भगत सिंह – ऐसा क्रांतिकारी जो हँसते हंसते फांसी चढ़ गया

Bhagat Singh hindi Biography

व्यक्तियों को कुचलकर विचारों को नहीं मारा जा सकता । महान से महान साम्राज्य ढह गए, लेकिन विचार जीवित रहते है – भगत सिंह

यह बोल 8 अप्रैल, 1929 को केंद्रीय विधानसभा में भगत सिंह द्वारा फेंके गए पत्रों पर लिखा था । तब से आज तक क्रांतिकारियों द्वारा इसे बार बार बोला जाता है।

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महान क्रांतिकारी देश के लिए शहीद हो गया जब वह केवल 24 साल का था, लेकिन उनके प्रेरक कारनामों ने स्वतंत्रता की इच्छा को कई गुना बढ़ा दिया ।

भगत सिंह संधू जाट, का जन्म सितंबर 1907 में ब्रिटिश भारत (अब पाकिस्तान में) पंजाब प्रांत के लायलपुर (अब फैसलाबाद) जिले में बंगा गांव, जारनवाला तहसील में एक सिख जाट परिवार में हुआ था।

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यहां Bhagat Singh hindi Biography के बारे में कुछ सूचीबद्ध तथ्य हैं जिन्हें आपको जानना चाहिए

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को हुआ था

23 मार्च, 1931 तय समय से कुछ घंटे पहले उन्हें फांसी दी गई ।

उनका परिवार पहले ही देश में ब्रिटिश शासन के खिलाफ क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल किया था

बचपन में ही भगत सिंह अक्सर अंग्रेजों से लड़ने के लिए खेतों में बंदूक उगाने के बारे में बात करते थे

जलियांवाला बाग में अंग्रेजो ने हजारों निहत्थे लोगों को मार डाला गया था

हत्याकांड के कुछ घंटे बाद स्कूल से छुट्टी होते ही ट्रेन से वही पहुंचे तब भगत सिंह सिर्फ 12 वर्ष के थे| Bhagat Singh hindi Biography

जब भगत 14 साल के थे, उन्होंने गुरुद्वारा नानकाना साहिब में बड़ी संख्या में निहत्थे लोगों की हत्या के विरोध में भाग लिया

वह कॉलेज के समय में एक महान अभिनेता थे और सम्राट चंद्रगुप्त और भारत दुर्दशा जैसे कई नाटकों में अभिनय किया।

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान, ब्रिटिशों के खिलाफ विद्रोह को प्रोत्साहित करने के लिए भी उन्होंने अपने अभिनय का इस्तेमाल किया था 

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उन्होंने सड़कों पर जादू की लालटेन नाम से शो किया था, जिसमें राम प्रसाद बिस्मिल जैसे क्रांतिकारियों का जिक्र था जो ककोरी षडयंत्र के कारण शहीद हो गये थे |

1929 में, उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के लिए बड़ा प्रचार करने के इरादे से एक नाटकीय कार्य का प्रस्ताव दिया Bhagat Singh hindi Biography

भगत सिंह ने गांधी के अहिंसा के दर्शन को कभी नहीं पसंद किया।   
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1922 चोरा चौरी घटना के बाद, भगत सिंह युवा क्रांतिकारी आंदोलन में शामिल हुए और भारत में ब्रिटिश सरकार के खिलाफ हिंसक विरोध के अधिवक्ता बने।

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भगतसिंह विवाह से बचने के लिए कानपुर भाग गए और एक पत्र छोड़ गये


उसपे लिखा था “मेरा जीवन देश की आजादी के लिए समर्पित है । इसलिए कोई सुख या संसारिक इच्छा अब मुझे लुभा सकती है । “

जब ब्रिटिश पुलिस को युवाओं पर भगतसिंह के बढ़ते असर का पता चला तो उन्हें बम विस्फोट में शामिल होने के झूठे आरोप में गिरफ्तार किया गया

गांधी ने असहयोग आंदोलन रद्द कर दिया और बाद में हिंदू-मुस्लिम दंगा देखने के बाद हिन्दू धर्म को महत्व देना शुरू कर दिया। Bhagat Singh hindi Biography

उन्होंने यह नहीं समझा कि शुरूआत में ब्रिटिशों के खिलाफ हिन्दू मुस्लिम दोनों ने एकजुट संघर्ष किया अब धार्मिक मतभेदों की वजह से एक दूसरे से अलग हो रहे थे ।

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इस बिंदु पर, भगत सिंह ने अपने धार्मिक विश्वासों को छोड़ दिया, क्योंकि उनका मानना था कि धर्म ने ही आजादी के क्रांतिकारी संघर्ष में बाधा डाली है और बाकूनिन, लेनिन, ट्रॉट्स्की सभी नास्तिक क्रांतिकारियों के कामों का अध्ययन करना शुरू कर दिया। भगत सिंह ने 1930 में लाहौर सेंट्रल जेल में ‘ मैं एक नास्तिक क्यों’ नामक एक निबंध भी लिखा |

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हम पढ़ रहे है Bhagat Singh hindi Biography

भगत सिंह एक महान लेखक थे। उन्होंने अमृतसर से प्रकाशित उर्दू और पंजाबी अख़बारों के लिए लिखा और संपादित किया,

साथ ही नौजवान भारत सभा द्वारा प्रकाशित कम कीमत वाली पुस्तिकाओं में योगदान दिया जिसने अंग्रेजों को उकसाया।

1923 में, अपने महाविद्यालय के दौरान सिंह ने पंजाब हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा पंजाब की समस्याओं पर एक निबंध स्पर्धा जीती थी।

उन्होंने वीर अर्जुन अखबार के लिए और दिल्ली में प्रकाशित कीर्ति किशन पार्टी के पत्रिका कीर्ति के लिए संक्षेप में लिखा ।

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मई से सितंबर 1928 तक, सिंह ने कीर्ति में अराजकता पर एक लेख प्रकाशित किया।

उन्होंने अक्सर अपने लेखों को प्रकाशित करने के लिए बलवंत, रणजीत और विद्रोही जैसे छद्म नामों का इस्तेमाल किया

8 अप्रैल, 1929 उन्होंने बट्टुकेश्वर दत्त के साथ मिलकर दो बम केन्द्रीय विधानसभा कक्ष में फेंक दिए ।

बम कम बारूद के विस्फोटकों से बनाये गये थे और इन्हें किसी को मारने के इरादे से नहीं बनाया गया था

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जेल में रहने के दौरान, भगत सिंह ने “राजनीतिक कैदी” शब्द का उच्चारण किया।

उन्होंने मांग की कि जेल में उन्हें व उसके दोस्तों को बुनियादी सुविधाएं दी जाए | जेल में किसी कैदी को भी जानवरों की तरह नहीं रखा जा सकता |

सिंह को 23 मार्च, 1931 को आधिकारिक समय से एक घंटे पहले फांसी दी गई । Bhagat Singh hindi Biography

उनकी लाशों को अनाथो की तरह तेल छिड़ककर जला दिया गया जबकि उनकी अस्थियों को ब्यास नदी में फेंक दिया गया था| पर क्या ब्रिटिश साम्राज्य के मिटाने से वो मिटे ?

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नहीं बल्कि ऐसे होने के बाद वो पुरे राष्ट्र के दिलों में आग बनकर भडक उठे |

इसी आग ने सिर्फ 16 साल बाद भारत से ब्रिटिश हुकुमत को फूंक डाला |

वरना चरखे से तो 16 सौ साल बाद भी हम आज़ाद न हो पाते |

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Randhir Deswal

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