौधरी छोटूराम को हम लोग हरयाणा के एक प्रमुख वकील, जमीदारो के सर्वोपरि नेता और पंजाब के एक योग्य शासक के रूप में जानते हैं |

किन्तु उनका एक और भी रूप था, वह रूप था-सदा शांत रहने वाले शिव को जो रूद्र रूप कहा जाता था |

जिन्होंने सदा कानून की रक्षा की और जिन्होंने कभी भी कानून को हाथ में न लेने का उपदेश दिया |

उन्हें भी परिस्थितियो ने इतना विवश कर दिया की जमीदारो से कहना पड़ा कि जब मरना ही हैं तो इस तरह से मरो की मरने की कीमत तुम्हारे वारिसो को प्राप्त हो जाए |

अहिंसा के उपासक महात्मा गाँधी को भी एक समय कहना पड़ा था, जिस अहिंसा से इज्जत की रक्षा भी न होती हो तो उसे मैं कायरो की अहिंसक कहूँगा |

पंजाब कर्जमुक्ति कानून दीनबन्धु चौधरी छोटूराम

पंजाब कर्जमुक्ति कानून दीनबन्धु चौधरी छोटूराम

इस प्रकार का मंत्र देने का अवसर क्यों आया वह उसके सन 1934 में पंजाब कोंसिल में रिलीफ इन्डेबटेनैस अथार्त पंजाब कर्जमुक्ति कानून बिल पर बोले हुए इन शब्दों से ज्ञात हो जाता हैं |

उन्होंने कहा – हमसे कहा जा सकता हैं कि हम धमकी देकर पंजाब कर्जमुक्ति कानून बनवाना चाहते हैं और हमने ऐसी स्तिथिया पैदा कर दी हैं कि यह पंजाब कर्जमुक्ति कानून नहीं बना तो खून – खराबिया बढ जाएँगी |

हम लोगो ने उस पर अधिक तो कुछ नहीं कहा हैं जो सर माईनोर्ड ने लन्दन के एक प्रमुख अखबार फ़ॉरन अफेयर्स में लिखा हैं |

वे लिखते हैं , सूदखोरों की अनुचित मांगो पर कभी रोक नहीं लग सकती थी यदि सर्वसाधारण जनता न्याय को अपने हाथ में नहीं लेती  |

सर जॉन माईनार्ड का संकेत इन बातो की ओर हैं कि कर्जे से दबे हुए लोगो पर जब अत्याचार सीमा पार पहुच गए |

पंजाब कर्जमुक्ति कानून दीनबन्धु चौधरी छोटूराम

कर्जा वसूल करने के लिए जब साहुकारो ने कुर्कियो और नीलामो द्वारा उनका सर्वस्व हरण करके उन्हें रास्ते का भिखारी बनाना आराम्भ कर दिया तो उन्होंने अपनी जाने हथेली पर रख ली और वे साहुकारो का क़त्ल करने लगे |

इससे साहुकारो में आतंक छाया और उनकी सरगर्मिया कुछ ठंडी पड़ी |

सर माईनार्ड का यह कथन परिस्थिति का दिग्दर्शन हैं | हम भी यही कहते हैं की परिस्थितिया बहुत निराशाजनक हैं |

यदि साहुकारो को यही छूट रही कि वो किसानों के बैल-हल, खाने पीने की चीजें और पहनने के कपड़े तक कुर्क करा सकें तो इस निर्दयीपन का यह नतीजा होने की आशंका है कि साहूकारों के कत्ल होंगे |

इस बात को हम देहाती सदस्यों ने प्रकट किया है | हम से कहा जाता है कि हम बन्दूकों के बल पर पंजाब कर्जमुक्ति कानून बनवा रहे है और उदंडता पर उतर आये है |

हमारे पास बंदूके नहीं है, सिर्फ यथार्थ को प्रकट करने की शक्ति है | हमने ब्याज की दर 8 रुपया प्रतिशत वसूल करने का सुझाव दिया है |

पंजाब कर्जमुक्ति कानून दीनबन्धु चौधरी छोटूराम

इस पर कुमुन्दलाल पूरी बहुत बिगड़े है, परन्तु अब तक मनमाने अबाधित ब्याज दरों से गरीब का जो कचूमर निकलता रहा है उससे उनका दिल नहीं पसीजता |

मैं ब्याज के कुल आकडे अदालत कीे फाइलों के आधार पर पेश करता हूँ |

अभी पंडित नानकचन्द ने बताया था कि एक साहूकार ने तेईस सौ रूपये मूल धन की ब्याज समेत सात हजार की डिग्री प्राप्त की है |

दूसरी मिशाल भी सुनिए – सन 1882 में एक जमींदार ने 500 रूपये के बदले में अपनी 3 हजार कनाल जमीन गिरवी रखी |

इसमें तीन सौ रूपये का ब्याज 25 रूपये सालाना साहूकार ने लिखवाया और दो सौ रूपये का ब्याज जमीन के मुनाफे के बराबर कर दिया | इस जमीन को गिरवी रखने वाला सारी जिन्दगी जमीन नहीं छुड़ा पाया |

अब दो साल पहले उसके वारिस ने जमीन छुडवाने के लिए अदालत का सहारा लिया |

अदालत ने फैसला दिया कि इतने वर्षों में यह धन ब्याज सहित दो लाख दस हजार रूपये हो चूका है |

इतना धन देकर जमीन छुड़ाई जा सकती है | हाई कोर्ट ने भी नीचे की अदालत की इस तजवीज को बहाल रखा है |

अदालत से हम क्या कहे ? उन्होंने तो यह फैसला आज तक के प्रचलित कानून के अंदर दिया है |

पंजाब कर्जमुक्ति कानून

पंजाब कर्जमुक्ति कानून दीनबन्धु चौधरी छोटूराम

क्या हम इस प्रकार के कानून को जारी रहने दे? यदि हमारे विरोधी मित्र शोषण के इस प्रकार के प्रवाह को चालू रखना चाहते है तो साहूकार के कत्ल की आशंकाएं कैसे समाप्त हो सकती है ?

प्रत्येक सभ्य सरकार का यह फर्ज़ है कि वह इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए मूल बीमारी का इलाज करे |

66 वी धारा में हमने जो पंजाब कर्जमुक्ति कानून संशोधन रखा है उसका एक कारण है |

स्पष्ठ तौर पर इस धारा में जमींदार को यह रियायत दी गयी है कि उसके अनाज का उतना हिस्सा जिससे साल भर उसका गुजरा हो सके और उसके हल बैल और रहने के मकान की साहूकार कुर्की नहीं करा सकेगा |

परन्तु इस धारा में जमींदार वह माना गया है जो अपने हाथ से खेती करता हो,

इसके अनुसार समस्त जमींदार विधवाएं, नाबालिग बच्चे और लूले लंगड़े जमींदार इस रियायत से अनेक जजों ने वंचित कर दिए थे |

इसलिए हमने अपने संशोधन में इसकी परिभाषा खेती पेशा कौम लगा दी है |

चौधरी साहब के पंजाब कर्जमुक्ति कानून के खिलाफ जमींदार हितों में कोंसिल के शहरी प्रतिनिधि ही नहीं थे, बल्कि वो जज भी थे जो गैर जमींदार थे |

पंजाब कर्जमुक्ति कानून दीनबन्धु चौधरी छोटूराम

अनेक जजों ने किसान के रहने के मकान की कुर्की के आदेश इस दलील के साथ दिए थे कि मकान बहुत बड़ा है इसलिए ऋणी के रहने लायक हिस्सा छोडकर बाकी कुर्क कर दिया जाये |

यदि भाग्य से किसी के पास दो मकान थे तो निश्चित ही एक कुर्क कर दिया जाता था |

अत: उन्होंने झुंझला कर कहा, सभी स्थितियों से परिचित होने पर भी मेरे विरोधी मित्र दलीलें देते है तो मुझे कहना पड़ेगा कि यह उनकी बुद्धि का भ्रष्टाचार है |

पंजाब के दो करोड़ पैंतीस लाख आबादी में से दो करोड़ बारह लाख आदमी कर्जे से पीड़ित है

और साहूकारों की संख्या जिसमे इक्कीस हजार जमींदारों समेत कुल चालीस हजार है |

फिर केवल उन्नीस हजार लोगों के हित के लिए सवा दो करोड़ की गर्दन पर वार करने में लज्जा अनुभव नहीं करते |

आपको सहायता तो करनी चाहिए पीड़ितों की, शोषितों की |

किन्तु आप लोग तो उल्टा लुटेरों, शोषकों की मदद कर रहे हो | आखिर आप लोगों की बुद्धि को क्या हो गया है ?

पंजाब कर्जमुक्ति कानून

पंजाब कर्जमुक्ति कानून दीनबन्धु चौधरी छोटूराम

हमारे प्रान्त पर इस समय मालगुजारी का बोझ तीन करोड़ रूपये है और साहूकारों के ब्याज का बोझ दस गुणा यानि तीस करोड़ है |

जब हम मालगुजारी के बोझ को असहनीय बताते है तो ब्याज के इतने बोझ को कैसे बर्दास्त करेंगे ?

अब मैं अंतिम बात कहना चाहूँगा | मान लो यह कानून आपने पास नहीं होने दिया |

साहूकार डिग्रियां प्राप्त करने के लिए वकीलों को पैसे देंगे, कोर्ट फ़ीस दाखिल करेंगे और कुछ भ्रष्ट काम भी करेंगे |

इस प्रकार प्राप्त हुई डिग्रियां का मूल्य क्या होगा ? यदि आप में से कोई सज्जन बैंकिंग का काम करना चाहे तो ये डिग्रियां प्राप्त करना उतना ही कठिन नहीं है जितना कठिन काम उनकी अदायगी है |

और कर्जदार जब यह समझ लेगा कि डिग्री का सम्पूर्ण रुपया अदा करना उसकी और उसके परिवार की मौत है तो वह जो रास्ता अपनाएगा वह कितना भयंकर होगा |

पंजाब कर्जमुक्ति कानून दीनबन्धु चौधरी छोटूराम

यदि आपने साहूकार को यह सलाह दे दी कि कोई भी मरो इससे हमें क्या, तो इसमें हमारा भी क्या अपराध होगा

यदि हम भी कर्जदारों को यह सुझाव दे कि जब मरना ही है तो इस प्रकार मरो कि मरना व्यर्थ न जाये |

यह भी देखे

चौधरी छोटूराम और जाट रेजिमेंट 

पंजाब कर्जमुक्ति कानून 

 

Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *