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दलबीर सिंह सुहाग | Dalbir Singh Suhag | The Great Indian Army Chief

दलबीर सिंह सुहाग पीवीएसएम, यूवायएसएम, एवीएसएम, वीएसएम, एडीसी (जन्म 28 दिसंबर 1954)

दलबीर सिंह सुहाग

भारतीय सेना के 26 वें सेना प्रमुख (सीओएएस) थे, जिन्होंने 31 जुलाई 2014 को जनरल बिक्रम सिंह की सेवानिवृत्ति के बाद पद ग्रहण किया । सेना के प्रमुख का पदभार संभालने से पहले उन्होंने सेना स्टाफ (वीकोएस) के उपाध्यक्ष के रूप में सेवा की । दलबीर सिंह सुहाग 31 दिसंबर 2016 को सेवानिवृत्त हुए ।

शुरुवाती जीवन और शिक्षा दलबीर सिंह सुहाग

दलबीर सिंह सुहाग अपने परिवार की लगातार तीसरी पीढ़ी में सेना की सेवा करने वाले जाबांज सिपाही हैं | उन्होंने 28 दिसंबर 1954 को ईश्वरी देवी की कोख से जन्म लिया | भारतीय सेना की 18 वीं कैवलरी रेजिमेंट में उप-प्रमुख चौधरी रामफल सिंह के घर पैदा हुए थे ।

उनका परिवार हरियाणा के झज्जर जिले का बिशान गांव (तहसील बेरी) में स्थित है।

सिंह ने अपनी शुरुवाती शिक्षा को अपने गांव में पूरा किया और 1965 में राष्ट्रीय शिक्षा अकादमी में शामिल होने से पहले उन्होंने 1965 में अपनी माध्यमिक शिक्षा के लिए सैनिक स्कूल, चित्तौड़गढ़, राजस्थान में स्थानांतरित हो गये थे ।

उन्होंने मैनेजमेंट स्टडीज और स्ट्रैटेजिक स्टडीज में मास्टर डिग्री प्राप्त की हैं और हवाई सुरक्षा अध्ययन के लिए एशिया-प्रशांत केंद्र और नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना केंद्र के उच्च मिशन लीडर का कोर्स भी पूरा कर चुके हैं।

सैन्य करियर दलबीर सिंह सुहाग

दलबीर सिंह सुहाग

सिंह को 16 जून 1974 को 5 गोरखा राइफल्स की चौथी बटालियन में नियुक्त किया गया था । वे देहरादून के भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षक थे और उन्होंने जाफना, श्रीलंका में ऑपरेशन पवन के दौरान एक कंपनी के कमांडर के रूप में काम किया था ।

इस आपरेशन में उनकी वीरता और साहस देखने के बाद उन्हें नागालैंड में 33 राष्ट्रीय राइफल की कमान सौंप दी गया ।

इसके बाद उन्होंने 53 इन्फैंट्री ब्रिगेड की कमान संभाली, जो जुलाई 2003 से मार्च 2005 तक कश्मीर घाटी में काउंटर-विद्रोहियों के संचालन और अक्टूबर 2007 से दिसंबर 2008 तक कारगिल में 8 वीं पर्वत प्रभाग में शामिल थी। इसके बाद उन्हें इंस्पेक्टर जनरल विशेष फ्रंटियर फोर्स बना दिया गया |

सिंह ने 1997-98 में रक्षा प्रबंधन कॉलेज में एलडीएमसी, 2006 में राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज, 2005 में संयुक्त राज्य अमेरिका में कार्यकारी कोर्स और केन्या में वरिष्ठ मिशन लीडर कोर्स (यूएन) सहित कई भारतीय और विदेशी पाठ्यक्रम पूरा किया ।

हालांकि उनके ऊपर लगे आरोप झूठे व फर्जी निकले और वीके सिंह द्वारा लगाये गये ‘अनुशासन और सतर्कता’ प्रतिबंध अगले सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह द्वारा तत्कालीन रक्षा मंत्री ए के एंटनी की सहमति से रद्द कर दिया गया था।

भारतीय सेना के पूर्वी कमान के कमांडर दलबीर सिंह सुहाग

दलबीर सिंह सुहाग

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उन्हें 16 जून 2012 को कोलकाता में स्थित पूर्वी सेना कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (जीओसी-इन-सी) में पदोन्नत किया गया था और 31 दिसंबर 2013 तक क्षमता की सेवा प्रदान की गई थी।

सेना उपाध्यक्ष के रूप में दलबीर सिंह सुहाग

जब तत्कालीन लेफ्टिनेंट जनरल एस के सिंह 31 दिसंबर 2013 में रिटायर हुए तो उनकी जगह दलबीर सिंह सुहाग को सेना के उपाध्यक्ष (वीकोसास) के रूप में नियुक्त कर दिया गया और वह 30 जुलाई 2014 तक इस पद पर बने रहे ।

सेना प्रमुख के रूप में दलबीर सिंह सुहाग

14 मई 2014 को, भारत सरकार ने सेना के अगले चीफ के रूप में सिंह को नियुक्त करने के अपने फैसले की घोषणा की । भारत के रक्षा मंत्रालय ने मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) को उनके नाम की सिफारिश की थी, जिस पर प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह ने अध्यक्षता की थी ।

उन्होंने 31 जुलाई 2014 को सेना प्रमुख के रूप में कार्यभार संभाला और 31 दिसंबर 2016 तक उस पद पर कार्य किया । फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और जनरल के बाद गोपाल गुरुनाथ बावुर के बाद वह गोरखा राइफल्स के तीसरे अधिकारी हैं जो सेना के प्रमुख बने |

दलबीर सिंह सुहाग की नियुक्ति को चुनौती

7 जुलाई 2014 को, पूर्व सेना प्रमुख राजपूत वीके सिंह के पिट्ठू लेफ्टिनेंट जनरल रवी दास्तने द्वारा दलबीर सिंह सुहाग की नियुक्ति को कोर्ट में चुनौती दी गयी और सेना कमांडर के रूप में अपनी नियुक्ति की मांग की थी | उसकी याचिका के जवाब में भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने अगले सेना प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग की नियुक्ति रोकने से मना कर दिया।

पीठ ने पाया कि दलबीर सिंह सुहाग की नियुक्ति रोकने का कोई कारण और अत्यावश्यकता नहीं है और यह याचिका सेना के कमांडर के रूप में सिंह की नियुक्ति से जुड़ी है और इसलिए सेना प्रमुख की नियुक्ति से संबंधित मुद्दों को इस स्तर पर पेश नहीं करना चाहिए।

एनडीए के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने भी नियुक्ति को उचित ठहराते हुए कहा कि आरोपों में कुछ भी नहीं है और सिंह वरिष्ठता सूची में वरिष्ठ पदों सहित सभी पदों की कसोटी को पूरा करते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि 2012 में सिंह पर लगाया प्रतिबंध हटा लिया गया था और उन्हें सभी आरोपों से छुट्टी दे दी गई थी।

दलबीर सिंह सुहाग

दलबीर सिंह सुहाग

10 जून 2014 को केंद्र सरकार ने अपनी रिपोर्ट पेश करते सर्वोच्च न्यायालय से कहा था कि तत्कालीन सेना प्रमुख वी.के. सिंह ने सेना के उप-प्रमुख दलबीर सिंह सुहाग पर अनुशासनात्मक प्रतिबंध लगाने में कथित तौर पर “पूर्वकल्पित”, “अस्पष्ट” और ” अवैध ” भूल की थी |

यह था कोर्ट का निर्णय और सरकार की सफाई पर हकीकत यह थी कि राजपूत वीके सिंह दलबीर सिंह सुहाग के जाट होने की वजह से उनसे जलते थे और चाहते थे कि यह जाट सेना प्रमुख न बन पाए |

इसलिए उन्होंने अपने जूनियर दलबीर सिंह सुहाग पर फर्जी केस बनाकर उनकी सेवा सर्विस खत्म करने का षड्यंत्र रचा था जिसे कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया तत्कालीन कांग्रेस सरकार तथा रक्षा मंत्री ए के अंटोनी ने रद्द कर दिया था |

व्यक्तिगत जीवन दलबीर सिंह सुहाग

दलबीर सिंह सुहाग की शादी नमिता सुहाग से हुई है वह दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान की डिग्री से स्नातक हैं।

दलबीर सिंह सुहाग

इनके परिवार में तीन बच्चे, जिसमे दो बेटियां और एक बेटा है। दलबीर सिंह सुहाग को एक खिलाड़ी के रूप में जाना जाता है, वह घुडसवारी और तैराकी जैसी शारीरिक गतिविधियों में विशेष रुचि रखते है । उनके व्यक्तिगत शौक में 10 किमी रोजाना दौड़, घुड़सवारी और गोल्फ खेलना शामिल है |

अवार्ड्स

  1. परम विशिष्ठ सेवा मैडल
  2. उत्तम युद्ध सेवा मैडल
  3. अति विशिष्ठ सेवा मैडल
  4. विशिष्ठ सेवा मैडल
  5. Aide-De-Camp

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Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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1 Response

  1. 27/01/2019

    […] जाटों के गोत्र हैं – मान, जाखड, सिहाग, सहरावत, दहिया, बिजानियां, झिंझर, […]

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