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गौ रक्षक हरफूल जाट जुलानी आला। बेजुबानों के लिए फांसी चढ़ने वाला एकमात्र वीर

गौ रक्षक हरफूल जाट जुलानी आला श्योराण गोत

गौ रक्षक हरफूल जाट जुलानी आला 
अमर शहीद गौ रक्षक हरफूल जाट जुलानी आला किसी पहचान के मोहताज नहीं है उनपर 1974 में हरयाणवी फ़िल्म भी बन चुकी है l

जीवन परिचय
गौ रक्षक हरफूल जाट जुलानी आला का जन्म श्योराण गोत्र के जाट श्री चतुर राम के घर 1892 को हुआ उनका परिवार लोहारू के बरवास गाँव के इन्द्रयान पाने में हुआ बाद में इनका परिवार जींद जिले के जुलानी गाँव में बस गया। हरफूल के पिता का बचपन में ही निधन हो गया हरफूल ने 10 साल आर्मी की नौकरी की और प्रथम विश्व युद्ध में भाग लिया l

गौ रक्षा आन्दोलन 
हरफूल जाट ने सैकड़ों बूचड़ खाने नष्ट किये जहाँ गौ हत्या होती थी।

टोहाना के मुस्लिम राजपूत और मुस्लिम कसाई

(कुरैशी) गौ हत्या के लिए कुख्यात थे l

उस समय नैण 52 खाप ने बहुत कोशिश की

पर उनको नष्ट करने में नैण खाप को सफलता हाथ नहीं लग रही थी l

ऐसे समय में बहादुर हरफूल ने टोहाना के राजपूत मुस्लिम और कुरैशी की हत्या कर दी और साथ ही जींद, नरवाना, रोहतक के गौ बूचड़खाने भी नष्ट कर दिए l उसके इस बहादुरी भरे कारनामे से खुश हो के नैण खाप ने उनको सवा शेर की उपाधि से नवाज़ा l

बलिदान और गद्दार राजपूत

जब अंग्रेज़ो ने हरफूल पर इनाम रख दिया जब हरफूल अपनी बहन के सुसराल झुंझनू राजस्थान के पचेरी कलां(बुहाना) में रुके हुए थे तब एक राजपूत में पुलिस को सूचना दे दी। अंग्रेजी पुलिस ने 1936 में फिरोज़पुर में फ़ासी दे दी ऐसे एक वीर अध्याय का अंत हुआ।

 

गौ रक्षक हरफूल जाट जुलानी आला

83 साल पहले चौधरी हरफूल जाट जुलानी वाले ने (सन 1930 में) अकेले ने ही टोहाना

(जिला फतेहाबाद हरियाणा ) का बूचडखाना तोड़कर गौ हत्या के खिलाफ बिगुल बजाया था

और एक शुरुआत की थी गौ हत्यारों के वध करने की,

उसके बाद जींद , नरवाना ,रोहतक ,गोहाना के हाथे

(बूचडखाने ) भी खुद जा कर तोड़े और गौ माँ को मुक्त कराया I

1936 में गौ रक्षा करने के जुर्म इस महान गौपुत्र को फांसी की सजा दी गयी और फिरोजपुर (पंजाब ) की जेल में फांसी के बाद उनकी देह को सतलुज में प्रवाहित कर दिया I

आज गौ के नाम पर फर्जी हल्ला करने वाले संघियों को एक जाट देवता से सिख लेने की जरूरत है, गरीब दलितों मुस्लिमो पर लाठी भांजने की बजाए इन्हें कत्लखानो पर अपने हाथ आजमाने चाहिए

आज देश में सबसे ज्यादा कत्लखाने व गौ मांस का कारोबारी कोई मुस्लिम नही बल्कि एक जैन धर्म का बनिया है जो सऊदी अरब में रहता है जिसका सबसे बड़ा कारखाना हैदराबाद में है जिसका नाम अल कबर है , अगर संघी लठैतो में दम है तो उसको छेड़ कर देखे ?

उनके ऊपर आज़ाद खंडा ने रागिनी लिखी

एक जाटणी ने ऐसा छोरा जमया था
अकेले ने घणे हथे तोड़ दिए

गों हरफूल तो उसकी माँ नै एक ए जणया था
जो गरीब आदमी अर गऊ माता का रुखाला बणया था
लाचार अर कमजोर के हक़ खातर जो छाती ताण कै लड्या था
पहला आदमी था इतिहास का जो बेजुबाना खातर फांसी चढ्या था

बेजुबानों के लिए फांसी चढ़ने वाले इस एकमात्र गौपुत्र को शत शत नमन _/\_

जय हो चौधरी हरफूल जाट की

Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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