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जाट गजट | jaat history book

दोस्तों आज हम आपको  jaat history book जाट गजट के बारे में बतायेंगे | किसी भी कौम के लिए उसके इतिहास का साहित्य कितना महत्वपूर्ण है |

यह हमे किसी से पूछने की जरूरत नही होनी चाहिए | इतिहास किसी भी जाति समाज के लिए एक दिव्य औषधि की तरह काम करता है |

इसके बारे में अनेक महापुरुषों ने समय समय पर टिप्पणी की है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक होती है |

किसी भी कौम का इतिहास उसके भविष्य का रहबर यानि गाइड होता है जिससे वह भविष्य में अपनी दिशा निर्धारित करता है |

jaat history book

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बाढ़डा जिला दादरी में कृषि अधिकारी बड़े भाई चौ रणबीर सिंह मान गाँव लाड व जितेन्द्र सांगवान भाई गाँव राशिवास को जाट गजट पुस्तक भेंट करते हुए जाट लेखक रणधीर देशवाल

वैसे तो हमारे जाट समाज ने इतिहास लिखने की बजाये इतिहास रचने पर ज्यादा ध्यान दिया जो हमारी बहुत बड़ी गलती कही जा सकती है फिर भी कुछ सज्जन पुरुषों ने हमारे समाज पर कुछ पुस्तकें लिखकर कौम के प्रति अपना ऋण चुकाया है |

आदि महान आत्माओं ने बहुत कठिन शोध करके कुछ अनमोल पुस्तके हमारे जाट समाज को समर्पित करके अपना जन्म सफल किया है |

इन महान आत्माओं ने हमारी कौम पर वो उपकार किया है जिसे हम किसी तरह भी चूका नही सकते क्योंकि इनके लिखे इतिहास को पढकर हमे अपने पूर्वजों के महान कारनामों का पता चलता है कि उन्होंने किस तरह अपने पौरुष से भारतवर्ष को अमूल्य योगदान दिया है |

हम पढ़ रहे है  जाट गजट  jaat history book  जाट इतिहास की पुस्तक

आज मैं आपको कुछ jaat history book दिखाऊंगा जिन्हें हर जाट के घर में होना चाहिए ताकि आने वाली नश्लों को अपने समाज की परम्परा, वीरता तथा योगदानों का ज्ञान हो सके |

उन्हें पता चले हम उन पिताओं की सन्तान है जिन्होंने युद्धकाल में तो भारत के लिए युद्ध में खून बहाकर इसकी रक्षा करी तथा साथ साथ शांति के समय में हल चलाकर इस देश की जनता का पेट भी भरा

jaat history book

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चीका में आढती अजायब शिडा जी के घर जाट गजट
  • आप भाइयों को भीjaat history book जाट गजट चाहिए तो
  • मुझे काल कर सकते है मेरा नम्बर 8816052038 है |
  • दोस्तों सर चौधरी छोटूराम ने एक बार कहा था कि
  • जो कौम अपना इतिहास भूल जाती है
  • वो कौम अक्सर मिट जाया करती है
  • और उनकी यह बात सौलह आने सत्य है |

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जाट हिस्ट्री बुक - jat history book

आगरा में बड़े भाई गजेन्द्र चौधरी जी के निवास पर उन्हें जाट गजट पुस्तक भेंट करते छोटे भाई आकाश देशवाल गाँव जसोर खेडी, नीरज दहिया गाँव रोहणा और कैलाश चौधरी जोधपुर से |

त्रिमासिक पत्रिका  जाट गजट  jaat history book  जाट इतिहास की पुस्तक

  • जाट गजट अख़बार चौधरी छोटूराम ने सन 1916 में शुरू किया था
  • जिसमे वह जाटों किसानों के लिए लेख लिखा करते थे
  • पर उनकी मृत्यु के बाद यह अख़बार लाहौर में ही रह गया
  • जिसके बाद भारत में इसके पढने वाले भी नहीं बचे |
  • 23 मार्च 2017 में मैंने जाट गजट नाम से रोहतक से
  •  जाट गजट त्रिमासिक पत्रिका निकालनी शुरू करी
  • जिसे सम्पूर्ण उत्तर भारत के जाटों ने बहुत सराहा |
  • jaat history book

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बाड़मेर जिले में भाई लक्ष्मण जी जाट वहां के जाट समाज के प्रबुद्ध व्यक्तियों को जाट गजट पत्रिका भेंट करते हुए | ध्यान रहे उन्होंने अपने स्वयं के खर्च से सैकड़ो जाटों को जाट गजट पुस्तक निशुल्क वितरित करी थी |

जाट गजट | jaat history book | जाट इतिहास की अनमोल पुस्तक

मैं बाल्यकाल से जनश्रुतियों के आधार पर दिल्ली के आस-पास के गाँव में कभी कभी पूर्वजों से सुनता आया होण कि दिल्ली नगर राजा दिल्लू के नाम से सुनते आये है |

दिल्ली राजा दिल्लू की थी |दिल्ली के पश्चिम में बसे श्योकंद गोत्र के गाँव मंगोलपुर कलां के चौधरी राजसिंह इतिहास की तथा सामान्य ज्ञान की बातों में बड़ी रूचि रखते है |

एक दिन मैंने उनसे दिल्ली के नामकरण के बारे में पूछ लिया तो उन्होंने भी यही बताया कि राजा दिल्लू की दिल्ली सुनते आये है |

दिल्ली गाइड नामक एक छोटी सी पुस्तक भी मैंने पढ़ी है, इसमें भी दिल्ली राजा दिल्लू की लिखी हुई है जबकि राजा दिल्लू का गोत्र मोर लिखा गया है |

परन्तु सर्वखाप पंचायत के महामंत्री चौधरी कबूल सिंह बाल्यान के खोज लेख अनुसार ये बल वंशी थे |

एक एनी जाट लेखक कमान्डेंट हवा सिंह सांगवान अपने लेख में इन्हें ढिल्लों गोत्री लिखते है जबकि मेरा मानना है ये मयूर (मोर) गोत्र के जाट थे |

सम्भवतया यह मोर राजा ही थे जो दिल्ली के पश्चिमी हरियाणा के रोहतक और करनाल मंडल में mor गोत्र के बरोदा, बुटाना और मोर माजरा सहित अनेक गाँव मोर गोत्री है |

यौधेय गण झण्डे और रथ पर भी मयूर का निशान रहता था, जिससे इन्हें मयूरक भी कहते है | इसलिए इतिहास में आया है कि धर्मक्षेत्रे कुरुक्षेत्रे और देश मत्त मयूर के |

जाट गजट | jaat history book | जाट इतिहास की अनमोल पुस्तक

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धार उज्जैन के राजा महेंद्रदित्य गन्धर्व सेन के पुत्र भृत हरी और विक्रमादित्य दो पुत्र थे |

विक्रमादित्य ने 93 साल दिल्ली पर राज्य किया और यह प्रस्तुत लेख्ननायक दिल्लू राजा दिल्ली का राज्यपाल रहा था |

इनको दिल्लू,दल राजा, दलराम और दिलेराज़ भी कहते थे |आर्य शास्त्रार्थ महारथी पं लेखराम की खोज के अनुसार यह बाल ब्रह्मचारी राजा 250 वर्ष तक जिया था |

इसने मिश्र, अरब आदि देशों की प्रार्थना पर वहां का राज्य शासन भी चलाया था, और तत्कालीन रोम के राजा अग्स्तस्य से इनके पत्र व्यवहार आज तक सुरक्षित रोम में मिलते है |

600 वर्ष तक इनका चलाया गया विक्रमी सम्वत मालवे के राजा होने के कारण माली सम्वत भी कहलाया |

यह यदु वंश की शाखा पंवार जाट गोत्र से था, इसका न्याय, शासन, वीरता और प्रजा-पालन प्रसिद्ध है |

राजा दिल्लू की वीरता, न्याय, प्रजापालन और सुशासन के कारण ही इन्द्रप्रस्थ के बाद से इसका नाम आज तक दिल्ली ही चला आ रहा है जो राजा दिल्लू मोर के अमर यश का प्रतीक है |

गजट पुस्तक लेने के लिए मुझे फोन करे या

यही कमेन्ट करके मुझसे सम्पर्क कर सकते है |

आपका भाई चौधरी रणधीर देशवाल जिला रोहतक

जय जाट जय दादा छोटूराम

जाट गोत्र लिस्ट

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Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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