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चौधरी बंसी लाल – फिर से आना मेरे हरियाणा की धरती पर

चौधरी बंसी लाल (1927 – 2006) एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी, वरिष्ठ कांग्रेस नेता, पूर्व मुख्यमंत्री हरियाणा और आधुनिक हरियाणा के असली निर्माता थे। विकासपुरुष चौधरी बंसी लाल का जन्म 26 अगस्त, 1927 को हरियाणा के भिवानी जिले के लेघा जाटों के चौधरी मोहर सिंह के परिवार के गोलागढ़ गांव में हुआ था।

शिक्षा
चौधरी बंसी लाल ने लॉ कॉलेज, जालंधर ( पंजाब विश्वविद्यालय) से वकालत की पढाई पूरी की ।

चौधरी बंसी लाल

जीवन परिचय चौधरी बंसी लाल

चौधरी बंसी लाल लेघा (26 अगस्त 1 9 27 – 28 मार्च 2006) एक भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ता थे, वरिष्ठ कांग्रेस नेता, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री थे | इन्हें ही आधुनिक हरियाणा के वास्तविक निर्माता माना जाता है ।

लोहपुरुष चौधरी बंसी लाल पहली बार 1 9 67 में हरियाणा विधानसभा में विधायक बनने से लेकर सात बार इस पद के लिए चुने गए। उन्होंने हरियाणा के मुख्यमंत्री के रूप में तीन अलग-अलग कार्यकाल में जनता की सेवा की |

पहली बार 1968-75 में उसके बाद 1985-87 और अंतिम बार 1996-99 तक हरियाणा के मुख्य मंत्री के तौर पर उन्होंने अपना बेहतरीन योगदान दिया |

हालाँकि 1968 से 1972 के कार्यकाल के बाद हुए चुनाव में उन्होंने बहुमत से वापसी की और 1972 में दुबारा मुख्यमंत्री बने पर 1975 में उन्हें केंद्र सरकार केबिनेट में रक्षा मंत्री बनाया गया जिसके कारण उनका यह कार्यकाल सिर्फ 3 साल का था |

चौधरी बंसी लाल

चौधरी बंसी लाल

1975 – 1 977 के आपातकालीन युग के दौरान चौधरी बंसी लाल को पूर्व प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी और उनके पुत्र संजय गांधी के करीबी विश्वासपात्र माना जाता था।

उन्होंने दिसंबर 1975 से मार्च 1977 तक रक्षा मंत्री के रूप में सेवा की और 1975 में केंद्र सरकार में पोर्टफोलियो के बिना ही एक मंत्री के तौर पर कार्य किया। उन्होंने रेलवे और परिवहन विभागों का भी नेतृत्व किया ।

उनके रेल मंत्रिकाल में रेलवे ने नई ऊँचाइयों को छुआ था | चौधरी बंसी लाल के नेतृत्व में ही हरियाणा में अंतिम बार कोई नई रेल आई थी | उसके बाद सिर्फ भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के कार्यकाल में ही रोहतक रेवाड़ी और जींद सोनीपत के रूप में दो नई रेल लाइन बिछाई गयी थी |

चौधरी बंसी लाल एक मॉडल प्रशासक के रूप में पुरे देश में चर्चित रहे है | अनेक राज्यों के मुख्यमंत्री उनके अनुशासन के उदाहरण दिया करते थे | उन्होंने प्रदेश की 100% नौकरशाही को काम पर लगा दिया था |

राजनीतिक कैरियर चौधरी बंसी लाल

चौधरी बंसी लाल

  • 1943 से 1944 तक वो लोहारू रियासत प्रजा मंडल के सचिव रहे ।
  • 1957 से 1958 तक भिवानी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रहे ।
  • वह 1959 से 1962 तक जिला कांग्रेस कमेटी, हिसार का अध्यक्ष रहे
    बाद में कांग्रेस कार्य समिति और कांग्रेस संसदीय बोर्ड के सदस्य बने।
    वह 1958 और 1962 के बीच पंजाब प्रदेश कांग्रेस समिति सदस्य थे।
  • वह दिसंबर 1975 से मार्च 1977 तक भारत के रक्षा मंत्री रहे।
    संसद समिति और सार्वजनिक उपक्रम समिति, अध्यक्ष 1980-82
    1982-84 में Estimates Committee के अध्यक्ष भी रहे ।
  • 31 दिसंबर 1984 को रेलमंत्री और बाद में परिवहन मंत्री बने ।
    1960 से 1966 और 1976 से 1980 तक राज्यसभा सदस्य थे।
    1980 से 1984, 1985 से 1986,1989 से 1991 तक लोकसभा सदस्य ।
  • उन्होंने 1996 में कांग्रेस छोड़ने के बाद, हरियाणा विकास पार्टी की स्थापना की
    शराबबंदी के अभियान ने उसी वर्ष विधानसभा चुनाव में उन्हें सत्ता में ले लिया।

हम पढ़ रहे है चौधरी बंसी लाल

"चौधरी बंसी लाल

  •  चौधरी बंसी लाल 1968, 1972, 1986, 1996 में हरियाणा के मुख्यमंत्री बने ।
  • वह भगवत दयाल शर्मा और राव बिरेंद्र सिंह के बाद हरियाणा के तीसरे मुख्यमंत्री थे।
  • 31 मई 1968 को पहली बार हरियाणा के मुख्यमंत्री बने और 13 मार्च 1972 तक कार्यालय में बने रहे ।
  • 14 मार्च 1972 को उन्होंने दूसरी बार शीर्ष पद पर कब्जा कर लिया और 29 नवंबर 1975 तक कार्यालय में रहा।
  • 5 जून 1986 से 19 जून 1987 और 11 मई 1996 से 23 जुलाई 1999 तक तीसरे और चौथे बार उन्हें मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था ।
  • बंसी लाल विधानसभा में सात बार चुने गए, पहली बार 1967 में ।
  • 1966 में हरियाणा के गठन के बाद, यह पहली बार हुआ था जब राज्य के औद्योगिक और कृषि विकास, विशेषकर बुनियादी ढांचे के निर्माण का काम तेजी से लाल की पहल पर शुरू हुआ ।
  • वह राज्य विधानसभा के लिए 1967, 1 968, 1972, 1986, 1991 और 2000 में सात बार चुने गए।
  • 60 और सत्तर के दशक के अंत में मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान हरियाणा के सभी गांवों को बिजली पहुँचाने वाले कर्मयोगी थे।
  • वह राज्य में पर्यटन और राजमार्ग निर्माण के अग्रणी दूत भी थे |
  • उनकी नीतियाँ बाद में कई राज्यों द्वारा अपनाई गई |
  • विकास के मॉडल चौधरी बंसी लाल को “लोहपुरुष” के रूप में माना जाता है                                                                                                                           चौधरी बंसी लाल

  • जो हमेशा वास्तविकता के करीब था और ग्रामीण समुदाय के उत्थान में गहरी रूचि रखता था।
  • चौधरी बंसी लाल इज़राइल की यात्रा करने वाले पहले मुख्यमंत्री बने
  • जब उन्होंने 1971 में कृषिविदों और सरपंचों के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
  • चौधरी बंसी लाल ने 2005 में विधानसभा चुनाव नहीं लडा
  • उनके पुत्र सुरेंद्र सिंह और रणबीर सिंह महेंद्रा राज्य विधानसभा के लिए चुने गए।
  • सुरेंद्र सिंह की मृत्यु  31 मार्च 2005 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के निकट एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में हुआ।

मृत्यु  चौधरी बंसी लाल

चौधरी बंसी लाल

  1. पुत्र सुरेन्द्र की मृत्यु ने इस लोहपुरुष को भी गहरा सदमा दिया था |
  2. सुरेन्द्र के जाने के बाद वह बीमार रहने लगे थे।
  3.  इसी वजह से  दिल्ली में 28 मार्च 2006 को निधन हो गया।

पुरस्कार और सम्मान चौधरी बंसी लाल

1972 में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट और डॉक्टर ऑफ साइंस के मानद डिग्री से सम्मानित किया।

विरासत चौधरी बंसी लाल

  1. 2008 में, जुई नहर को उसकी स्मृति में बंसीलाल नहर का नाम दिया गया था।
  2. भूपेन्द्र हुड्डा सरकार में चौधरी बंसी लाल यूनिवर्सिटी भिवानी की स्थापना की

परिवार चौधरी बंसी लाल

चौधरी बंसी लाल

 

  • चौधरी बंसी लाल के बड़े बेटे, रणबीर सिंह महेंद्रा
  • मुंढाल निर्वाचन क्षेत्र से विधान सभा (2005) के सदस्य थे।
  •  भारत क्रिकेट बोर्ड कंट्रोल (बीसीसीआई) अध्यक्ष रहे।
  • चौधरी बंसी लाल के छोटे बेटे की पत्नी, श्रीमती किरण चौधरी
  • तोशाम से विधान सभा (2005,2009, 2014) सदस्य हैं।
  •  2009-14 से भूपिंदर सिंह हुड्डा  सरकार में कैबिनेट मंत्री बनी
  • 2014 में कांग्रेस विधायक दल की नेता बनी ।
  • चौधरी बंसी लाल की पोती श्रुति चौधरी भिवानी से सांसद (2009) बनी ।
  • जबकि 2014 के आम चुनाव हार गयी थी ।

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Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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