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प्रताप सिंह कैरों एक खोई विरासत | आधुनिक पंजाब के निर्माता | ढिल्लों जाट

दोस्तों हमारा आज का विषय है Partap Singh Kairon hindi biography 

Partap Singh Kairon hindi biography एक ऐसे मुख्यमंत्री थे जो दूरगामी सोच रखते थे । उनके द्वारा स्थापित संस्थाएं लगातार आगे बढ़ रही हैं, लेकिन एक प्रगतिशील संयुक्त पंजाब ( पंजाब हरियाणा हिमाचल ) का उनका सपना अभी तक पूरा नहीं हुआ है। जैसा कि राज्य सिकुड़ गया, इसलिए उनकी विरासत भी जैसे कही खो गयी है |

Partap Singh Kairon hindi biography

वह एक राजनेता थे, पर राजनीतिज्ञ नहीं थे | यह संयुक्त पंजाब के सबसे प्रतिष्ठित मुख्यमंत्री सरदार प्रताप सिंह कैरो के बारे में आम बात है, जिन्होंने 1965 में अपनी हत्या तक पंजाब के हिन्दू व सिख जाट को लहूँ और मांस समझकर इनके विभाजन का रोके रखा था।

मुख्यमंत्री  Partap Singh Kairon hindi biography 

उनका जन्म जिला अमृतसर की पट्टी तहसील के कैरों गाँव में 1 अक्टूबर 1901 में ढिल्लों जाट परिवार में हुआ था | इसी कारण कैरों को उनके सरनेम के तौर पर जाना जाने लगा |

प्रताप सिंह कैरो ढिल्लों जाट गोत्र दूरदर्शी सोच के धनी थे । उन्होंने जिस आधार पर पंजाब को समृद्ध बनाया | भूमि सुधारों को लागू करने में उनकी भूमिका और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना की स्थापना की, जिसने हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने ही पंजाब को देश के औद्योगिक मानचित्र पर रखा। चंडीगढ़ शहर और फरीदाबाद की औद्योगिक क्षेत्र (वर्तमान में हरियाणा में) के निर्माण के पीछे उनका मजबूत हाथ था। कैरो ने ही संयुक्त पंजाब में प्राथमिक और मिडिल स्कूल शिक्षा को मुफ़्त और अनिवार्य बनाया।

प्रत्येक जिले में तीन इंजीनियरिंग कॉलेज और एक पॉलिटेक्निक खोला। सिंचाई, विद्युतीकरण और सड़कों के मामले में राज्य के अधिकतर बुनियादी ढांचे स्थापित करने वाले वही पुरोधा थे।

पंजाब, भारतीय संघ का पहला राज्य था जहां 1964 में ही सभी गांवों को विद्युतीकरण किया गया था। जबकि देश के कई राज्यों में आज तक सभी गाँव में बिजली नहीं पहुंच पाई है |

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भाखड़ा बांध के उद्घाटन के मौके पर PM नेहरु , मुख्यमन्त्री पंजाब प्रताप सिंह कैरों और सिचाई मंत्री चौ. रणबीर हुड्डा | यह भाखड़ा बांध सर चौधरी छोटूराम के करकमलों से बना था | इन तीनों महापुरुषों ने केवल इसका उद्घाटन किया था |

Partap Singh Kairon hindi biography ने पंजाब के लिए विशाल समृद्धि के युग में शुरुआत की | उनके उत्तराधिकारियों ने हमे (Jatram team) को बड़े पैमाने पर उस विकास के बारे में बताया है जो उन्होंने किया था।

उन्हें 10 साल से भी कम समय में भारत-पाक विभाजन के तीस लाख शरणार्थियों के पुनर्वास का श्रेय जाता है और आधुनिक शहर चंडीगढ़ को राजधानी बनाकर एक मजबूत पंजाब की नींव रखी थी।

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आज पंजाब लगभग पचास साल बाद ही, उनका नाम लगभग भूल गया है, और उनके पोते आदेश प्रताप कैरो को उनका वारिस कम, पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के दामाद के रूप में ज्यादा जाना जाता है।

भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल, जो कैरो के साथ काम करते थे | “गिल कहते हैं कि उनकी विरासत जीवित है। “उसके बाद पंजाब के सभी मुख्यमंत्रियों ने उनकी विरासत को जीवित रखा है। वह भारत के अन्य मुख्यमंत्रियों के लिए एक आदर्श बेंचमार्क है ।

राजनेता नही जमीनी जननेता  Partap Singh Kairon hindi biography

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पंजाब विधानसभा चण्डीगढ़ में गैर किसान पंजाबियों के विरोध के बावजूद इस महत्वपूर्ण जमीन इस्तेमाल बिल पर जोरदार भाषण देकर इसे पारित करवाया Partap Singh Kairon hindi biography

Partap Singh Kairon hindi biography ने ही समृद्ध पंजाब की स्थापना के लिए हरित क्रांति और उद्योग के लिए जमीन तैयार की। उन्होंने राज्य में निवेश करने के लिए ओसवाल और जैजेस जैसे उद्योगपतियों को आमंत्रित किया था।

उन्होंने पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च का निर्माण करके उच्च शिक्षा को बढ़ावा दिया। उन्होंने प्रशिक्षण और दिशा के माध्यम से शरणार्थियों का पुनर्वास किया |

एशिया की सबसे बड़ी जाट धर्मशाला कुरुक्षेत्र उनकी दूरगामी सोच में से एक थी |

हम पढ़ रहे है Partap Singh Kairon hindi biography 

उन्होंने अविभाजित पंजाब में भूमि की किल्ला बंदी ( इस्तेमाल योजना) लागू करी | जिससे बंजर पड़ा बहुत बड़ा भूभाग इस्तेमाल में आया और सोना (खाद्यान) उगलने लगा | पंजाब ही इस प्रकार मैकेनाइजेशन द्वारा खेतों की तैयारी करने वाला एकमात्र भारतीय राज्य बना था ।

पंजाब विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग के एम. राजीव लोचन कहते हैं, “सबसे बड़ी चीज, उन्होंने सांप्रदायिक ताकतों को पंजाबी सुबा और भाषा आंदोलन दोनों का विरोध किया” पंजाब में कट्टरपंथी सिख तबके और हरियाणा के विभाजनकारी आर्य समाजी तबके पर अपनी हत्या तक लगाम कसे रखी |

वो सर चौधरी छोटूराम की भांति धर्म, भाषा और क्षेत्र से अधिक बड़ा खून के रिश्ते को मानते थे । हम जाट है हम हिन्दू मुस्लिम सिख सभी है और बेशक अलग अलग भाषा बोलते है, पर हमारी रगों में एक ही खून बहता है |

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उनके बेटे, गुरिंदर कैरो ( उम्र 82) का दावा है कि यदि वह कुछ समय ओर जीवित रहते तो पंजाब में आतंकवाद का जन्म नहीं होता, सतलज यमुना लिंक नहर मुद्दा, या चंडीगढ़ के बारे में उपद्रव होने का कोई मतलब ही नहीं था । सभी हरियाणवी हिन्दू जाट व पंजाबी सिख जाट उनका बराबर सम्मान करते थे |

गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में राजनीति विज्ञान विभाग के डॉ. जगरुप सेखों का कहना है कि कैरो पंजाब में अकाली दल की विभाजनकारी समझौतावाद राजनीति को नापसंद करते थे ।

उनका मानना था कि जितना तुम पंजाब को छोटा करना चाहते हो, उतना ही आप अपने लोगों की नाजायज़ मांगो व आकांक्षाओं को बढ़ा रहे हो । यह बात सत्य साबित हुई 6 फरवरी, 1965 को उनकी हत्या के एक वर्ष बाद ही, पंजाब को तीन टुकड़ों (पंजाब, हरियाणा, हिमाचल) में विभाजित कर दिया गया ।

शिक्षा Partap Singh Kairon hindi biography 

कैरो ने बर्कले और अमेरिका में मिशिगन विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और राजनीति विज्ञान में मास्टर डिग्री प्राप्त की थी, जहां वह नौ साल तक रहे थे। कैरो खानदानी राजनीतिक राजवंशों में विश्वास नहीं करते थे।

यह सार्वजनिक जीवन में उच्च मानकों का एक उदाहरण है, उन दिनों कैरो, गंभीर मधुमेह (शुगर) रोग के चलते यात्रा करते समय एक सरकारी डॉक्टर को साथ ले गये थे | इस पर उन्हें महाराजा की तरह जीने के आरोपों का सामना करना पड़ रहा था | बेशक वही सुविधा आजकल की सत्ता के लिए गलत नहीं है जिसके लिए उस समय उन्हें आरोप झेलने पड़े थे ।

केंद्र में प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू सरकार ने उन्हें झुकाने के लिए कैरो पर तीन जांच समिति बिठाई थी, पर सभी जांचों में वह निर्दोष और साफ़ निकले थे | मई 1964 में उन्होंने दास आयोग द्वारा चार्जशीट होने के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

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पंजाब के विभाजन में सबसे बड़ा रोड़ा बने कैरों को पद से हटाने के लिए उन्हें केंद्र में रक्षा मंत्री पद का लालच दिया गया | पर उन्होंने साफ़ इंकार कर दिया | इसके बाद उन पर तरह तरह के आरोप लगाकर जांच आयोग बैठाये गये |

मृत्यु  Partap Singh Kairon hindi biography

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आरोपों के बाद अपने पद से इस्तीफा देते Partap Singh Kairon hindi biography

1964 में, जांच आयोग की रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद, जिसने उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा उनके खिलाफ लगाये गए तमाम आरोपों से मुक्त किया था | रिपोर्ट आते ही प्रताप सिंह कैरो ने पंजाब के मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया।

6 फरवरी, 1965 को, दिल्ली-हरियाणा सीमा के पास रसोई गाँव जिला सोनीपत के समीप जी.टी. रोड पर सुच्चा सिंह ने उसकी हत्या कर दी | उस समय जब वह दिल्ली से चंडीगढ़ तक कार से यात्रा कर रहे थे। सुच्चा सिंह को बाद में फांसी दी गई थी।

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उनके पुत्र गुरिंदर का कहना है कि यह एक राजनीतिक हत्या थी। उन्होंने दावा किया कि हम दोनों भाइयों को राजनीतिक रूप से परेशान किया गया क्योंकि उन्होंने कांग्रेस के दो राष्ट्रीय नेताओं पर इस हत्या के पीछे जिम्मेदार होने का आरोप लगाया था।

दोनों भाइयों ने तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के साथ मुलाकात के लिए समय माँगा लेकिन उन्हें यह समय कभी नहीं मिला। बाद में इंदिरा गांधी ने उनकी पत्नी रामकौर को चुनावी टिकट दिया, जिन्होंने 1967 में अपनी पट्टी की परम्परागत सीट जीती थी।

1972 में उन्होंने कांग्रेस को छोड़ दिया और दोनों भाई अकाली दल में शामिल हुए। सुरिंदर सिंह 1991 में तरन-तारन संसदीय सीट जीते थे पर उन्होंने किसी भी मंत्री पद की इच्छा नहीं की ।

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गुरिंदर का कहना है कि कैरो के बाद पंजाब की राजनीति बदल गई। उनके दादा, सरदार निहाल सिंह जो एक शिक्षाविद् थे | उन्होंने ही स्वतंत्रता से पहले पट्टी में लड़कियों के पहले स्कूल की स्थापना की थी |

उनका कहना है कि उनकी विरासत गुम नहीं हुई है। गुरिंदर कहते हैं, “हम शिक्षा क्षेत्र में योगदान करते रहेंगे, हम अपने सिद्धांतों का पालन करते रहेंगे, हम कड़ी मेहनत करते रहेंगे।”

हमने पढ़ा Partap Singh Kairon hindi biography

आज कैरो का नाम केवल उनके पोते आदेश प्रताप कैरों के कारण पंजाब विधानसभा में ही सुना जाता है । गुरिंदर कहते हैं, “वह पट्टी से लगातार जीत रहे हैं क्योंकि कांग्रेस में रहने के बावजूद मेरे दिवंगत भाई सुरिंदर ने उनका समर्थन किया था।”

उनके पुत्र, हर प्रताप सिंह कैरो कहते हैं कि उनके चचेरे भाई आदैश प्रताप कैरों अनिच्छा से ही राजनीती में शामिल हुए है क्योंकि 1997 में तत्कालीन कांग्रेस के मुख्यमंत्री राजिंदर कौर भट्टल ने उन्हें पट्टी से टिकट नही दिया था।

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प्रनीत कौर व आदेश प्रताप कैरो की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल की बेटी 

इस कारण उनके परिवार का अटूट गढ़ मुसीबत में था | इसलिए आदेश प्रताप कैरों बहुत कम मार्जिन द्वारा चुनाव जीते थे |

पर्यवेक्षकों का कहना है कि कैरो के दो बेटों में उन जैसे करिश्माई नेतृत्व की कमी थी और जनता के साथ जुड़ना उनके बस की बात नहीं है | लेकिन उनके पुत्र गुरिंदर, जो वंशवाद की राजनीति को गलत बताते हैं, का तर्क है कि अब समय बदल चुका है। एक ही राजनितिक परिवार की खानदानी गुलामी कोई नहीं करना चाहता |

उन्होंने कहा, “कैरो की विरासत सिकुड़ नहीं गई है।” “यह पंजाब है जो सिकुड़ रहा है, इसकी राजनीति सिकुड़ गई है, इसकी विचारधारा सिकुड़ गई है, इसके उद्देश्य सिकुड़ गए हैं। ”

जैसा कि सेखो कहते हैं: “आज के राजनेताओं अगले चुनावों के बारे में बात करते हैं, कैरो अगली पीढ़ी के बारे में बात करते थे।”

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Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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