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रोहतक जाट हीरोज मेमोरियल कालेज, छोटुराम कालेज ऑफ एजुकेशन

jat heroes memorial school rohtak –  रोहतक जाट हीरोज मेमोरियल कालेज, छोटुराम कालेज ऑफ एजुकेशन

दीनबन्धु सर चौधरी छोटूराम जब मिडिल स्कूल के छात्र थे तो पूरे रोहतक जिले में कोई भी हाई स्कूल नहीं था।

उन्हें खुद आगे की पढ़ाई करने के लिए अपने क्षेत्र से बाहर रहने पर मजबूर होना पड़ा था जबकि वो आर्थिक रूप से इसके लिए सक्षम नही थे।

गांवों के 99% जाट छात्र हाई स्कूल के अभाव में अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सके। वह बचपन की कड़वे अनुभव के कारण इस स्थिति को बदलना चाहते थे।

इसलिए चौधरी साहब ने आगरा से रोहतक लौटते ही अपने मन में सबसे पहले शिक्षा की व्यवस्था करने की ठानी ।

सन 1913 को रोहतक में एक जाट हाई स्कुल की स्थापना की गई और इसके दरवाजे सभी धर्मों के जाटों के लिए खोल दिये गए ।

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सौभाग्य से, इस स्कूल को प्रतिबद्ध छात्रों के साथ साथ मास्टर बलदेव सिंह जैसे समर्पित अध्यापक भी मिल गए । जिससे यह आकर्षण का केंद्र बनता चला गया ।

सन 1927 में चौधरी छोटूराम इस स्कूल के लिए पचास हजार रुपये की ग्रांट भी लाये जो सभी दूसरे स्कूलों में सबसे अधिक थी ।

स्कूल के पास अपना एक अच्छा परिसर भी था जरूरत पड़ने पर चौधरी साहब की आवाज़ पर जिला रोहतक के बोहर गांव के चौधरी देवी सिंह नांदल ने काफी एकड़ (किल्ले) जमीन स्कूल को दान कर दी ।

चौधरी छोटूराम ने अपने अखबार जाट गजट में जोरदार लेख लिखकर कौम में जागृति पैदा की

और गांव गांव से जाट जमींदारों से काफी मात्रा में धन इकट्ठा करके इन संस्थाओं को संजीवनी दी, इसके बाद तो धीरे धीरे इस जमीन पर कई दूसरी जाट संस्थाए खड़ी होती चली गयी।

इनमे जाट हीरोज मेमोरियल कालेज, छोटुराम कालेज ऑफ एजुकेशन और छोटूराम पोलटेक्निक आदि प्रमुख है ।

निश्चित रूप से जरनल और तकनीकी शिक्षा के प्रसारण में इन कॉलेजों की बहुत बड़ी भूमिका है। सेना व सिविल के अधिकांश जाट अफसर ने इन्ही संस्थाओं से शिक्षा प्राप्त करी है।

चौधरी छोटूराम के आवाज़ पर इन संस्थानों के लिए बरेली की जाट-रेजिमेंट केंद्र से बहुत ही विशाल आर्थिक सहायता आई थी ।

रही सही कसर दानवीर सेठ चौधरी छाजूराम लाम्बा जी ने पूरी कर दी | इस तरह अनेक जाट स्कूल कॉलेज संस्थान पूरे हरियाणा और वेस्ट यूपी में खड़े होते चले गए ।

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आज समस्त जाट कौम को इन संस्थाओं पर गर्व है और उन महापुरुषों पर बहुत ही गौरव है जिनकी प्रेरणा और प्रयासों से ये संस्था अस्तित्व में आई थी |

हमें सिर्फ गर्व ही नही करना चाहिए बल्कि कुछ ऐसा करना चाहिए कि आने वाली पीढ़ी हम पर भी गर्व कर सके

निवेदक : चौधरी रणधीर देशवाल

जिला रोहतक 

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स्वतन्त्रता के लिए जाट संगठन

जब महात्मा गांधी के आदेश पर 1942 ई० में “अंग्रेज भारत छोड़ो” आन्दोलन जोरों पर था तब सर छोटूराम ने अपनी स्थिति स्पष्ट और मजबूत करने के लिए 29 नवम्बर, 1942 ई० को दिल्ली के तीस हजारी मैदान में अखिल भारतीय जाट महासभा का विशाल सम्मेलन कराया।

भरतपुर नरेश महाराजा विजेन्द्रसिंह जी इसके अध्यक्ष थे, लाहौर के मुस्लिम जाट बैरिस्टर सर हबीबुल्लाह ने मुख्य प्रस्ताव पेश किया और अजमेर के ईसाई जाट श्री श्रीनाथ ने उसका समर्थन किया। प्रस्ताव की मुख्य बातें थीं –

(i) जाट चाहते हैं कि भारत शीघ्र अतिशीघ्र स्वतन्त्र हो। चूंकि स्वतन्त्रता देने के लिए अंग्रेजों के वायदों में भारतीयों का विश्वास नहीं रहा है |

अंग्रेजों की Divide and Rule (फूट डालो और राज्य करो) की नीति से फिरकापरस्त तत्त्वों को प्रोत्साहन मिलता है जो जात-पात और मजहबी भावों को एक दूसरे के खिलाफ भड़काकर अंग्रेजी राज को सत्य सिद्ध करते हैं।

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इसलिये अमेरिका के प्रेज़ीडेण्ट की मध्यस्थता में स्वतन्त्र भारत के संविधान का निर्माण कार्य शुरु कर दिया जाए ताकि युद्ध की समाप्ति के बाद भारत तुरन्त आजाद हो सके।

(ii) यह कहना गलत है कि सभी मुसलमान मुस्लिम लीग के साथ हैं या सभी हिन्दू कांग्रेस के साथ हैं या सभी सिक्ख अकाली दल में हैं।

उदाहरणार्थ पंजाब में जमींदार लीग में हिन्दू, सिक्ख एवं मुसलमान सब शामिल हैं और जाट फिरकापरस्ती से दूर हैं। जाट की सबसे बड़ी यही विशेषता है।

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(iii) युद्ध के बाद अंग्रेजी साम्राज्य समाप्त हो जाएगा। भारत आज़ाद होगा। इसलिए ब्रिटिश सरकार फिरकापरस्ती को न उभारकर राष्ट्रीय तत्त्वों के हाथों में सत्ता सौंप दे जो आर्थिक और सैकुलर आधार पर भारत की आर्थिक समस्याएं हल करें और सब मज़हबों को समान सम्मान दें।

चौ० सर छोटूराम ने लाखों लोगों की इस सभा में अपने ओजस्वी भाषण में स्पष्ट किया कि जाट फिरकापरस्ती के खिलाफ एक होकर लड़ेंगे और पंजाब तथा देश की अखंडता की रक्षा करेंगे।

भारत में मजदूर-किसान राज्य स्थापित करने के लिए काम करेंगे। इस लड़ाई में उनका खून फिजूल नहीं बहेगा। वे कभी भी अंग्रेजों के साथ नहीं थे और अंग्रेज अफसरशाही की दाल नहीं गलने दी।

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फिरकापरस्तों से टक्कर लेना तो उनका जीवन मिशन रहा है। अन्त में उन्होंने हिन्दू-सिक्ख-मुस्लिम-ईसाई एकता के लिए अपील की और विश्वास व्यक्त किया कि केवल जाट ही ऐसा कर सकते हैं क्योंकि जाट चाहे हिन्दू, सिक्ख, मुसलमान, ईसाई धर्मी हैं सबका खून एक ही है।

ये पंजाब में एक हो गये हैं। अन्य मार्शल (लड़ाकू) कौमों राजपूतों, अहीरों, गूजरों और गौड़ ब्राह्मणों से भी अपील की कि वे देश की आजादी और राष्ट्रीय एकता के लिए जाटों का साथ दें। जाट चाहते हैं कि भारत शीघ्र अतिशीघ्र आज़ाद हो।

अखिल भारतीय जाट महासभा के इस सम्मेलन में इन प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पास कर दिया गया।

आधार पुस्तक: (दीनबन्धु चौधरी सर छोटूराम जीवन-चरित, पृ० 112-113,

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Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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