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punjab ke veer jat Sher | पंजाब के वीर जाटों के कुछ जौहर

punjab ke veer jat Sher | पंजाब के वीर जाटों के कुछ जौहर
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दोस्तों हमारा आज का विषय है   punjab ke veer jat  जिससे हमें उन शूरवीर योद्धा जाटों की बहादुरी का नमूना देखने को मिलेगा जिनका नाम भारतीय इतिहास से सिर्फ इसलिए छिपाए रखा गया क्योंकि वह जाट थे |
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याद रहे कि इससे पहले उन्हें सिख कहकर अलग करने की कोशिस की गयी पर इन पढ़े-लिखे बुद्धिहीन लेखको को यह तक नहीं पता धर्म अलग होने से खून अलग नहीं हो जाता |


पंजाब में 12 ‘मिसलें’ होती थीं जिनमें 10 ‘मिसलें’ जाटों की थीं। ध्यान रहे मिशल को पंजाबी भाषा में जत्था भी कहा जाता है, हरियाणवी में इसे खाप कह सकते है |

करोडि़या मिसल के सरदार बघेलसिंह धारीवाल थे, जिन्होंने सन् 1790 में दिल्ली पर धावा बोल दिया और मुगलों की दिल्ली को जी भरकर लूटा |

और लालकिले पर जा धमका था, जिसकी तीस हजार फौज ने जहाँ कैम्प लगाया उसी जगह को आज तीस हजारी कहते हैं और आज वहीं दिल्ली का तीस हजारी कोर्ट है।

इसी वीर योद्धा बघेलसिंह ने इससे पहले सन् 1766 में लुटेरे अब्दाली को पंजाब में घायल कर दिया था और उसके चंगुल से हजारों हिन्दू ब्राह्मण बनिया स्त्रियों को छुड़वाकर उसका कारवां लूटा।

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इतिहास गवाह है कि किसी भी विदेशी आक्रमणकारी को पंजाब के जाटों ने न तो आसानी से कभी उसे देश में घुसने दिया और ना ही कभी पूरे लूट के माल के साथ वापिस जाने दिया।

यह punjab ke veer jat  का एक विशाल इतिहास है जो आज तक भारतीय इतिहास का हिस्सा नहीं बन पाया।

इसी वीर योद्धा को आखिर में दिल्ली में मुगलों ने तीन लाख का नजराना भी दिया और इसी पैसे के बल पर सरदार बघेलसिंह धारीवाल punjab ke veer jat  ने दिल्ली में दो साल रहकर गुरुद्वारे बनवाये।

दिल्ली में जितने भी प्राचीन गुरुद्वारे हैं वे सभी उन्हीं के बनवाये हुए हैं। सिक्खों के 10वें गुरु गोविन्दसिंह जी ने भगाणी तथा नादोण की लड़ाइयों में मुगलों का काफी हथियार, गोलाबारूद व संपत्ति को छीना था।

लगभग 230 इ.पू. महान् सिकन्दर की वापसी पर व्यास नदी पार करते समय खोखर जाटों ने उसे घायल किया, जो बेबीलोन में मर गया। इसकी फौज को वहाँ जाटों ने खूब लूटा।

लेकिन इतिहास को तोड़मरोड़कर पेश किया गया तथा खोखर जाटों को एक जाति लिख दिया, जबकि संसार में कोई भी खोखर जाति नहीं। इसी प्रकार हमारे मंड या मेड गोत्र को भी इतिहास में जाति लिखा है।

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जाट गोत्र  का इतिहास जानने के लिए यहाँ क्लिक करे punjab ke veer jat

यह गोत्र सिख तथा मुस्लिम धर्मी जाटों में अधिक है। ये तो जाटों के बहादुर, लड़ाकू तथा शासक गोत्र रहे हैं, जिस गोत्र के यूरोप में ईसाई जाट, मध्य एशिया तथा पाकिस्तान में मुस्लिम जाट और भारत में हिन्दू व सिक्ख जाट हैं।

भारत में पाकिस्तान के भूतपूर्व राजदूत श्री रियाज खोखर इसी गोत्र के मुसलमान जाट हैं। इराक के भूतपूर्व राष्ट्रपति श्री सद्दाम हुसैन खोखर गोत्र क मुस्लिम जाट थे |

इसी प्रकार पृथ्वीराज चौहान के हत्यारे मुहम्मद गौरी, जिसे शाहबुद्दीन गौरी भी कहा जाता है, लाहौर के पास रामलाल खोखर नाम के वीर जाट योद्धा ने दिनांक 15 मार्च सन् 1206 को अपनी तलवार से उसका सिर कलम कर दिया। जिस पर उसकी सेना में भगदड़ मची, जिसको जाटों ने जी भरकर लूटकर दरबदर कर दिया।

इसी प्रकार सन् 1834 में महाराजा रणजीतसिंह ने पेशावर के सुल्तान शाहशुजा को हराकर भारतवर्ष की अमानत ‘कोहिनूर हीरा’ 500 वर्षों बाद छीनकर वापिस लाये। punjab ke veer jat

गजनी से हिन्द की इज्जत वापस लाये
दिल्ली को भी जाट जीतकर, छोड़ आये |

यह हीरा अंग्रेजों ने महाराजा रणजीत सिंह के नाबालिक राजकुमार दिलीप सिंह से बहला कर ले लिया और रानी विक्टोरिया के ताज से होते हुए आज इंग्लैण्ड के अजायब घर की शोभा बढ़ा रहा है।

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आजादी के समय पं० नेहरू ने इसे अंग्रेजों के साथ समझौते में शामिल क्यों नहीं किया। क्या यह देश के स्वाभिमान का प्रश्न नहीं था?

यह हीरा महाभारत के कर्ण को नर्मदा नदी में मिला था। इस जट पुत्र को महाभारत में शूद्रजाति का कहने का प्रयास किया गया है।

इस हीरे का बड़ा लम्बा इतिहास है लेकिन संक्षेप में इतना ही है कि महाभारत से आज तक (सन् 2018) यह हीरा केवल 843 वर्ष जाटों के पास नहीं रहा है। (इसका इतिहास उपलब्ध है) ।

क्या बोनापार्ट नेपोलियन इसी जाट राजा के डर से ईरान से ही वापिस नहीं चला गया था? इसलिए स्वयं फ्रांसिसी इतिहासकार जैक्सो ने इन्हें “भारत का नेपोलियन” लिखा है।

जिन मुगलों ने घर आकर तथाकथित हिन्दुओ पीटा, उसका बदला इसी शेर जाट ने उनको उनके घर अफगानिस्तान व गजनी में जाकर लिया और उन पर शासन किया।

इन्हीं के कारण पंजाब की जनता शेष भारत से 50 साल कम गुलाम रही। लेकिन भारतीय इतिहास ने इनको ‘हिन्दकेसरी’ न लिखकर ‘पंजाब केसरी’ बना दिया ताकि इनका इतिहास पंजाब तक ही सीमित रहे। यह भी इसलिए रहा क्योंकि ये सिक्खधर्मी थे,

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वरना इनके इतिहास का भी वही हाल होना था जो ब्राह्मणवाद ने तथाकथित हिन्दू महाराजा सूरजमल, महाराजा जवाहरसिंह, महाराजा रणजीतसिंह ( पुत्र महाराजा सूरजमल), राजा महेन्द्रप्रताप व राजा नाहरसिंह बल्लभगढ़ आदि का किया।

भला हो सिक्ख धर्म का जिसके कारण कम से कम पंजाब में तो इस बहादुर महाराजा के इतिहास को पूरा सम्मान दिया जाता है।

इतिहास गवाह है कि जिन मुगलों ने बहादुर कहे जाने वाले हिन्दू राजाओं की बहन व बेटियों के अनेक डोले़ लिये तथा हिन्दू जनता को रोंदा और बेइज्जत किया, उन्हीं मुगलों को जाटों ने लाल किले में पीटा, फिर भतरपुर से लेकर काबुल-कंधार तक पीटा और उनपर शासन किया |

आधार पुस्तक : असली लुटेरे कौन ?
लेखक :  सम्मानीय जाट लेखक कमान्डेंट हवासिंह सांगवान 

आपका छोटा सा भाई चौधरी रणधीर देशवाल
जिला रोहतक हरियाणा
जय दादा छोटूराम
aapko yah post punjab ke veer jat kaisi lgi jarur btaye 

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