चाहर जाट वंश का इतिहास – छिल्लर छिकारा जाट वंश

दोस्तों आज हम आपको चाहर – chahar jat gotra के विषय में जानकारी देंगे

chahar jat gotra जाटवंश उस चोल जाटवंश की शाखा है जिसका शासन बोद्धकाल में दक्षिणी भारत में था और इसवी काल में इनका राज्य उत्तर दिशा में था।

आठवीं शताब्दी में दक्षिण भारत में चोलवंशज जाटों का राज्य था जिसमें तमिलनाडु और मैसूर के अधिकांश प्रदेश शामिल थे।

14वीं शताब्दी में इनका राज्य मलिक काफूर ने जीत लिया था।

13वीं शताब्दी में गुलाम वंश के शासनकाल में जांगल प्रदेश (बीकानेर) में सीधमुख नामक स्थान पर जाट राजा मालदेव चाहर का शासन था।

उसकी पुत्री राजकुमारी सीमादेवी ने मुसलमान सेनापति से अपना धर्म बचाने के लिए बड़ी वीरता से युद्ध किया और उसके हाथ न आई तथा अपने परिवार सहित बचकर निकल गई।

चाहर लोगों में रामकी चाहर बड़ा वीर योद्धा हुआ। उसने सोगरिया गढ़ी के राजा खेमकरण के साथ मिलकर मुगल सेनाओं पर आक्रमण करके उन्हें बड़ा तंग किया था।

चाहर जाटों ने महाराजा सूरजमल, की, मुगलों के विरुद्ध युद्धों में बड़ी सहायता की थी। आगरा कमिश्नरी में चाहर जाटों के 242 गांव हैं जो चाहरवाटी के नाम से सब एक ही क्षेत्र में बसे हुए हैं।

सिनसिनवाल, खूंटेल तथा सोगरवार जाटों की भांति वहां पर chahar jat gotra  भी फौजदार कहलाते हैं।

फौजदार का खिताब बादशाहों की ओर से उन लोगों को दिया जाता था जो कि किसी प्रदेश के किसी भाग की रक्षा का भार अपने ऊपर ले लेते थे।

तरावड़ी (आगरा कमिश्नरी) के आस-पास 150 गांव चाहर जाटों के हैं जिनको फौजदार कहते हैं।

हम पढ़ रहे है chahar jat gotra 

जिला मुरादाबाद में chahar jat gotra  की बड़ी संख्या है। इस जिले के जटपुरा गांव के चाहर अपने पूर्ववर्ती रतनाथ जोगा का नाम बड़े आदर्शपूर्वक लेते हैं जो कि फिरोजपुर का निवासी था। उसने इधर आकर सम्भल के समीप सौंधन नामक किले को जीतकर वहां ही रहने लग गया था।

यह आठवीं शताब्दी की घटना है। किल्ली गांव के पास जोगा पीर की समाधि पर फाल्गुन बदी चतुर्थी के दिन एक मेला भरता है।

इस दिन वहां कई हजार जाट एकत्र होते हैं, विशेषकर चाहर जाट बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। जिला बुलन्दशहर में चित्सौना गांव में चाहर हैं।

जिला मुजफ्फरनगर में चाहरों के कई गांव बहादुरपुर, अफीमपुर, चोरवाला, सेनी, सयदपुर आदि हैं। मेरठ में सादपुर गांव चाहरों का है।

बिजनौर जिले में कई गांव चाहर जाटों के हैं – रायपुर, भगीन, मारगपुर, भूना की गांवड़ी आदि। पहाड़ी धीरज देहली में हरफूलसिंह चाहर के नाम पर हरफूल बस्ती आबाद है।

chahar jat gotra 

पंजाब के अमृतसर, जालन्धर, फिरोजपुर, नाभा, कपूरथला, पटियाला, मालेरकोटला में chahar jat gotra  की बड़ी संख्या है

जो अधिकतर सिक्ख धर्म के अनुयायी हैं। पाकिस्तान में गुजरांवाला में चाहर जाट हैं जो कि मुसलमान हैं।

महाराजा रणजीतसिंह से पहले chahar jat gotra के कई छोटे-छोटे राज्य एवं जागीरें पंजाब में थीं जो महाराजा रणजीतसिंह ने सिक्ख राज्य में मिला लीं। राजस्थान में चाहर जाटों के गांव सिखाली, सियाऊ, सूऊ, तोपनी, लाड़नों के पास है।

हरयाणा के हिसार में माढी, खढकर, पीलीजेहां गांव चाहर जाटों के हैं। जिला रोहतक तहसील झज्जर में माछरोली आधा (यह आधा कीन्हा जाटों का है)

सिलाना,  सिलानी, कन्होरी (1/3) गांव चाहर गोत्रों के हैं। यहां पर चाहर खाप में 17 गांव हैं, जिनका प्रधान गांव सिलानी है।

जिला दादरी में हड़ोडा कलां जो अटेला और बाढ़डा के बीच में स्थित है यहा दादा चाचू धाम प्रसिद्ध है |

दादा चाचू मुगल काल में ऐसे महापुरुष हुए जिन्होंने जन कल्याण हेतु अनेक कुएं बावडियों की स्थापना की है |

दिल्ली स्थिति धौला कुआं उन्ही के करकमलों से बना था | उस समय दिल्ली से लेकर हड़ोदा कलां तक जहाँ जहाँ वह ठहरे, उन्होंने कुएं व तालाब का निर्माण करवाते आये थे | हर साल हड़ोदा कलां में उनके पूण्यतिथि पर वार्षिक मेले का आयोजन होता है |

इस पीर की चाहर परम्परा ने ही सिंहपुर, लखौरी, भारथल, मन्नीखेड़ा, मुण्डाखेड़ी, फूलपुर, रमपुरा, चिदावली, गहलुवा, गुलालपुर, सेण्डा, मुकन्दपुर, नारायणा, काजीखेड़ा, पौटा नामक गांव बसाए।

छिल्लर छिकारा जाट गोत्र  chahar jat gotra 

इतिहासकारों ने यह सिद्ध किया है के छीलर-छिकारा चीमा जाटों के वंशज हैं तथा उसी की शाखा हैं। पंजाब में चीमा एवं छिकारे जाट एक ही स्थान पर बसे हुए हैं।

चीमा चन्द्रवंशी जाट गोत्र है। यह गोत्र प्राचीनकाल से है। चीमा जाट भारत से चीन देश में गए और वहां बस्तियां बसाईं तथा राज्य किया।

छीलर व छिकारा एक ही नाम है, केवल भाषा-भेद से दो नाम बोले जाने लगे। छीलर व छिकारा एक ही रक्त के हैं,

इसीलिए इनके आमने-सामने तथा भानजा-भानजी के आपस में रिश्ते-नाते नहीं होते हैं। यह इन दोनों का रक्त भाई का ठोस प्रमाण है।

  • जिला रोहतक झज्जर में छिकारा जाटों के गांव – 1. कानौंदा 2. मुकन्दपुर 3. खेरपुर 4. लडरावण 5. खेड़ी आसरा।
  • दिल्ली प्रान्त में – जौंती, टटेसर, निजामपुर।
  • chahar jat gotra 
  • जिला मेरठ में – 1. खानपुर 2. महोड़ा 3. महपा 4. नानू।
  • जिला सोनीपत में करेवड़ी गांव छिकारा जाटों का है।
  • छीलर जाटों के गांव जिला रोहतक में बामनौली और बराही हैं।
  • जिला सोनीपत में बड़ा गांव जूआं छिकारा जाटों का है।
  • chahar jat gotra 
  • अमरोहा के पास कीलबकरी नामक रियासत छिकारों की थी।
  • कमालपुर और बस्तापुर छिकारा जाटों के बड़े गांव हैं।
  • जिला बिजनौर में 1. बाहुपुरा 2. ऊमरी 3. पामार 4. गजरोला गांव छिकारा जाटों के हैं।
  • जिला मुरादाबाद व बिजनौर में छिकारा जाटों के कई गांव हैं।

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Randhir Deswal

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