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जब तीर तोड़ दिए साहिबा ने – मरदा होया मिर्ज़ा की कहंदा

दोस्तों हमारा आज का विषय है Mirzya Mirza Sahiba punjabi love story पंजाब, पाकिस्तान में होने वाली सभी महान कहानियों ( हीर राँझा, शशी पुन्नू, सोहनी महीवाल और भी बहुत) में से मिर्जा साहिब की कहानी ही ऐसी है जहां पुरुष का नाम पहले आता है।

मिर्जा खरल गोत्र का पंजाबी जाट और साहिबा सियाल गोत्र से संबंधित हैं। वे बचपन में क्लास मेट्स थे। साहिबा खीवा गाँव के प्रमुख महनी खान की बेटी थीं, जो सियाल क्षेत्र अब झंग जिला पंजाब पाकिस्तान में है।

मिर्जा वांझल खान का पुत्र था | खरल जाट गोत्र का एक जमींदार, जो जारनवाला इलाके का एक शहर है। जिसे आज फैसलाबाद के नाम से भी जाना जाता है |

अब मिर्जा को अपने रिश्तेदारों के घर को खींवा गाँव में पढ़ाने के लिए भेजा जाता है, जहां वह साहिबा से मिलते हैं और वे प्यार में बंध जाते हैं।

Mirzya

Mirzya Mirza Sahiba

पर बाद में, साहिबा को अपने माता-पिता की तय की हुई जगह चंदर परिवार के ताहा खान से शादी करने के लिए कहा जाता है, तो वह करमू नामक एक ब्राह्मण के माध्यम से, दनाबाद गांव में रहने वाले मिर्जा को एक संदेश भेजती है।

मिर्जा की बहन ने उसे उस दिन साहिबा को बचाने की कोशिश न करने के लिए कहा था | क्योंकि यह उसकी शादी का दिन था और वह चाहती है कि उसका भाई वहां रहे।

उनका पूरा परिवार उन्हें चेतावनी देता है कि “सियाल” (साहिबा के भाइयों का जिक्र करते हुए) दबंग जाट हैं और उन्हें यह ख्याल छोड़ दिया जाना चाहिए, लेकिन मिर्जा इस पर ध्यान नहीं देते हैं।

Mirzya Mirza Sahiba

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साहिब के मेहंदी समारोह के दौरान मिर्जा जाट अपने बक्की (मिर्जा के घोड़े का नाम) पर चढकर आता है और साहिबा को दूर भगा ले जाता है। साहिब के भाइयों ने इसके बारे में पता लगाया और उनका पीछा करने का फैसला किया।

वैसे, मिर्जा ने साहिबा के गोद में अपना सिर रखकर पेड़ की छाया में कुछ पलों के लिए आराम करने का फैसला किया और उसे लेटे लेटे नींद आ जाती है |

Mirzya

साहिबा के सियाल गोत्री भाइयों और ताहा खान चन्दर गोत्री जाट ने उनका तेजी से पीछा करके उन्हें पकड़ लिया।

साहिबा मिर्जा के बारे में जानती थी कि वह एक बेहतरीन तीरंदाज है, जो एक लक्ष्य में चुक नहीं करेंगे | यदि मेरे अपने भाइयों को तीर मारता है, तो वह मिर्जा के हाथों निश्चित रूप से मर जाएगा।

Mirzya Mirza Sahiba

इस प्रकार मिर्जा को नींद से उठाने से पहले ही साहिबा ने सभी तीरों को तोड़ दिया ताकि वह उनका उपयोग न कर सके और आशा की कि, उसे देखकर, उसके भाई अपने विचार बदल सकते हैं और परिवार में मिर्जा का स्वागत कर सकते हैं।

उसने सोचा कि वे उनके प्यार को समझेंगे कि वे एक दूसरे के लिए बने है, लेकिन उसके भाई उसकी सोच से सहमत नहीं हुए और फिर एक लड़ाई शुरू हुई ।

यद्यपि मिर्जा अपनी पूरी शक्ति से लड़ रहा था, लेकिन वह इतनी बड़ी संख्या में लोगों को पराजित करने में असमर्थ था चूँकि साहिबा ने सभी तीर तोड़ दिए थे |

Mirzya

एक तीर उसके सीने के बीच में जा फसा और साहिबा के भाइयों ने तलवार के एक झटके से उसका कत्ल कर दिया ।

Mirzya Mirza Sahiba

साहिबा दोनों में से किसी तरफ के अपने प्रियजनों का खून नहीं बह्वाना चाहती थी और ना ही अपने प्यार को अपने भाइयों के खून से सफल नही बनाना चाहा था।

Mirzya

जब तीर टूटे हुए मिले तो Mirzya यानि Mirza Sahiba को बोलता है धोखा क्यों दिया | इस घटना को गायक हरभजन मान ने कुछ यूँ गया है :-                                                                 जब तीर तोड़ ते साहिबा नु, मरदा होया mirza की कहंदा ——–  जे पता हुंदा ते इन्जगर नु , मैं लौन्दा नाल परावा नु

साहिबा ने आत्म-हत्या के साथ यह लड़ाई समाप्त कर दी। जब मिर्जा चल बसा, उसने मिर्जा की तलवार से खुद को मार डाला।

Mirzya

मिर्जा साहिबा की ऐतिहासिक प्रेम कहानी अब आलम लोहार, कुलदीप मानक, गुरमीत बावा, हरभजन मान, नूर जहां और कई अन्य प्रसिद्ध गायकों द्वारा गाए गए लोक गीतों के रूप में पंजाबी संस्कृति का हिस्सा है।

प्रसिद्ध गायक स्वर्गीय नूर जहां का सुपर हिट गीत ‘मिर्जा‘- 1982 में बनी पाकिस्तानी फिल्म ‘मिर्जा जाट‘ में प्रसिद्ध पाकिस्तानी संगीतकार खुर्शीद अनवर गिल के संगीत में पारंपरिक पंजाबी लोकगीत है ।

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References Mirzya Mirza Sahiba

  1. Duggal, Kartar Singh (1979). Folk romances of Punjab. Marwah. p. 129.
  2. A History of Punjabi Literature, SANT SINGH SEKHON & KARTAR SINGH DUGGAL, Sahitya Akademy, 1992, 439

Mirzya Mirza Sahiba

Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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