Jatram mr Jatt PagalWorld Download

यौधेय गणराज्यों का इतिहास | history of Yoddhey Republic states

यौधेय गणराज्यों का इतिहास –history of Yoddhey Republic states

आज का हमारा विषय है यौधेय गणराज्यों का इतिहास जो इस प्रकार है | यौधेय प्राचीनकालीन शब्द है, जो भारतीय साहित्य एवम धर्म ग्रन्थों में भरा पड़ा है |

यौधयों में वर्तमान सभी क्षत्रिय कही जाने वाली जातियां /वर्ग सम्मलित थे | जो समय समय पर किसी कारणवश संघों व गणराज्यों में बदलती चली गयी |

योधेय कौन थे, और वर्तमान में किस रूप में विधमान है, इसे इतिहासकार खुलकर सपष्ट करने की स्तिथि में नहीं हैं |

जबकि वास्तविकता यह हैं , कि प्राचीन कालीन योधेय गण और वर्तमान में जाटों में विधमान वंश ( गोत्र ) , खाप / पाल गणतंत्रीय शासन पद्धति (पंचायती) के आधार पर यह स्वत: ही स्पष्ट हो जाता हैं, की जाटों में स्थापित खाप / पाल संघ ही योधेय गणसंघो का नवीन प्रारूप हैं |

हम जय यौधेय नारा क्यो लगाते है जानिए यौधेय प्राचीन जाट गणतंत्र का इतिहास

history of Yoddhey Republic states

history of Yoddhey Republic states

सम्राट् ययाति के चौथे पुत्र का नाम अनु था। अनु की नौवीं पीढ़ी मे उशीनर था जो पंजाब की अधिकांश भूमि का शासक था।

उनकी पांच रानियां थीं। बड़ी रानी नृगा से नृग पुत्र हुआ। नृग के पुत्र का नाम यौधेय था। इससे ही यौधेय वंश चला जो जाट वंश है।

यह भाषाभेद से जोहिया नाम से प्रचलित हुआ।

यौधेय गणराज्य शतद्रु (सतलुज) नदी के दोनों तटों से आरम्भ होता था। बहावलपुर (पाकिस्तान) राज्य इनके अन्तर्गत था।

वहां से लेकर बीकानेर राज्य के उत्तरी प्रदेश गंगानगर आदि, हिसार, जींद, करनाल, अम्बाला, रोहतक, गुड़गावां, महेन्द्रगढ़, दिल्ली राज्य तक प्रायः समूचे उत्तरी दक्षिणी और पूर्वी राजस्थान में फैला था। अलवर, भरतपुर, धौलपुर राज्य इसी के अन्तर्गत आ जाते थे।

history of Yoddhey Republic states

यौधेयों के समूह के संघों में होशियारपुर, कांगड़ा तक प्रदेशों की गिनती होती थी। देहरादून, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, बुलन्दशहर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, मैनपुरी, एटा, बदायूं, बरेली, बिजनौर, पीलीभीत, मुरादाबाद, रामपुर जिला आदि सारा पश्चिमी उत्तरप्रदेश यौधेय गण के अन्तर्गत था।

एक समय तो ऐसा आया था कि मुलतान के पास क्रोडपक्के का दुर्ग तथा मध्यप्रदेश का मन्दसौर तक का प्रदेश भी यौधेयों के राज्य में सम्मिलित था। सिकन्दर सम्राट् इनकी शक्ति से डरकर व्यास नदी से वापिस लौट गया था।

भारतवर्ष के अतिरिक्त यौधेय का एक समूह हिमालय को पार करके जगजर्टिस नदी को पार करता हुआ कैस्पियन सागर तक पहुंच गया था।

वहां पर इन्हें यौधेय की बजाय भाषाभेद से धे और दहाये नाम से पुकारा गया। यह शब्द यौधेय से धेय और फिर अपभ्रंश होकर धे रह गया –

यही धे अंग्रेजी लेखकों ने ढे और दहाये नाम से लिखा। जब मध्य एशिया में इस्लाम धर्म की आपसी मारकाट मची तो इनका एक बड़ा समूह भारत में लौट आया

जो ढे जाट के नाम से पुकारा जाता है और मेरठ के आस-पास के प्रदेशों में आबाद है।

भारतवर्ष में जो यौधेय बाकी रह गये थे, वे आजकल जोहिया कहलाते हैं। प्राचीनकाल के हर युद्ध में यह दल भारी तैयारियों के साथ सम्मिलित हुआ था।

history of Yoddhey Republic states

history of Yoddhey Republic states

इनका उल्लेख महाभारत समेत अनेक ग्रन्थ में आता है। इन्होंने गुप्त, मौर्य, कुषाण सम्राटों से भी टक्कर ली।

जैसे – चन्द्रगुप्त मौर्य, समुद्रगुप्त और कनिष्क आदि। सम्राट् सिकन्दर की यूनानी सेना ने इन्हीं वीर यौधेयों की शक्ति से डरकर व्यास नदी से आगे बढ़ने से इन्कार कर दिया था।

history of Yoddhey Republic states

भरतपुर राज्य में इनका एक शिलालेख मिला था। इस बात का वर्णन डा० प्लीट ने गुप्तों के वर्णन के साथ किया है।

उस शिलालेख में यौधेय गण के निर्वाचित प्रधान का उल्लेख है। इनका प्रधान महाराजा महासेनापति की उपाधि धारण करता था।

कुछ अन्य गणों के अध्यक्ष भी राजा और राजन्य की उपाधि धारण करते थे।

एकतंत्रियों के मुकाबले में गणतंत्र अपने अध्यक्षों को राजा, महाराजा या राजन्य (राजन्) की उपाधि देने लग गये थे।

जाट वंश लिच्छिवि गण ने तो अपने 7077 मेम्बरों को भी राजा की उपाधि दे दी थी। यौधेयों का यह शिलालेख गुप्तकाल का बताया जाता है।

इनकी प्राचीन मुद्रायें लुधियाना के सुनेत स्थान से प्राप्त हुई हैं। सोनीपत (हरयाणा) के किले से और सतलुज तथा यमुना के मध्यवर्ती कई स्थानों से यौधेयों के सिक्के प्राप्त हुए हैं, जो कि भिन्न-भिन्न प्रकार के हैं।

शुंग काल के सिक्कों पर चलते हुए हाथी और सांड (बैल) की मूर्ति अंकित मिलती है। उन सिक्कों पर ‘यौधेयानाम्’ ऐसा लिखा है।

history of Yoddhey Republic states

history of Yoddhey Republic states

दूसरी तरह के सिक्कों पर ‘यौधेयगणस्य जय’ लिखा है। इस सिक्के पर एक योद्धा के हाथ में भाला लिए त्रिभंगी गति से खड़ी हुई मूर्ति बनाई गई है।

ईसा की तीसरी शताब्दी तक यौधेय दल ने मारवाड़ (जोधपुर), जैसलमेर, बीकानेर (जांगल) प्रदेश की बहुत बड़ी भूमि पर अधिकार कर लिया था।

दूसरी शताब्दी में शक राजा रुद्रदामन के साथ यौधेयों का युद्ध जोधपुर की प्राचीन भूमि पर हुआ था, क्योंकि रुद्रदामन बराबर पैर फैला रहा था। जोधपुर में यौधेयगण का नेता महीपाल था।

रुद्रदामन ने इनके बारे में लिखाया था – सर्व क्षत्राविष्कृत वीर शब्द जातोत्सेकाभिधेयानां यौधेयानाम्।

अर्थात् सभी क्षत्रियों के सामने यौधेयों ने अपना नाम (युद्धवीर) चरितार्थ करने के कारण जिन्हें अभिमान हो गया था और जो परास्त नहीं किये जा सकते थे।

यह थी उनकी वीरता जिसका उल्लेख उनके शत्रु ने भी किया है। अपनी युद्धकुशलता के लिए वे प्रसिद्ध हो गये थे।

history of Yoddhey Republic states

हम पढ़ रहे है यौधेय गणराज्यों का इतिहास

इसके अतिरिक्त धर्म ग्रंथो तथा शास्त्रों के अनुसार योधेय गण दिल्ली के चारो ओर  300 से 400 मील से क्षेत्र में यौधेय गणराज्यों के गणतन्त्र विधमान थे ,

जो वर्तमान में जाटों के अस्तित्व ( निवास ) तथा खाप / पाल ( गणसंघ ) अस्तित्व से स्पष्ठ हैं |

अत: प्राचीनकालिक योधेय गण ही वर्तमान में जाटों की खाप-पाल ( पंचायती ) शासन पद्धति रूप में विधमान हैं |

योधेयों का ” संघे शक्ति कलो युगे ” ( अथात् संघ में ही शक्ति हैं ) मूल सूत्र था, संघ शक्ति को भगवान् बुद्ध ने सर्वोच्च स्थान देकर बोद्ध सिद्धांतो में, ” संघम शरणम गच्छामि ” सिद्धांत को सर्वोपरी स्थान प्रदान किया |

जट ( जाट ) प्राचीन काल से वर्तमान समय तक इन सिद्धांतों के उपासक व पालक रहे है और सन्गठन शक्ति को सर्वोच्य स्थान दिए हुए है |

इस स्थिति को 4 हजार साल पहले के पाणिनि ऋषि के श्लोक ‘जट झट संघाते’ ने कह दिया था |

भारतीय ग्रन्थों में श्रेष्ठ आर्यों का वर्णन है और यौधेय की श्रेष्ठ से भी सर्वश्रेष्ठ आर्य में गणना होती है |

संगठन को सर्वोपरी गणतन्त्र शासन पद्धति के रूप में मन गया है | हकीकत तो यह है कि प्राचीनकाल में उत्तर भारत का पूरा क्षेत्र जट क्षत्रियों से ओतप्रोत था |

हम पढ़ रहे है यौधेय गणराज्यों का इतिहास

जाटों के गण शासन वर्तमान में भी प्रचलित है | जो खाप या पाल नाम से जानी जाती है |

प्राचीनकाल में गण शब्द रोहतक के जाट शासक शिवजी के काल में बहुप्रचलित था, क्योंकि शिवजी की शासन पद्धति गण शासन के सिद्धांत पर स्थापित थी | इसलिए शिव गण विश्व प्रसिद्ध थे |

उत्तर भारत में शिव समर्थक गणराज्य के शासन थे जो शिवजी महाराज की हर युद्ध में मदद किया करते थे |

उस सेना को शिव गण के नाम से जाना जाता है | शास्त्रों के अनुसार शिवजी की राजधानी रोहतकि (रोहतक) थी |

राजा हर्षवर्धन बसाति या बैंस वंश के राजाओं का राज्य प्राचीन हरियाणा प्रान्त के ऐतिहासिक स्थान थानेसर (कुरुक्षेत्र) में रहता आया था |

तब यह विशाल हरियाणा जो दिल्ली के चारो तरफ 600 किलोमीटर तक विधमान था |

history of Yoddhey Republic states

यौधेय

उस समय भारतवर्ष में तीन प्रसिद्ध राजा ही अस्तित्व में होते थे |

  1. सारे उत्तरी भारत के शासक हर्षवर्धन बैंस थे |
  2. नर्मदा नदी तथा विन्ध्याचल पर्वत से परे दक्षिणी भारत में राजा पुलिकेशन सोलंकी द्वितीय थे |
  3. सौराष्ट्र-गुजरात में राजा ध्रुव भट्ट सैन द्वितीय थे |

उस समय विशाल हरियाणा भी दो नामों से जाना जाता था यमुना नदी के पश्चिम में गंगानगर-फिरोजपुर-लुधियाना से लेकर गंगा नदी हरिद्वार-शुक्रताल-हस्थिनापुर-गढ़मुक्तेश्वर तक कुरु जांगल प्रदेश कहलाता था, और गंगा नदी के पूर्वी भाग बरेली के आसपास तक कुरु पांचाल प्रदेश कहलाता था |

प्राचीन हरियाणा के गणतंत्रीय पंचायती यौधेय गण को पौराणिकों ने अपने कमीनेपन और दुर्भावना से गुप्त वंश के राजाओं द्वारा नष्ट करा दिया था,

परन्तु पंचायती शासन प्रणाली की इस छिन्न भिन्न खापों की प्न्चय्तोए अपने अपने क्षेत्र में कार्य करती रही |

इस सभी खाप पंचायतों का पुनर्गठन और संयोजन सम्राट हर्षवर्धन बैंस तथा वल्लभी नरेश ध्रुव भट्ट सैन ने कन्नौज नगर के विशाल पंचायती सम्मेलन में सन 699 में किया | दोनों राजाओं के वंश, जीवन और शासन का संक्षिप्त वर्णन नीचे दे रहा हूँ:

राजा हर्षवर्धन बैंस

राजा हर्षवर्धन का बैंस गोत्र यौधेय गण का ही अंग था |इनका एक पूर्वज मालदेव था जिसने होशियारपुर और जालन्धर मंडल की सीमाओ पर अपने नाम से मालपुरा नगर सन 457 में बसाया था |

आज इस गाँव में जाट सिख रहते है, जो इसी वंश से सम्बन्धित है | कुछ समय बाद इनका एक वंशज जिसका नाम विभूति था, जो एक प्रतापी जट पुरुष था,

वह अपने दल के साथ वर्तमान कुरुक्षेत्र (कुरुक्षेत्र स्थान बाद में प्रसिद्ध हुआ है पहले थानेसर नगर मुख्य होता था) में आकर अपना राज्य स्थापित किया |

इसका एक परपोत्र आदित्यवर्धन था | इसके बाद प्रभाकर वर्धन हुआ जिसकी मृत्यु 661 में हो गयी | उसका पुत्र राजवर्धन बैंस हुआ जिसने विदेशी हमलावर हूणों को हराया था,

पर इन्हें अपने देश के ही एक दुष्ट शासक शशांक ने धोखे से बुलाकर क़त्ल कर दिया |

शशांक बंगाल का एक ब्राह्मण शासक था जिसके पूर्वज पुष्यमित्र ने कभी सम्राट अशोक के पोत्र बृहद्रथ की धोखे से हत्या करके राज्य हडपा था |

राजवर्धन की माता और प्रभाकर वर्धन की पत्नी यशोमती थी, जो मालवा में मंदसौर के जाट शासक यशोधर्मा विर्क की पुत्री थी |

history of Yoddhey Republic states

यशोमती ने ही सम्राट हर्ष को जन्म दिया था | हर्ष मालवा (मध्यप्रदेश) के जाट नेता यशोधर्मा का धेवता था |

तो दोस्तों तब हर्ष की आयु 16 साल थी उस समय हूणों ने भारत पर हमला कर दिया था और उनका भाई राजवर्धन उनसे युद्ध लड़ रहा था तो हर्ष भी अपने भाई की सहायता के लिए युद्ध स्थान की तरफ चल पड़े |

रास्ते में उन्हें सुचना मिली कि उनके पिता  की तबियत ज्यादा बिगड़ गयी है तो वो वापस थानेसर लौट आये |

इनके आने के कुछ समय बाद इनके पिता की मृत्यु हो गयी और साथ में इनकी माता भी चल बसी | कुछ देर बाद सुचना मिली कि इनके भाई की भी हत्या हो चुकी है |

अब अपने माता पिता भाई की मृत्यु से दुखी हर्ष को तीव्र वैराग्य हो जाता है और राज्य से विमुख होकर इश्वर भक्ति में लीं हो जाता है | उस समय देश के हालात अच्छे नहीं थे |

एक और जहाँ विदेशी हुण हमले पर हमले कर रहे थे, दूसरी तरफ बंगाल का ब्राह्मण शासक शशांक अपने देश की बोद्ध जनता पर क्रूर जुल्म ढा रहा था | हर तरफ त्राहि त्राहि हो रही थी |

हम पढ़ रहे है यौधेय गणराज्यों का इतिहास

तब एक पर्व पर थानेसर में सारे विशाल हरियाणा की एक लाख इकसठ हजार जनता इक्कठी हुई थी |

थानेसर प्राचीन काल से ही बोद्ध धर्मी हरियाणा का तीर्थ स्थान रहा है | उस समय कुरुक्षेत्र का कही नाम नहीं था |

इस पंचायत में देश की तत्कालीन दशा पर सभा की गयी थी, क्योंकि उस समय यहाँ कोई राजा नहीं था सभी कार्य पंचायत सम्भालती थी |

इस सभा में 5831  मल्ल (यौधा) तथा 561 पंचों ने विचार कर 16 साल के हर्ष का थानेसर में राज्यभिषेक कर दिया, और यह सात निर्णय पेश किये:

  1. 21 प्रमुख पंचों ने हर्षवर्धन को शासन भार सोंपा
  2. राजा हर्ष को सभी खापों के मल्ल सैनिक पूर्ण सहयोग देंगे
  3. जनता जनार्धन आपके साथ रहेगी
  4. व्यापारी वर्ग आपका धन कोष है
  5. कृषक वर्ग आपका अन्न भण्डार है
  6. 16 से 75 वर्ष के बीच के सभी पुरुष आपके सैनिक है
  7. 15000 मल्लों तथा 2581 वीरांगनाओ की सेना ने तलवारों और खांड़ो आदि से राजा हर्ष का अभिवादन किया था |
हम पढ़ रहे है यौधेय गणराज्यों का इतिहास

इस लेख पर अभी शोध चल रहा है जैसे जैसे चीजे क्लियर होती जाएँगी लेख लिख दिया जायेगा….

धन्यवाद

history of Yoddhey Republic states

Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

You may also like...

Leave a Reply