chachu dham Haroda Kalan Dadri | चाचू धाम हड़ोदा कलां

chachu dham Haroda Kalan Dadri चाचू धाम हड़ोदा कलां जिला दादरी में स्थित है | यह दादरी लोहारू रोड पर अटेला से आगे और बाढ़डा से पहले पड़ता है| हड़ोदा कलां CHAHARश्योराण गोत्री जाटों का गाँव है|

दादा चाचू मुगलकालीन ऐसे महापुरुष हुए है जिन्होंने जीव मात्र के कल्याण के लिए कुएं व तालाब बनाने में अपना पूरा जीवन लगा दिया था chachu dham Haroda Kalan Dadri प्रति वर्ष तीज वाले दिन उनकी स्मृति में मेले का आयोजन किया जाता है |

आइये जानते है इसके कुछ छुपे पहलु:-

मेरे एक अजीज मित्र vikram chahar इसी गाँव से ही है | वो अत्यंत सद्गुणी व परोपकारी व्यक्तित्व के धनी है | उस रोज मुझे लोहारू जाना था तो मुझे याद आया कि वह भी दादरी के आसपास के ही गाँव के रहने वाले है |

मैंने उन्हें तुरंत फोन लगाया और उनसे इस विषय में पुछा तो उन्होंने बताया कि दादरी लोहारू वाले मुख्य रोड पर ही उनका गाँव है हडोदा कलां  | अत: मुझे भी ख़ुशी हुई कि एक पन्थ दो काज |

मित्र से मिलना भी हो जायेगा और फिर कुछ आराम करके मैं अपने गंतव्य लोहारू के लिए भी निकल जाऊंगा | मुझे इतना तो पता था कि वो अटेला बैंक में सर्विस करते है पर मैं पहले कभी उस तरफ गया नहीं था |

अत: मैंने अटेला जाकर उनको फोन किया तो पता चला आज बैंक का अवकाश है और उनका गाँव लगभग 6-7 किलो मीटर दूर है | वो बाइक से मुझे लेने के लिए चल पड़े |

chachu dham Haroda Kalan Dadri 

अटेला दादरी जिले का एक कस्बा है बहुत बड़ा तो नहीं पर काफी अच्छा है | मैं वही उनकी प्रतीक्षा करने लगा | लगभग 15 मिनट बाद वह अटेला पहुंच गये | दोनों दोस्तों ने गले मिलकर एक दुसरे का अभिवादन किया |

वो मुझे अपने साथ अपने गाँव ले जाने लगे और हम बाइक से उनके गाँव की तरफ चल दिए | गाँव में प्रवेश करते ही मुझे एक सिग्न बोर्ड दिखाई दिया |

कहते है तेली को तेल की, मुसद्दी को खल की और मेरे जैसे लेखकों को ऐतिहासिक घटनाओं की तलब रहती है तो मैंने vikram जी को बाइक रोकने के लिए कहा |

chachu dham Haroda Kalan Dadri 

इस गाँव में प्रवेश करते ही मुझे अजीब सा सुकून महसूस हुआ जैसे कोई शक्ति मुझे अपनी तरफ खिंच रही थी | मैंने vikram जी से तो कुछ नहीं कहा पर अंदर ही अंदर भाव विभोर होता जा रहा था |

मैंने उनसे पूछा यह chachu dham  का क्या माजरा है ? तो उन्होंने बाइक उसी ओर मोड़ दी लगभग 5 मिनट बाद हम चाचू धाम के पास पहुंच गये थे |

chachu dham Haroda Kalan Dadri 

vikram जी ने मुझे बताया कि वो अक्सर यहाँ आते रहते है और दादा चाचू की इस इलाके में तगड़ी मान्यता है | मैंने उनसे सवाल किया कि क्या वो एक चमत्कारिक संत थे, और तन्त्र मन्त्र करते थे ?

तो उन्होंने मुझे बताया तन्त्र मन्त्र तो नही जानते थे पर वो Sheoran गोत्र के एक साधारण जाट किसान परिवार से थे | उन्होंने अपना पूरा जीवन जीव उत्थान में लगा दिया था |

कहते है उनकी शादी Mahala गोत्र के जाट परिवार में हुई थी | शादी के बाद भी उनका मन गृहस्थ में नहीं लगता था | वो अक्सर गुमसुम रहते थे | उनकी पत्नी उन्हें हल जोतने के लिए कहती तो बोलते ऊपर वाला सब भली करेगा |

chachu dham Haroda Kalan Dadri 

chachu dham Haroda Kalan Dadri  में जाट समाज के प्रमुख व्यक्तियों को अपनी लिखी हुई जाट गजट पत्रिका देते जाट लेखक चौधरी रणधीर देशवाल

हम पढ़ रहे है chachu dham Haroda Kalan Dadri 

एक दिन जब वो खेत में अपने बैलों को पेड़ की छाया में बाँधकर उनके पास बैठे थे तो उनकी पत्नी खाना लेकर आई | उन्होंने दादा चाचू से कहा आप तो आराम से बैठे हो, ऐसे कैसे काम चलेगा |

तो उनके मुख से यह शब्द निकले ऊपर वाला सब भली करेगा और जैसे ही उन्होंने हल चलाया तो उनके हल की फाली किसी चीज में फस गयी | वो निकालने लगे तो किसी बर्तन के होने की सम्भवना पता चली |

जैसे ही उन्होंने मिट्टी हटाई तो सोने के जेवरो से भरा बर्तन वहां निकला | अब उन्होंने पत्नी को आवाज़ लगाई जो पेड़ के नीचे बैठी थी | दादी ने देखा तो हैरान रह गयी |

chachu dham Haroda Kalan Dadri 

अब दादा चाचू कहने लगे, देख लिया मैंने बोला था ईश्वर सब भली करेगा और दोनों उस बर्तन को उठाकर घर वापस आ गये | सरल स्वभाव के होने के कारण उन्होंने कुछ भी चोरी से करने की नहीं सोची |

अगर मेरे जैसा कोई बेईमान होता तो रात के अँधेरे में यह जेवरात घर लाता ताकि किसी को पता न चले | पर वो दोनों देवता इन्सान थे | अत: इस घटना की खबर आस पडोस में लगी | जिससे यह चर्चा का विषय बन गया |

chachu dham Haroda Kalan Dadri 

chachu dham Haroda Kalan Dadri 

बात फूटती हुई दिल्ली के तत्कालीन मुगल बादशाह मुहम्मद शाह रंगीला तक पहुंची | उन्होंने तुरंत नवाब लोहारू को उन्हें दिल्ली पेश करने का आदेश दिया | तेज रफ्तार वाले घोड़े पर दादा चाचू और उस धन को लेकर सैनिक दिल्ली पहुंचे |

बादशाह ने जेवरात देखकर हैरानी से पूछा, ए किसान, तेरे पास इतना धन कहाँ से आया | क्या इसके अलावा भी और धन है तेरे पास ?

दादा चाचू ने सरलता से जवाब दिया , ए बादशाह मेरे पास तो और धन नहीं है पर तेरे किले में भी धन छुपा है | बादशाह को विश्वास नहीं हुआ और सोचा हम इतने सालों से यहाँ रह रहे है हमे कभी किसी धन की जानकारी नहीं मिली तो ये साधारण किसान क्या बतायेगा |

उन्होंने उससे कहा मुझे धन की जानकारी दे नहीं तो कत्ल कर दिए जाओगे | उसने उन्हें सोचने का समय देते हुए दो सैनिको के साथ बाहर भेज दिया|

chachu dham Haroda Kalan Dadri 
chachu dham Haroda Kalan Dadri 

दादा chachu dham Haroda Kalan Dadri  की समाधि दिखाते भाई vikram chahar

अब यमुना किनारे बैठकर दादा चाचू एक लकड़ी से रेत कुरेदने लगे और सोचने लगे क्या किया जाये ये बादशाह तो धन के लालच में अँधा हो चूका है | जहाँ वह लकड़ी रेत में घुमा रहे थे वहां भी कुछ मिला, थोडा रेत हटाया तो सोना निकला |

अब उन्होंने सोचा अब तक सिर्फ एक बर्तन सोने का झगड़ा था यहाँ तो और भी निकल आया | बादशाह को जब पता चला तो वो भागकर वही आ गये और धन को देखकर सोचने लगे यह कोई अल्लाह का बन्दा है |

वह उन्हें महल ले आये और महल आकर उन्होंने एक दिवार को छूकर कहा, यहाँ भी धन है राजा ने उस दीवार को तुडवाया तो वहां भी सोना निकला |

chachu dham Haroda Kalan Dadri 

chachu dham Haroda Kalan Dadri  में वर्तमान साधू माइचन्द नाथ के साथ जाट लेखक चौधरी रणधीर देशवाल

अब बादशाह ने हाथ जोड़ लिए और उन्हें उनका बर्तन वाला धन देकर वापस दादरी लौटने की व्यवस्था कर दी | दादा चाचू ने लाल किले से बाहर आकर रास्ते में देखा तो लोग पानी के लिए तरस रहे थे |

chachu dham Haroda Kalan Dadri 

उन्होंने अपने बर्तन वाले धन से वहां कुआँ बनवाया | आजकल उस कुए को धौला कुआँ बोला जाता है जो स्थान दिल्ली में गुड़गांव मार्ग पर आज भी मौजूद है | दिल्ली से दादरी रास्ते में जहाँ जहाँ रुके उन्होंने कुए, बावड़ी और तालाब बनाते हुए अपना सफर पूरा किया |

chachu dham Haroda Kalan Dadri  आते आते उनका सांसारिक विषयों से मन भर चूका था | उन्होंने अपनी पत्नी से कहा मैं अब एकांकी जीवन जीना चाहता हूँ और घर बार छोडकर गाँव से बाहर एक जंगल में आसन लगा लिया |

यहाँ उन्होंने जीवों को पानी की किल्लत से जूझते देखा तो खुद एक तालाब खोदना शुरू किया| आज भी वह तालाब अपने उसी स्वरूप में मौजूद है |

जय दादा chachu dham Haroda Kalan Dadri 

Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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