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grewal jat gotra – ग्रेवाल जाट गोत्र

grewal jat gotra  यह एक प्राचीन राजवंश है जो चन्द्रवंश की शाखा है।

पांचाल जनपद से मिले लेखों में राजा महोतल का वंश गहरवार लिखा है। गहरवार, ग्रहवार, ग्रेवाल एक ही हैं जो भाषाभेद से अलग-अलग बोले जाते हैं।

 किरण ग्रेवाल प्रसिद्ध वकील कनाडा grewal jat gotra 

Grewal Jat Gotra

KIRAN GREWAL – Lawyerके बारे में जानने के लिए यहाँ किल्क करे

इस वंश का निवास चुनारगढ़ के किले से इलाहाबाद तक पाया जाता है जो पहले जाट थे, फिर सातवी सदी में राजपूत संघ में मिलकर यह सब जाट ही राजपूत कहलाते हैं।

मिर्जापुर में 7 लाख आय की विजयपुर और इलाहबाद में गढ़मांडो राजपूत गहरवारों की प्रसिद्ध रियासतें थीं।

जाट ग्रेवाल जिला लुधियाना में नारंगवाल, किला रायपुर, मेमनवाला, ललतों कलां, गुजरवाल, झांलड़ा, बुड्ढोवाल, परोवाल, कुलावास, ध्रीके नामक बड़े-बड़े 52 गांवों में बसे हुए हैं।

यह वंश शिक्षा में सबसे बढ़कर है। सेना और शासन में कोई पद ऐसा नहीं जिस पर इस वंश के वीर न पहुंचे हों।

एशिया, यूरोप, अमेरिका, कनाडा का कोई ऐसा कोना नहीं जहां भारतीय लोग न बसते हों और उनमें लुधियाना का ग्रेवाल न हो।

raj grewal
Raj Grewal
MP of Brampton East In Canada

साधारण व्यवसायों से लेकर ऊंचे से ऊंचे व्यापारों में इनकी पहुंच है। मोटर पार्ट्स की दुकानदारी, टैक्सी बसों के संचालन तथा ट्रान्सपोर्ट व्यवसाय में इसकी बहुसंख्या उल्लेखनीय है।

इन्होंने गांव-गांव में लड़के, लड़कियों के स्कूल, कालिज और हस्पतालों का वह सुन्दर आयोजन किया हुआ है जो लुधियाना जाकर देखने योग्य है। लुधियाना में सैंकड़ों कोठियां ग्रेवाल जाटों की हैं।

पंजाब में grewal jat gotra सिक्ख धर्मी हैं।

राजस्थान में शेखावाटी झुंझनूं के क्षेत्र में ग्रहवार जाटों के 40 गांव हैं। दिल्ली में बिजवासन, नंगला और हरयाणा में बामला, महम 1/2 गांव ग्रेवाल जाटों के हैं।

सन्त सावनसिंह जी grewal jat gotra

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परम सन्त बाबा सावनसिंह जी – ग्रेवाल जाटों के गांव मेमनसिंहवाला के सरदार काबिलसिंह के पुत्र सावनसिंह जी हुए। आप जन्म से ही ईश्वरभक्त थे। 

grewal jat gotra

आपका जीवन मिलिट्री इंजीनियर के रूप में विकसित हुआ। इन्हीं दिनों आपका परिचय राधा स्वामी मत से हुआ। व्यास गद्दी के श्री महन्त जयमलसिंह जाट ने आप को ही अपना उत्तराधिकारी बनाया।

आपने इस पद पर रहकर जनता की आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष प्रयास किया।

आपने 8000 व्यक्तियों के बैठने योग्य एक विशाल हाल व्यास गद्दी के लिए बनवाया तथा इस कालोनी को डेरा बाबा जयमलसिंह के नाम पर प्रसिद्धि दी, जिसमें सभी आधुनिक सुविधायें सुलभ हैं। 

आपने अपना उत्तराधिकारी अपने पौत्र श्रीयुत चरणसिंह जी B.A. LLB को बनाया।
जाट गोत्र की लिस्ट पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

परम जाट सन्त बाबा सावनसिंह का जन्म 27 जुलाई 1858 ई० को हुआ तथा उनका स्वर्गवास 2 अप्रैल 1948 को हो गया।

प्रतिवर्ष 31 दिसम्बर को बाबा जयमलसिंह जी के जन्म दिवस पर तथा 27 जुलाई को परम सन्त बाबा सावनसिंह के जन्मदिन पर डेरा व्यास पर बड़ा भारी सत्संग होता है जिसमें लाखों लोग उपस्थित होते हैं।

gippy grewal
Gippy Grewal

आधार पुस्तक : जाट वीरों का इतिहास

लेखक : दलीप सिंह अहलावत
आपका साथी चौधरी रणधीर देशवाल जिला रोहतक   

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Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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