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jat shaheed rohtak | वीर अमरसिंह बुधवार जाट | रोहतक के अमर शहीद

 दोस्तों हम आज आपको जानकारी देंगे  jat shaheed rohtak  वीर अमरसिंह बुधवार जाट | रोहतक के अमर शहीद के बारे में |
jat shaheed rohtak
  jat shaheed rohtak  अमरसिंह सुनारियां ग्राम (रोहतक शहर से थोड़ी दूर) का निवासी था । वह डी. सी. साहब के यहां (रोहतक में) चपरासी का कार्य करता था । वह डी. सी. चरित्रहीन था ।
इस पर अमरसिंह को यह बुरा लगा और उसने त्यागपत्र देकर अपना वेतन मांगा । डी.सी ने उसे वेतन नहीं दिया । इस पर अनबन बढ़ गई । अमरसिंह ग्राम में जाकर बल्लू लुहार से कसोला लेकर आया और डी.सी की कोठी में जाकर रात को उसे जगाकर कत्ल कर दिया । कसोला वहीं डाल दिया ।
तब अमरसिंह ने उनको उठाया और मूरे को कहा कि उसके पाप का घड़ा भर गया है और आज वह उसे जिन्दा नहीं छोड़ेगा. यह कहकर उसने कसोले (खेती में काम आने वाला औजार) से काटकर उसकी हत्या कर दी.

महिला होने के कारण अमरसिंह ने मूरे की पत्नी को कुछ नहीं कहा, लेकिन जब वह जाने लगा तो मूरे की पत्नी ने अमरसिंह के पीछे कुत्ते छोड दिए, जिन्होंने उसे नोंच डाला.   jat shaheed rohtak 

बाद में सुरक्षाकर्मी भी पहुंच गए, जिन्होंने उसे हिरासत में ले लिया. अगले दिन अमरसिंह को कार से बांधकर शहर के चारों तरफ घुमाया और कुत्तों से नोंचवाया गया. बाद में पेड़ पर बांधकर उसके हाथों में कीलें गाड दी गई, जिससे उसकी मौत हो गई.
 उसकी मेम को नहीं मारा, उसे स्त्री समझकर छोड़ दिया । इसके बाद नीम पर चढ़कर जब वह बाहर निकला तो मेम ने शिकारी कुत्ते छोड़ दिये, वह उन कुत्तों ने फाड़ लिया । वह ग्राम में चला गया ।

हम पढ़ रहे है jat shaheed rohtak

जब अंग्रेजों ने वहाँ जाकर सारे गांव को तोपों से उड़ाना चाहा किन्तु अमरसिंह स्वयं उपस्थित हो गया । अंग्रेज उसे घोड़े के पीछे बांधकर ले गए और उसके ऊपर दही छिड़क कर शिकारी कुत्तों से फड़वाया गया ।   jat shaheed rohtak  का यह वृत्तान्त कचहरी में लिखा हुआ है ।
अंग्रेजों ने अपने सैन्य बल और देसी रियासतों के दम पर 1857 की क्रांति की ज्वाला को बेशक जल्दी ही ठंडा कर दिया, लेकिन लोगों के दिलों में आजादी पाने की आग लगातार धधकती रही. अंग्रेजों के अत्याचारों से हर कोई त्रस्त था, अंग्रेज अफसर मनमानी करते रहते थे, जिन पर कोई नियंत्रण नहीं था.
अक्सर भोले-भाले ग्रामीण भी इनके अत्याचारों का शिकार होते रहते थे. 1877 में तो सुनारियां गांव के एक ग्रामीण ने रोहतक के डीसी को उसकी चरित्रहीनता के कारण उसके घर में घुसकर मार दिया था

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वह डीसी यहां की हिन्दू महिलाओं पर बुरी नजर रखता था, जिसे सबक सिखाने के लिए अमरसिंह जाट नाम के शख्स ने यह कदम उठाया.उस अंग्रेज डीसी की कब्र आज भी आपको रोहतक के जिला न्यायालय के ठीक सामने की नर्सरी में दिख जाएगी।
अमरसिंह का एक 6 साल का भाई जिंदा बचा था, जिसे उसकी बुआ बचाकर ले गई थी. गांव के अन्दर अभी   jat shaheed rohtak  अमरसिंह के परिजन रहते हैं.
उनका कहना है कि उन्हें अपने पूर्वज पर गर्व है और पूरा गांव उस बात को गौरव की अनुभूति करता है क्योंकि वह अंग्रेज अधिकारी एक चरित्रहीन इंसान था, जिसे मारकर अमरसिंह ने पुण्य का काम किया था.
रोहतक कोर्ट के पास आज भी डीसी फ्रेडरिक एंग्लेहार्ट मूरे की कब्र उस घटना की गवाह बनी हुई है. उसकी हत्या कैसे की गई, इसका तो जिक्र है, लेकिन क्यों की गई, अंग्रेजों ने इसे कब्र पर नहीं लिखवाया.
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यह है उस नीच डी.सी. की कब्र

रोहट दहिया जाटों का गांव

छोटे थाने गाँव वाले दहिया भागे हुए अंग्रेजों को ढ़ूंढ़-ढ़ूंढ़ कर मारते थे । एक दिन नहर की पटरी पर एक अंग्रेज अपने एक बच्चे और स्त्री सहित घोड़ा गाड़ी में आ रहा था, यह नहर का मोहतमीम था ।
 इसके तांगे से एक अशर्फियों की थैली नीचे गिर गई । स्त्री स्वभाव के कारण वह अंग्रेज स्त्री उसे उठाने के लिए उतरकर पीछे चली गई ।
थाने गाँव  के निवासी पहले ही पीछे लगे हुए थे । उन्होंने वह थैली छीन ली और उस अंग्रेज स्त्री को न जाने मार दिया या कहीं लुप्त कर दिया ।
 आगे चलकर रोहट ग्राम का रामलाल नाम का ठेकेदार उसे मिला जो इसे जानता था । उसने उस मोहतमीम को बचाने के लिए बच्चे सहित घास के ढ़ेर में छिपा दिया, बाद में अपने घर ले गया ।
थाने ग्राम के लोगों को यह कह दिया कि तांगा आगे चला गया, उसी में अंग्रेज है । वह ग्राम में कई दिन रहा । फिर उसको ग्राम के बाहर उसकी इच्छा के अनुसार आमों के बाग में रखा ।

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वहां वह आम के वृक्ष पर बन्दूक लिए बैठा रहता था । पचास ग्राम वाले भी उसकी रक्षा करते थे । शान्ति होने पर उसे सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया ।
 रोहट ग्राम की 14 वर्ष तक के लिए नहरी और कलक्ट्री उघाई माफ कर दी गई । बोहर और थाने ग्राम के लोगों ने अंग्रेजों को मारा था, अतः इन दोनों ग्रामों को दण्डस्वरूप जलाना चाहते थे किन्तु रामलाल ने कहा था कि पहले मुझे गोली मारो फिर इन ग्रामों को दण्ड देना । रामलाल के कहने पर यह दोनों ग्राम छोड़ दिये गये ।
रामलाल को एक तलवार, प्रमाणपत्र और मलका का एक चित्र पुरस्कार में दिया गया । उस रामलाल ठेकेदार के लिए यह लिखकर दिया कि इसके परिवार में से कोई मैट्रिक पास भी हो तो उसे अच्छा आफीसर बनाया जाये । वह अंग्रेज ग्राम वालों की सहायता से शान्ति होने पर करनाल पहुंच गया ।
मार्ग में कलाये ग्राम में उसका लड़का मर गया । गाड़ने के लिए ग्राम वालों ने भूमि नहीं दी । एक किसान ने भूमि दी जिसमें उसकी कब्र बना दी गई । चिन्हस्वरूप उसका स्मारक बना दिया गया ।

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 रोहट ग्राम में सर्वप्रथम छैलू को जेलदारी मिली । सुजान, छैलू ठेकेदार और रामलाल ठेकेदार को प्रमाणपत्र दे दिया गया ।

पीपलथला, सराय आदि ग्रामों को भी इसी प्रकार लूटा और जलाया गया । इसी सराय ग्राम (भड़ोला) के पास आज भी एक अंग्रेज अफसर का स्मारक बना हुआ है जो उस समय ग्रामवासियों द्वारा मारा गया था ।

इस सराय ग्राम में कभी एक छोटी सी गढ़ी (दुर्ग) थी जो आज खण्डहर के रूप में पड़ी हुई है, केवल उसके दो द्वार खड़े हुए हैं । अनुमान यही है कि इस क्रान्तियुद्ध में ये अंग्रेजों द्वारा ही नष्ट किये गए ।
हरयाणा के सैंकड़ों ग्रामों ने सन् 1857 के युद्ध में इसी प्रकार भाग लिया और पीछे अंग्रेजों द्वारा दंडित हुए ।
आधार पुस्तक  :  देशभक्तों का बलिदान 
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Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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