जाट किले दुर्ग, कोट, गढ़ | भारत पाकिस्तान के 74 जाट किलों की लिस्ट

जाट किले हमारा आज का चर्चा का विषय है | दोस्तों वैसे तो जाटों का हजारों सालों से देश विदेश में शासन रहा है

वर्तमान समय में हो रहे शोधों से प्राप्त अवशेषों, सिक्कों, ताम्र लेखो और शिलालेखो से

जो कि मध्य एशिया से लेकर इलाहबाद तक पाए गये है सबमे हर काल में जाट शासन को स्वीकार किया है |

कुछ तो बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी

सदियों से दुश्मन ए दौर जहाँ रहा है हमारा

जाट किले हमारा आज का चर्चा का विषय है | दोस्तों वैसे तो जाटों का हजारों सालों से देश विदेश में शासन रहा है

वर्तमान समय में हो रहे शोधों से प्राप्त अवशेषों, सिक्कों, ताम्र लेखो और शिलालेखो से जो कि मध्य एशिया से लेकर इलाहबाद तक पाए गये है सब मे हर काल में जाट शासन को स्वीकार किया है |

हमने अपने शोष में पाया कि बहुत संख्या में जाटों के किले कालान्तर में अन्य लोगों द्वारा हडप लिए गये तथा उनसे जाट शब्द को प्राय: हटाया गया

जिससे हमे आज जानकारी जुटाने में कठिनता का सामना करना पड़ता है |

फिर भी हमने 74 जाट किले की सूचि तैयार की है जो मुख्यता जाटों के शोर्य का वर्णन करने में बहुत सहयोग देंगी |

आइये पढ़ते है कितने जाट किले फ़िलहाल भी अपने स्वरूप में मौजूद है :-

राजस्थान में जाट किले

जाट किले
  1. भरतपुर
  2.  डीग
  3. कुम्हेर
  4. मोतीमहल
  5. नदवई
  6. वैर
  7. बयाना
  8. बाँध
  9. बारोठ
  10. सिनसिनी
  11.  रणथम्भोर किला

रणथम्भौर किले का निमार्ण नवीं सदी में नागिल जाट राजाओं द्वारा किया गया है।

यह प्राचीन ऐतिहासिक एवं सामरिक महत्त्व में अपना विशेष स्थान रखता है।

वर्तमान समय में किले में आकर्षित करने वाले कलात्मक भवन अब नही रहे।

लेकिन फिर भी शेष बचे हुए भवनों की सुदृढ़ता, विशालता तथा उनकी घाटियों पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है।

शुरूआती दौर में इस किले के स्थान के निकट पद्मला नामक एक सरोवर हुआ करता था।

इस किले के बारे में कहा जाता है कि इस किले का नाम जयंत और रणधीर नामक दो जाट राजकुमारों के नाम पर रणस्तम्भर पर रखा गया है।

जाट किले
R
Ranathambhaur Fort

मध्य प्रदेश में जाट किले 

  1. गोहद
  2. नरसिंहपुरा
  3. मगरोरा
  4. इन्द्रगढ
  5. जोगो
  6. देवास

कुश्ती के बादशाह दारा सिंह के बारे में पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

जाट किले

Kuchesar Fort

कभी आपने सोचा है राजसी ठाट-बाट की शान शौकत कैसी होती होगी?

वो राजसी ढंग के बड़े बड़े कमरे, राजसी खाने, रसोइए, बाग-बगीचे, पूरे के पूरे महल में शान से रहना, किसी सपने से कम नहीं है।

ऐसे ही राजसी ठाट-बाट का मज़ा अगर आप चाहते हैं, तो कुचेसर किले की यात्रा आपके सपने को पूरा करने जैसी होगी।

जी हाँ, हम बात कर रहें हैं उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर जिले में दिल्ली से सिर्फ़ 2 घंटे के रास्ते पर स्थित कुचेसर गाँव के कुचेसर किले की।

सारी आधुनिक सुख सुविधाओं से परिपूर्ण यह किला आपको सारे राजसी सुख का अनुभव कराएगा।

भारत की पुरानी धरोहरों में से एक यह सबसे शानदार विरासत है जो अब तक अपनी चमक को बरकरार रखे हुए है।

राव राज विलास के नाम से भी जाना जाने वाला यह किला 18वीं शताब्दी का किला है।

यह पौराणिक धरोहर, अजीत सिंघ दलाल गोत्री जाट के परिवार की पैतृक संपत्ति है जिनकी कुचेसर में रियासत थी।

सन् 1734 में बना यह किला चारों ओर से 100 एकड़ में फैले आम के बागों से घिरा हुआ है।

इस किले की सन् 1998 में फिर से नीमराना होटल की देखरेख में मरम्मत की गयी।

जाट शासकों द्वारा बनाया गया यह किला होटल मड किले के नाम से विश्वप्रसिद्ध है।

यह किला कई सालों तक मुगल साम्राज्य और ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन भी रहा।

अंत में इसे मुगल शासकों द्वारा जाट परिवार, अजीत सिंघ के परिवार को अधिग्रित कर दिया गया और तब से यह उनकी पैतृक संपत्ति है।

इस किले के कई हिस्सों में आपको मुगल आर्किटेक्चर की भी झलक दिख जाएँगी। किले का चारों ओर घने, हरे-भरे फार्म हैं।

यह किला ब्र्हमभट ब्राह्मणों, जो कुचेसर के राजकवि हुआ करते थे, के लिए भी लोकप्रिय है।

इस किले को बिल्कुल ही नये और आकर्षक धरोहर के रूप में तब्दील कर दिया गया है, जिसे लोग भारत का सबसे शानदार,मड फ़ोर्ट होटल के नाम से जानते हैं।

इस होटल वाले किले में ब्रिटिश और पुराने काल के तत्व अभी भी वैसे ही बरकरार हैं।

और इन सबके साथ ही यह किला जाट परंपरा के अनुसार अपनी मेहमानवाज़ी के मंत्र ‘अतिथि देवो भव:’ को कायम रखता है।

उत्तरप्रदेश में जाट किले 

  1. मुरसान
  2. सहारनपुर
  3. मुरादाबाद
  4. कुचेसर
  5. हाथरस
  6. नोहझील
  7. बेसवा
  8. अलीगढ
  9. सिकरी
  10. पिसावा
  11. मुइउदीनपुर
  12. कोटवन
  13. भटौना
  14. बिजनौर
  15. जारखी
  16. देहरादून उत्तराखंड
  17. वृन्दावन
  18. आगरा
  19. सोख
  20. जगनेर

जाट भवन रोहतक के बारे में पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

पंजाब में जाट किले 

  1. कपूरथला
  2. पटियाला
  3. नाभा
  4. फरीदकोट
  5. भगोवाल
  6. फतेहगढ़
  7. भागा
  8. खन्दा
  9. बडाला
  10. वजव
  11. कलास
  12. रुरियाल
  13. भदोड़, झुनवा
  14. सांझी
  15. अटारी
  16. मजीठिया
  17. मुगलचक
  18. नवल
  19. मानबेला
  20. सरहाली
  21. कालयावाला
  22. लघरा
  23. रसूलपुर
  24. पछाना
  25. फतहगढ़
  26. गढ़ी लाचयान
  27. मोराकला
  28. बिलासपुर
  29. संगरूर का किला

जाट धर्मशाला व भवनों की लिस्ट पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

हरियाणा में जाट किले 

  1. कैथल
  2. जगाधरी
  3. होडल
  4. मलिकपुर
  5. जींद
  6. मोरंडा कलां
  7. वल्लभगढ

पाकिस्तान में जाट किले 

जमरुद या जमराद (मूल रूप से फतेहगढ़) पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत के खैबर दर्रे के दक्षिण-पूर्वी दृष्टिकोण का एक गाँव है, जहाँ 1922 में बने बाब-ए-ख़ैबर (ख़ैबर गेट) आज सड़क के पार खड़ा है।

1837 में सरदार हरि सिंह नलवा (महाराजा रणजीत सिंह की खालसा सेना के एक प्रसिद्ध और सम्मानित जनरल) ने दुर्जेय दुर्ग की संकल्पना को मूर्त रूप दिया |

भविष्य में अफगान आक्रमण से सुरक्षा के लिए एक आधार प्रदान करने के लिए एक विशाल किले के निर्माण का प्रस्ताव रखा।

हरि सिंह ने 54 दिनों के अविश्वसनीय समय में इस विशाल मिट्टी के किले का निर्माण किया।

हालाँकि, काबुल (अफगानिस्तान) के अमीर मुहम्मद खान ने स्पष्ट रूप से सिखों को इस तरह के एक बड़े पद की अनुमति देने के खतरे को भांप लिया।

जिससे सिखों द्वारा अफगानी क्षेत्रों में तगड़े हमले से बचने के लिए मुहम्मद खान ने 1837 की शुरुआत में हमला किया।

सिखों द्वारा पराजित उनकी सेनाएँ काबुल में पीछे हट गईं। अप्रैल 1837 में, स्थानीय अफगानी कबीलों ने उसकी आज्ञा का पालन किया और किले पर भी हमला किया।

इस बिंदु पर बीबी हरशरण कौर मान ने बीमार हरि सिंह नलवा और सिख सुदृढीकरण को पुनः प्राप्त करने के लिए पेशावर में अपनी प्रसिद्ध यात्रा की।

बेहतर अफ़गन बल पराजित हो गया लेकिन सिखों को एक बड़ा झटका लगा क्योंकि हरि सिंह नलवा युद्ध में घायल हो गए और 19 वीं विशाख, संवत 1894 (1837) के तुरंत बाद उनकी मृत्यु हो गई।

जनरल हरिसिंह के आखिरी स्टैंड के कई अलग-अलग किस्से हैं। एक संस्करण में उनके पास से एक घोड़ा शॉट है और अफगानों को फिर से चार्ज करने और चार्ज करने के बाद खुद को गोली मार ली है।

एक अन्य संस्करण में, जो कि सामान्य था, घात लगाकर और दो बार गोली मारने के बाद, यह महसूस करते हुए कि वह मर रहा था, उसने खुद को अपने किले की दीवार से बांध लिया था।

इसलिए हमलावरों को, उनके नाम का भी डर था, यह सोचकर कि वह जीवित था और अफगानों का दिल डर जाता है।

इस क्षेत्र में उनकी प्रसिद्धि थी कि हरि सिंह नलवा के नाम का इस्तेमाल क्षेत्र की पठान माताओं द्वारा अपने बच्चों को काफी डराने के लिए “चुप हरिया राघल” (चुप हरि सिंह आ रहा है) कहकर किया जाता था।

लगता है कि आधुनिक शोध में सामने आया है कि जम्मू के हिन्दू राजपूत डोगरा ब्रदर्स की अफगानों से मिली भगत द्वारा हरी सिंह की हत्या की गयी थी।

हिन्दू डोगरा राजपूत गुलाब सिंह, सुचेत सिंह ने अफगानों का गुप्त तरीके से साथ दिया और उनके एक एजेंट के तौर पर काम किया ।

जाट किले
  1. लाहौर
  2. कलसिया
  3. सिरनावाली
  4. पेशावर
  5. जमरूद
  6. बहावलपुर
  7. कसूर
  8. डेरा गाजी खान

जाट रियासत व जागीरों के बारे में पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

दोस्तों मैंने अपनी तरफ से जाट किले दुर्ग का वह विवरण दिया है जिसका मुझे पता चला

आप सबसे भी निवेदन है यदि आपके पास कोई जानकारी है तो कृपया कमेन्ट में बताये |

दोस्तों जाटराम  आपकी अपनी वेबसाइट है | इसे जाट समाज की जानकारी से भरपूर करने में मदद करे | जय जाट

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3 Responses

  1. Himathloyal says:

    Nagour rajasthan me bhi jat raj tha loyal vansh raja tola sardar khari karamchoutha naresh

  2. Hapy chatha says:

    Punjab me distt sangrur me v jatt fort hai jo maharaja jind reyasat ka headquarter tha

  3. SURENDER SINGH says:

    The other day some one had written that Ranthambore fort too was built by ‘Nagil’ Jats It was supported by a picture depicting the fort of Ranthambore .

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