यौधेय गणराज्यों का इतिहास
Jatt News

यौधेय गणराज्यों का इतिहास | history of Yoddhey Republic states

यौधेय गणराज्यों का इतिहास

यौधेय गणराज्यों का इतिहास
आज का हमारा विषय है यौधेय गणराज्यों का इतिहास जो इस प्रकार है | यौधेय प्राचीनकालीन शब्द है, जो भारतीय साहित्य एवम धर्म ग्रन्थों में भरा पड़ा है | यौधयों में वर्तमान सभी क्षत्रिय कही जाने वाली जातियां /वर्ग सम्मलित थे | जो समय समय पर किसी कारणवश संघों व गणराज्यों में बदलती चली गयी |

योधेय कौन थे, और वर्तमान में किस रूप में विधमान है , इसे इतिहासकार खुलकर सपष्ट करने की स्तिथि में नहीं हैं | जबकि वास्तविकता यह हैं , कि प्राचीन कालीन योधेय गण और वर्तमान में जाटों में विधमान वंश ( गोत्र ) , खप / पाल गणतंत्रीय शासन पद्धति ( पंचायती ) के आधार पर यह स्वत: ही स्पष्ट हो जाता हैं, की जाटों में स्थापित खाप / पाल संघ ही योधेय गणसंघो का नवीन प्रारूप हैं |

इसके अतिरिक्त धर्म ग्रंथो तथा शास्त्रों के अनुसार योधेय गण दिल्ली के चारो ओर  300 से 400 मील से क्षेत्र में यौधेय गणराज्यों के गणतन्त्र विधमान थे , जो वर्तमान में जाटों के अस्तित्व ( निवास ) तथा खाप / पाल ( गणसंघ ) अस्तित्व से स्पष्ठ हैं | अत: प्राचीनकालिक योधेय गण ही वर्तमान में जाटों की खाप-पाल ( पंचायती ) शासन पद्धति रूप में विधमान हैं |

योधेयों का ” संघे शक्ति कलो युगे ” ( अथात् संघ में ही शक्ति हैं ) मूल सूत्र था, संघ शक्ति को भगवान् बुद्ध ने सर्वोच्च स्थान देकर बोद्ध सिद्धांतो में, ” संघम शरणम गच्छामि ” सिद्धांत को सर्वोपरी स्थान प्रदान किया |

जट ( जाट ) प्राचीन काल से वर्तमान समय तक इन सिद्धांतों के उपासक व पालक रहे है और सन्गठन शक्ति को सर्वोच्य स्थान दिए हुए है | इस स्थिति को 4 हजार साल पहले के पाणिनि ऋषि के श्लोक ‘जट झट संघाते’ ने कह दिया था |

भारतीय ग्रन्थों में श्रेष्ठ आर्यों का वर्णन है और यौधेय की श्रेष्ठ से भी सर्वश्रेष्ठ आर्य में गणना होती है | संगठन को सर्वोपरी गणतन्त्र शासन पद्धति के रूप में मन गया है | हकीकत तो यह है कि प्राचीनकाल में उत्तर भारत का पूरा क्षेत्र जट क्षत्रियों से ओतप्रोत था |

हम पढ़ रहे है यौधेय गणराज्यों का इतिहास

जाटों के गण शासन वर्तमान में भी प्रचलित है | जो खाप या पाल नाम से जानी जाती है | प्राचीनकाल में गण शब्द रोहतक के जाट शासक शिवजी के काल में बहुप्रचलित था | क्योंकि शिवजी की शासन पद्धति गण शासन के सिद्धांत पर स्थापित थी | इसलिए शिव गण विश्व प्रसिद्ध थे |

उत्तर भारत में शिव समर्थक गणराज्य के शासन थे जो शिवजी महाराज की हर युद्ध में मदद किया करते थे | उस सेना को शिव गण के नाम से जाना जाता है | शास्त्रों के अनुसार शिवजी की राजधानी रोहतकि (रोहतक) थी |

यौधेय जाट गोत्र के बारे में पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

Leave a Reply