jat history | जाट हिस्ट्री का महत्व | जाट इतिहास से युवा वर्ग अनजान क्यो ?

Why i need to write jat history इतिहास मनुष्य समाज की उन्नति एवं पतन की सत्य कहानी होता है।

उसे पढ़कर पिछली गलतियों से अपने को बचाना और अगले सुकार्यों के लिए प्रेरणा प्राप्त करना मनुष्य का कर्त्तव्य माना जाता है।

इसी के आधार पर जन-समाजों का अस्तित्व सुरक्षित रह सकता है।jat history 

उन्नति की इच्छुक प्रत्येक जाति को इतिहास की अत्यन्त आवश्यकता है। क्योंकि जनसमूह जितना प्राचीन गौरवपूर्ण गाथाओं को सुनकर प्रभावित होता है, उतना भविष्य के सुन्दर से सुन्दर आदर्श की कल्पना से नहीं होता।

इतिहासशून्य जातियां न उठीं हैं और न उठ सकती हैं। पूर्वजों के महान् कारनामों से लाभ उठाना और आगे बढ़ते जाना इतिहास से ही सीखा जा सकता है।

जिन लोगों ने देशनिर्माण में महत्त्वपूर्ण योगदान देना है और जिनकी रगों में आर्यों का शुद्ध रक्त प्रवाहित है |

उन सम्पूर्ण क्षत्रिय जातियों एवं भारतवासियों को एक मंच पर लाकर संगठित करना स्वाधीन देश की सुरक्षा के हित में परमावश्यक है।

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मेरे शिक्षा काल से ही मेरे रुचि धार्मिक एवं ऐतिहासिक बातें जानने की रही है।

यह रुचि मेरे सैनिक काल में भी रही। 32 वर्ष सेना में देश सेवा करके मैं 19 मार्च 1969 को पेन्शन आ गया।

घर आकर मैंने वैदिक साहित्य का अध्ययन करना आरम्भ किया। साथ-साथ मेरे रुचि इतिहास की ओर भी रही।

मैंने विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों को पढ़ाई जाने वाली इतिहास की पाठ्य-पुस्तकें पढ़ीं।

मुझे ज्ञात हुआ कि इन पुस्तकों में आर्य नस्ल जाट वीरों के शासन एवं वीरता के कारनामे तो दूर, इनका नाम तक भी नहीं लिखा गया है।

इन पुस्तकों में आर्यों को विदेशी आक्रमणकारी लिखा है और ऋग्वेद की रचना 1000-1500 वर्ष ई० पू० लिखी है

जबकि आर्य आदि-सृष्टि से ही भारत के मूल निवासी हैं जिनके नाम पर हमारे देश का पहला नाम आर्यावर्त पड़ा |

उपर्युक्त पाठ्य-पुस्तकें अंग्रेजों के शासन काल में उनके द्वारा लिखित इतिहास पुस्तकों की नकल है।

इनके अतिरिक्त अन्य अनेक इतिहासज्ञ विद्वान् कहे जाने वाले लेखकों ने भारत तथा विदेशों के इतिहास लिखे हैं जो कि अंग्रेजों के लेखों का अनुकरण है, जिनमें जाट वीरों का जिक्र तक भी नहीं है।

इनमें से एक “इतिहास शिरोमणि” कहलाने वाले श्री ईश्वरीप्रसाद एम० ए०, एल० एल० बी०, डी० लिट् हैं जिन्होंने मध्यकालीन भारत का संक्षिप्त इतिहास सन् 1969 ई० में लिखा।

इस लेखक ने अपनी इस पुस्तक में इस्लाम का जन्म तथा प्रसार से शुरु करके मुगल साम्राज्य का पतन तक का इतिहास लिखा है।

परन्तु मुसलमान शासकों एवं भारतवर्ष पर आक्रमणकारियों के साथ जाटों के युद्धों का कोई वर्णन नहीं किया गया है,

जबकि इन सभी के साथ जाट वीरों ने अनेक युद्ध किए। इस पुस्तक में जाटों का नाम तक भी नहीं मिलता।

हमारे  jat history से युवा वर्ग अनजान क्यो ?

मैने जाट जगत् से jat history के विषय में पूछताछ की। इसके लिए मैंने महाविद्यालय तथा विश्वविद्यालय के अनेक इतिहास विषयक विद्यार्थियों से यह प्रश्न पूछे –

जाट किसे कहते हैं? तुम्हारा गोत्र कब प्रचलित हुआ? जाटों की उत्पत्ति कब से है? जाटों की वीरता की कोई घटना बताओ? आदि-आदि।

कुछ का उत्तर मिला कि हल जोतने वाले को जाट कहते हैं। अन्य प्रश्नों का उत्तर मिला कि ये बातें हमें पढ़ाई नहीं जाती हैं।

ऐसे ही प्रश्न मैंने जाट बुद्धिजीवियों तथा इतिहास के प्रोफेसरों से किए। एक-आध ने ही कुछ बातों का अधूरा-सा उत्तर दिया।

शेष का उत्तर था कि हमारे द्वारा पढ़ाए जाने वाले इतिहासों में ये बातें हैं ही नहीं और न हम जानते हैं। तात्पर्य है कि बहुत थोड़े जाट अपने jat history को जानते हैं।

अन्य जाति के लोग तो यह कहते सुने गये हैं कि खेती करने वाले को जाट कहते हैं जिनकी उन्नति और प्रसिद्धि चौ० छोटूराम ने करवाई।

उनसे पहले जाटों की कोई प्रसिद्ध ऐतिहासिक घटना सुनने एवं पढ़ने में नहीं आई।

कुछ जाट भाई अपने को राजपूतों की सन्तान बतलाते सुने गए जिनका कहना है कि हमारे गोत्र के भाट की पोथी में ऐसा लिखा है।

भाटों के यह लेख असत्य, बेबुनियाद तथा मनगढन्त हैं।

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उपर्युक्त बातें सुनकर मुझे बड़ा खेद हुआ और मेरा विचार jat history लिखने का हुआ।

मैंने अपने मित्रों एवं बुद्धिजीवियों की सलाह लेकर यह जाट वीरों का इतिहास लिखना आरम्भ कर दिया।

यह इतिहास लेख सन् 1981 ई० से शुरू करके सन् 1988 में पूरा हुआ है।

लगातार सात वर्ष तक कड़ी मेहनत करके मैने यह इतिहास लिखा है।

पाठकों की सेवा में जाट वीरों का इतिहास नामक यह पुस्तक उपस्थित करते हुए मुझे हर्ष हो रहा है।

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इस jat history पुस्तक के लिखने में मैंने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि जाट जाति के गुण तथा दोषों का निष्पक्ष विवेचन पाठकों के समक्ष रखा जाए।

किसी जातिविशेष को बढ़ावा देना और जातिवाद का प्रचार करना मेरा अल्पमात्र भी उद्देश्य नहीं है।

इस jat history के लिखने का तात्पर्य यह है कि जाट जगत् समझे कि वह शुद्ध क्षत्रिय आर्य नस्ल है और सत्य एवं असत्य बातों की जानकारी प्राप्त कर सके तथा अपने पूर्वजों के किए गए कारनामों पर गौरव करके उन्नति करे।

पाठकों को इस jat history के पढ़ने से ज्ञात होगा कि यह एक तरह से भारतवर्ष का ही इतिहास है।

इस इतिहास से प्रेरणा लेकर सभी भारतवासियों को एकजुट होकर अपने देश की रक्षा एवं अखण्डता को कायम रखना अपना कर्त्तव्य समझना चाहिए।

आधार पुस्तक :- jat history 
जाट वीरों का इतिहास: दलीप सिंह अहलावत

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Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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