Jatram Blog

ठाकुर देशराज जाट इतिहास | शेखावाटी किसान आन्दोलन के नायक | जीवन परिचय

दोस्तों ठाकुर देशराज जाट इतिहास हमारा आज का विषय है | जाट लेखकों की कड़ी में उनके बिना कोई उल्लेख बेमानी होगा

क्योंकि वो जाट  किसान के वो अनमोल  रत्न थे जिनकी चमक से आज लाखों घरों में चिराग रोशन है |

हम ठाकुर देशराज जाट इतिहास का ऋण मरकर भी नहीं चूका सकते |

ठाकुर देशराज जाट इतिहास एक समाज सुधारक, स्वतंत्रता सेनानी और भारत में राजस्थान के इतिहासकार थे ।

उनका जन्म सोगरवार गोत्र के जाट परिवार में हुआ जो कि राजस्थान के गांव जघीना जिला भरतपुर में था।

वह भरतपुर के जाट राज्य में राजस्व मंत्री थे। उनकी पत्नी त्रिवेणी देवी थीं |

बचपन और परिवार ठाकुर देशराज जाट इतिहास

डॉ. पेमा राम के अनुसार, ठाकुर देशराज का पहला नाम घासी राम था। उनका जन्म 1895 ई में हुआ था।

शुरू में वह आर्य समाज के कट्टर अनुयायी थे पर बाद में उन्होंने कट्टरपंथी विचारधारा को छोडकर धर्मनिरपेक्ष जीवन जीने का निर्णय लिया था ।

उन्होंने 1920-21 से ही राजनीति में भाग लेना शुरू कर दिया। वह शेखावाटी किसान आंदोलन के मुख्य नेता थे और 1931 से 1935 तक शेखावाती किसान आंदोलन के पीछे उनकी अपराजय शक्ति थी |

याद रहे ठाकुर देशराज को जीवन की ऊँचाइयों तक पहुँचाने में आपकी पहली पत्नी श्रीमती उत्तमा देवी का महत्वपूर्ण योगदान था, जो आगरा जिले के कठवारी गाँव के एक सामान्य जाट किसान परिवार से थी |

वे ठाकुर देशराज के साथ सुख-दुःख की हर घड़ी में सच्ची अर्द्धांगिनी साबित हुई |

उस शेखावाटी किसान आन्दोलन में हर मोर्चे पर सक्रिय सहयोगी और सामंती तत्वों के अनेक अत्याचारों को हंसते-हंसते सहन करने वाले ठाकुर हुकम सिंह इन्ही उत्तमा देवी के सगे छोटे भाई थे |

ठाकुर देशराज की पहली पत्नी की असमय मृत्यु के बाद ठाकुर साहब की दूसरी शादी अछनेरा के समीप अरदाया गाँव में त्रिवेणी देवी के साथ हुई |

श्रीमती त्रिवेणी देवी भी श्रीमती उत्तमा देवी के समान ही ठाकुर साहब की सच्चे अर्थों में जीवनसंगिनी थी |

वे स्वतंत्रता आन्दोलन में भी निरंतर सक्रिय रहीं तथा उन्होंने तब डेढ़ वर्ष तक जेल की सजा भी भोगी |

हम पढ़ रहे है ठाकुर देशराज जाट इतिहास

ठकुरानी त्रिवेणी देवी से पुत्र शेर सिंह हुये | दोनों पत्नियों के अलावा ठाकुर देशराज जाट इतिहास साहब का साथ संकट की घड़ियों में साथ देने वाले उनके छोटे भाई श्री खड़गसिंह थे |

ठाकुर देशराज जाट इतिहास साहब द्वारा लिखे गए संस्मरण ‘मेरी जेल यात्रा के 108 दिन’ में श्री खडगसिंह का अनेक स्थानों पर जिक्र है |

ठाकुर खड़ग सिंह साहब के इकलोते बेटे हरिसिंह वर्तमान में एक सहकारी बैंक में मैनेजर पद पर कार्यरत है |

शेखावाती किसान आंदोलन के नेता ठाकुर देशराज जाट इतिहास 

आजादी से पहले वर्तमान राज्य राजस्थान में कई रियासतों के राज्य शामिल थे, जो 30 मार्च 1949 को इस राज्य में विलीन हो गए थे

क्योंकि सरदार पटेल ने लट्ठ के जोर पर इन्हें भारत में मिला दिया था नही तो ये राजपूत राजवाड़े अपना अलग देश रियासत पर अड़े बैठे थे ।

रियासतों के शासन के दौरान, राजस्थान में सामंतवाद की जागीरदारी प्रथा के कारण किसानों की स्थिति पुरे भारत में सबसे खराब थी |

अंग्रेजों के शासनकाल के दौरान राजपूत जागीरदारों द्वारा बड़ी बेशर्मी से उनका शोषण और क्रूरता से दमन किया जाता था ।

वे अपने मौलिक अधिकारों से वंचित थे। जब वे इन राजपूत जागीरदारों को “लाघ” या “बेगार” नहीं दे पाते तो अमानवीय अत्याचारों से उन्हें कठोर सज़ा दी जाती थी

और उनकी फसलों को नष्ट किया जाता था। इतना जुल्म तो अंग्रेज़ भी नही करते थे जीतने ये हिन्दू राजपूत ढहाते थे |

हम पढ़ रहे है शेखावाटी के किसान आन्दोलन के नेता ठाकुर देशराज जाट इतिहास

किसान भूमि के किरायेदार थे और उनकी हालत जमींदारों के शोषण के कारण दयनीय थी।

जमींदार और बिश्वेदार आदि नामक भेडिये उनका खून हाड मांस सब कुछ नोचते रहते थे | किरायेदारों को उनकी खेती की भूमि पर कोई मालिकाना अधिकार नहीं था।

असल में किसान केवल खेती करने वाला एक मज़दूर था और उसका जीवन हमेशा जमीनदारों की सनकी दया पर निर्भर होता था। ठाकुर देशराज जाट इतिहास

लेकिन ठाकुर देशराज के नेतृत्व ने एक वर्ग के रूप में किसानों को जागृत व संगठित किया था और उनका नारा जमीन जोतने वालों को ही जमीन “जो बोयें वही मालिक” मांग के कारण यह आन्दोलन जागीरदारों के लिए उथल-पुथल और भयानक परिणाम जैसा था |

ठाकुर देशराज जाट इतिहास ने जाट महासभा के बैनर तले राजस्थान के किसानों को एकजुट किया।

उन्होंने झुनझुनू जिले के 1000 गांवों में जागीरदारों के खिलाफ लगान-मुक्ति आंदोलन में किसानों का नेतृत्व किया।

ठाकुर देशराज जाट इतिहास

उन्होंने राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में सीकर और झुनझुनु जिलों के किसानों की सफल जन रैल्ली का आयोजन किया।

इस शत्रुतापूर्ण स्थिति में राज्य की नई नई बनी सरकार का नेतृत्व किया। इस स्थिति को सुलझाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत थी |

उन्होंने किसानों के संरक्षण का इतना बड़ा दबाव बनाया था कि सरकार को तुरंत कदम उठाने पड़े

और इस उद्देश्य के लिए समय की ज्वलंत जरूरत को देखते हुए सरकार को, “The Rajasthan Protection of Tenants Ordinance, 1949” कानून का प्रावधान करना पड़ा |

इस प्रकार ठाकुर देशराज जाट इतिहास राजस्थान में जागीरदारी उन्मूलन में परिवर्तन का एक सशक्त पुरोधा था।

ठाकुर देशराज 1934 में प्रकाशित हिंदी पुस्तक जाट-इतिहास के लेखक हैं।

किसान आन्दोलन की पृष्ठभूमि ठाकुर देशराज जाट इतिहास

राजस्थान के सीकर जिले में, हर एक समूह ( खाप ) में जाटों के 500 गांव थे, लेकिन हरियाणा और उत्तर प्रदेश के विपरीत ब्रिटिश शासन के समय उनकी स्थिति बहुत ही पिछड़ी हुई थी।

उनकी हालत खराब और बेसहारा जैसी थी। राजपूतों ने अपना राज आते ही सभी खापों को खत्म कर दिया था |

इसका कारण राजपूत सामंती ठाकुर (बीकानेर और शेखावाटी) का अस्तित्व था। इस विशाल फैले हुए क्षेत्र में, कोई भी प्राथमिक विद्यालय नहीं था |

किसी भी जाट को अपने नाम के साथ सिंह लगाने की इजाजत नहीं थी ।

वे एक रंगीन पगड़ी तक नहीं पहन सकते थे। वे किसी राजपूत ठाकुर के सामने एक चारपाई पर बैठ नहीं सकते थे ।

जाट अपने घर में भी कभी भी कोई छायादार पेड़ नहीं लगा सकता था |

उनसे एक अछूत जैसा व्यवहार किया जाता था । जाट महिलाओं को नीची जातियों द्वारा पहने जाने वाले कपड़े पहनने के लिए मजबूर बनाया गया था।

ठाकुर देशराज जाट इतिहास

उन्हें सोने के गहने पहनने की अनुमति नहीं थी। अपने शादी के दिन जाट के बच्चों को घोड़े की सवारी करने की अनुमति नहीं थी।

जाटों पर ‘लाघ’ नामक पचास प्रकार के टेक्स लगाये हुए थे ।

कोई कानून या न्यायालय नहीं था | केवल एक ही कानून चलता था जो जागीरदार राजपूतो द्वारा बोल दिया जाता था।

इन सामंती अभिमानी राजपूतो ने अपनी शक्ति के नशे में चूर होकर जाट और अन्य समुदायों को लगातार अत्याचारों से पूरी तरह से दबा दिया।

ठाकुर देशराज जाट इतिहास द्वारा प्रकाशित अख़बार व पुस्तक

ठाकुर देशराज ने 1934 में जाट इतिहास लिखा था, साथ ही उन्होंने स्थानीय समाचार पत्रों को भी प्रकाशित किया था

ताकि किसानों को उनके अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाए और उन्हें आत्म-सम्मान से जीने के लिए जगाया जा सके।

उन्होंने इस प्रयोजन के लिए 1931 में ‘राजस्थान संदेश’ नामक एक अखबार की शुरुआत की।

उनके प्रयासों के साथ अखिल भारतीय जाट महसभा संगठन के सदस्य भी शेखावाटी में किसान आंदोलन से जुड़ पाए थे ।

ठाकुर देशराज जाट इतिहास 1929 में मांडवा के लिए आर्य समाज समारोह में भाग लेने के लिए आए और शेखावाटी क्षेत्र में जाटों की सामाजिक समस्याओं का एहसास हुआ।

उन्होंने किसानों पर उत्पीड़न के कृत्यों पर ‘जाटवीर’ में कई लेख प्रकाशित किए, जिससे उन्हें जागृत किया गया।

बाद में ‘जाटवीर’ पत्र भी झुनझुनू से प्रकाशित किया गया था।

आगरा से उनके द्वारा प्रकाशित पत्र ‘गणेश’ ने किसान आंदोलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

ठाकुर देशराज जाट इतिहास ने पंडित तारकरेश्वर शर्मा के साथ हाथ मिलाया और अख़बार ‘ग्राम समाज’ 1929 में शुरू हुआ।

बाद में उन्होंने अखबार “किसान” भी प्रकाशित किया। इन सभी अख़बारों ने किसानों में एक क्रांतिकारी परिवर्तन आरम्भ किया।

पुष्कर अधिवेशन 1925 ठाकुर देशराज जाट इतिहास

Thakur deshraj

ठाकुर देशराज 1925 में अखिल भारतीय जाट महासभा के अधिवेशन में पुष्कर पहुंचे, जिसकी अध्यक्षता भरतपुर के महाराजा किशन सिंह ने की थी।

सर चौधरी छोटू राम, मदन मोहन मालवीय, सेठ चौधरी छाजूराम आदि इस अधिवेशन में शामिल थे।

इस अधिवेशन में अन्य प्रसिद्ध किसान नेताओं ने भी भाग लिया था।

अजमेर-मेरवाड़ा के मास्टर भजन लाल बिजरानिया के आग्रह पर यह समारोह आयोजित किया गया था ।

शेखावाटी के सभी हिस्सों के किसान, अर्थात् चौधरी गोविंद राम, कुंवर पन्ने सिंह देवोद, राम सिंह बख्तावरपुरा, चेतराम भद्रवासी, भूडा राम संगासी, मोती राम कोटरी, हर लाल सिंह आदि आये थे।

शेखावटी किसानों ने पुष्कर में दो शपथ ली,

1. सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के लिए शिक्षा के प्रसार से वे समाज के विकास के लिए काम करेंगे।

2. जागीरदारों द्वारा किसानों के शोषण के मामले में हमें सिर्फ ‘करो या मरो’ का व्यवहार करना चाहिए ।

अंतिम अरदास ठाकुर देशराज जाट इतिहास

ठाकुर देशराज ने 17 अप्रैल 1970 को सुबह सुबह स्नान करके भगवान की भक्ति कर रहे थे इसी दौरान वो अचेत लेट गये

जब अन्य पारिवारिक सदस्य ने उन्हें उठाना चाहा तो पता चला ठाकुर देशराज जाट इतिहास इस नश्वर संसार को त्याग कर परमात्मा में लीन हो चुके है |

उस समय वो 75 वर्ष पुरे कर चुके थे इतेफाक कहे या विधि का विधान इसी दिन 17 अप्रैल 1895 को इसी समय उनका जन्म भी हुआ था |

शायद वो मानव मात्र के उत्थान के संकल्प से इस धरती पर आये थे अपना काम करते ही ठाकुर देशराज जाट इतिहास इस जगह को अलविदा कह गये |

यह भी पढ़े ठाकुर देशराज जाट इतिहास

जाट लेखक केप्टन दिलीप सिंह अहलावत 

जाट लेखक कमान्डेंट हवासिंह सांगवान 

दीपेन्द्र सिंह हुड्डा 

जाट गजट 

दलबीर सिंह सुहाग 

ठाकुर देशराज जाट इतिहास

Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *