मोर के शिकार पर पाबंधी चौधरी छोटूराम की देन

मोर के शिकार पर पाबंधी चौधरी छोटूराम की देन  – Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

चौ० छोटूराम ने भ्रष्ट सरकारी अफसरों और सूदखोर महाजनों के शोषण के खिलाफ अनेक लेख लिखे। कोर्ट मे उनके विरुद्ध मुकदमें लड़े व जीते |

मोर बचाओ ‘ठग्गी के बाजार की सैर’, ‘बेचार जमींदार, ‘जाट नौजवानों के लिए जिन्दगी के नुस्खे’ और ‘पाकिस्तान’ आदि लेखों द्वारा किसानों में राजनैतिक चेतना, स्वाभिमानी भावना तथा देशभक्ति की भावना पैदा करने का प्रयास किया।

इन लेखों द्वारा किसान को धूल से उठाकर उनकी शान बढ़ाई। महाजन और साहूकार ही नहीं, अंग्रेज अफसरों के विरुद्ध भी चौ० छोटूराम जनता में राष्ट्रीय चेतना जगाते थे।

अंग्रेजों द्वारा बेगार लेने और किसानों की गाड़ियां मांगने की प्रवृत्ति के विरोध में आपने जनमत तैयार किया था।

Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

गुड़गांव जिले के अंग्रेज डिप्टी कमिश्नर कर्नल इलियस्टर मोर का शिकार करते थे।

लोगों ने उसे रोकना चाहा परन्तु ‘साहब’ ने परवाह नहीं की।

जब उनकी शिकायत चौ० छोटूराम तक पहुंची तो आपने जाट गजट में जोरदार लेख छापे

जिनमें अन्धे, बहरे, निर्दयी अंग्रेज के खिलाफ लोगों का क्रोध व्यक्त किया गया।

मिस्टर इलियस्टर ने कमिश्नर और गवर्नर से शिकायत की।

जब ऊपर से माफी मांगने का दबाव पड़ा तो चौ० छोटूराम ने झुकने से इन्कार कर दिया।

अपने चारों ओर आतंक, रोष, असन्तोष और विद्रोह उठता देख दोषी डी.सी. घबरा उठा और प्रायश्चित के साथ वक्तव्य दिया कि वह इस बात से अनभिज्ञ था कि “जाट मोर-हत्या को पाप मानते हैं”।

अन्त में अंग्रेज अधिकारी द्वारा खेद व्यक्त करने तथा भविष्य में मोर का शिकार न करने के आश्वासन पर ही Chaudhary Chhoturam शांत हुए

रोहतक जिले के डी.सी. लिंकन

(Lincoln E.H.I.C.S – 6 Nov. 1931 to 4 April 1933; 31 Oct. 1933 to 22 March 1934)

ने सन् 1933 में ‘जाट गजट’ के लेखों के विषय में एक लेख की ओर

अम्बाला कमिश्नरी के अंग्रेज़ अफसर को ध्यान दिलाया –

“राव बहादुर चौधरी छोटूराम ने जाट जाति के उत्थान के लिये जाट गजट प्रचलित किया था। किन्तु यह तो जमींदार पार्टी का कट्टर समर्थक बन गया है और सरकारी कर्मचारियों पर दोष लगाकर उनको लज्जित कर रहा है, यह ब्रिटिश सरकार का कट्टर विरोधी बन चुका है , पर यह प्रायः कांग्रेस के अभिप्राय जैसे विचार प्रकट करता है।”

(C.F.D.C. Rohtak, 12/40, M.R. Sachdev to Sheepshanks, Comm. Ambala Div. 16 Sept. 1933)

रोहतक जाट हीरोज मेमोरियल कालेज की स्थापना के बारे में पढने के लिए यहाँ क्लिक करे 

Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

चौधरी छोटूराम पर मर्डर का आरोप

दीनबंधु सर चौधरी छोटूराम की नजरो में अपनी जाति को आर्थिक, सामाजिक दृष्टि से ऊँचा उठाने के लिए राजनितिक सत्ता पा लेना बहुत बड़ी शक्ति थी।

वो स्थानीय राजनीती में भी दिलचस्पी रखते थे, उन दिनों जिला बोर्ड स्थानीय राजनीती का केंद्र हुआ करती थी।

इसलिए जब भी कभी इसके चुनाव की घोषणा हो जाती थी तो चारो तरफ बड़ी भारी सरगर्मी पैदा हो जाया करती थी, लेकिन हर किसी में इतना साहस नहीं होता था की वह चुनाव में कूद सके।

उन दिनों जमींदार, सफेदपोश, लम्बरदार सामाजिक दृष्टि से ऊँचा हुआ करते थे जो हर अवसर पर मौका मार लिया करते थे।

इसी तरह एक मशहूर व्यक्ति राय बहादुर चौधरी निहाल सिंह जिलेदार था, जो हमेशा सर्कार की कठपुतली की तरह काम करता था।

चौधरी छोटूराम ने भी अपने उम्मीदवार के रूप में चौधरी देवी सिंह को खड़ा कर दिया।

अस्थल बोहर मठ के महंत पूर्णनाथ ने निहाल सिंह जिलेदार की उम्मदीवारी को समर्थन कर दिया जिसके कारन इस चुनाव ने गंभीर रूप ले लिया।

हालाँकि यह चुनाव चौधरी देवी सिंह ने जीत लिया, और इससे चौधरी छोटूराम का सम्मान ग्रामीण जनता में बहुत बढ़ गया था।

Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

दुर्भाग्य से 1921 में हुए एक पारिवारिक झगडे में जिलेदार निहाल सिंह की हत्या कर दी गयी।

अब महंत पूर्णनाथ ने चुनाव में हुई बार का बदला लेने के लिए FIR में चौधरी छोटूराम और चौधरी लालचंद का नाम लिखा दिया।

यही नहीं, सुपरिंटेंडेंट्स और डिप्टी कमिश्नर दोनों ही इन जाट नेताओ से रंजिश रखते थे, क्योंकि चौधरी छोटूराम ने अपने अख़बार जाट गज़ट में ठगी के बाजार की सैर लेख में जिला प्रशासन के भ्रष्टाचार के खिलाफ लिखा था।

अब इन अफसरों ने इन दोनों नेताओ को फ़साने की योजना बना ली थी
वैसे Chaudhary Chhoturam और चौधरी लालचंद ने गिरफ्तारी से पहले ही जमानत देने वाले 2 व्यक्तियों का इंतेज़ाम कर लिया था।

लेकिन जो लोग जमानत देने के लिए तैयार हो गए थे वो अफसरों द्वारा परेशान किये जाने के डर से पीछे हट गए थे।

इसी बीच जिला रोहतक के प्रभावशाली लोगो का एक डेपुटेशन अम्बाला डिवीज़न के कमिश्नर से मिला और उसने उन दोनों अंग्रेज़ अफसरों के पक्षपातपूर्ण और बदला लेने की प्रवृत्ति की शिकायत की।

कमिश्नर ने रोहतक जाकर खुद मौके की जांच की और लोगों को बुलाया जो इस सम्बन्ध में कुछ कहना चाहते थे |

इन लोगों में चौधरी जुगलाल जेलदार सबसे अधिक बोलने वाले व्यक्ति थे, उन्होंने मौके पर इक्कठी भीड़ के सामने चौधरी छोटूराम और चौधरी लालचंद के प्स्ख में जबर्दस्त और निर्भीक पैरवी की |

उन्होंने कहा कि एक झूठे मुकदमे में Chaudhary Chhoturam और चौ. लालचंद जैसे मशहूर लोगों को फांसने से ब्रिटिश सरकार की बड़ी बदनामी हुई है |

उसने कमिश्नर को चेतावनी दी कि इस मामले में जल्दी में कोई काम नहीं करना चाहिए नहीं तो सारा जिला विद्रोह पर उतारू हो जायेगा, और उसके लिए जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा

जेलदार जुगलाल ने कमिश्नर से अनुरोध किया कि दोनों ब्रिटिश नौकरशाहों को यहाँ इक्कठे लोगों के बीच बुलाकर बैठाया जाये |

Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

मोर के शिकार पर पाबंधी – Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

कमिश्नर ने दोनों पक्षों से अलग अलग बातें की और अपना स्वतंत्र निष्कर्ष निकाला | उसने जोरदार तालियों के शोर के बीच घोषणा की थी कि

चौधरी छोटूराम तथा लालचंद दोनों जिले के सम्मानित व्यक्ति है और वो अपनी निस्वार्थ जन सेवा के लिए जिले में आदर की नजर से देखे जाते है |

इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए उनको ऐसे किसी बुरे काम को कराने   का दोषी नहीं माना जा सकता |

मंडल कमिश्नर ने अब अपना निर्णय दे दिया था क्योंकि अभियोग के समर्थन में कोई गवाही नहीं थी |

इस घोषणा के साथ ही लोग ख़ुशी से नाच उठे और अपने दोनों नेताओं को कंधो पर उठा लिया |

चारों तरफ जोरदार नारे लग रहे थे, Chaudhary Chhoturam जिंदाबाद, लालचंद जिंदाबाद,भारत माता जिंदाबाद, किसान एकता जिंदाबाद |

दोनों के गलों में फूलों की माला पहनाई गयी, एक बार फिर सत्य की जीत हुई थी, सारे षड्यंत्र विफल हो गए थे |

Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

चौधरी छोटूराम विभिन्न जातियों और धर्मों के लोगों के दिल के भीतर बैठ गए थे, और उन्हें अपनी शक्ति का अहसास होने लगा था |

वह अपना रास्ता तलाश करने के लिए अच्छी तरह सक्षम और समझदार थे, उनका यश धीरे धीरे रोहतक जिला की सीमाओं को पार करके पुरे पंजाब में फ़ैल रहा था जिससे उन्हें एक नई पार्टी को जन्म देने में अधिक मदद मिली, जिसे वो अपनी तमाम जिन्दगी पालते रहे |

लेकिन इतना होने पर भी उन्होंने कभी पद या सत्ता की कामना नहीं की और हमेशा दूसरों को अवसर दिया ताकि वो पार्टी और राष्ट्र की भावी आशा बनकर उभर सके|

इस प्रकार दीनबन्धु सर Chaudhary Chhoturam हिन्दू, मुस्लिम, सिख और इसाई आदि दुसरे लोगों का विश्वास जीत पाए |

उनकी राजनितिक कुशलता ही उनके लिए सभी कामों में सम्मान लाने में सफल हुई | वह अपने प्रयासों में सीधे बढ़ते गए और उनके सारे प्रयास मानवता के हितों के लिए ही थे |

मोर के शिकार पर पाबंधी – Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

वह हमेशा संस्कृत के इस श्लोक वीर भोग्या वसुंधरा को अपने जीवन में दोहराते चले गए , उनका मानना था कि इस परिवर्तन शील संसार में कमजोर और दुर्बल लोग पृथ्वी पर शासन नहीं कर पाते |

इस परिवर्तन में केवल वे ही लोग जीवित रहते है को सुदृढ़ और शक्तिशाली होते है |

उनको जीवन में एक महान उदेश्य पूरा करना था और यह लक्ष्य तभी पूरा हो सकता था जब सैकड़ों वर्षो से सोई हुई जनता को जगाया जा सके |

Chaudhary Chhoturam par murder ka aarop

बहुत ख़ुशी की बात है कि उनके जीवन में ऐसे अवसर आया था जब वो राजनितिक तौर पर उभरकर सामने आ रहे थे |

वो अपनी जनता के बीच प्रिय नेता बनकर उभरे थे, उनके जीवनदाता, उनके रक्षक और यथार्थ में उसके आधे देवता के रूप में उभरे थे |

अपने राजनितिक जीवन के प्रत्येक बदलते पहलु के साथ ऐसा मालूम होने लगा था कि उनका हरेक काम जनहित पर आधारित होता जा रहा है |

यदि उन्होंने कभी भी किसी राजनितिक ताकत की ख्वाहिश की भी थी तो वह भी किसी अन्य उदेश्य के लिए न थी, बल्कि जनता के भले के लिए ही थी |

यही कारण है कि वह Chaudhary Chhoturam के प्रशंसको  को एक मानव नहीं बल्कि मानवता के संरक्षक के रूप में दिखाई पड़े थे |

उनके सम्मान में कुछ तत्कालीन प्रमुख नेताओ के कथन इस प्रकार है:

1. चौ० सर छोटूराम हमारी उस महान् जाति के, जिसमें हमें भी पैदा होने का सौभाग्य प्राप्त है, एक रत्न हैं। जनता के लिए की गईं उनकी सेवाएं सराहनीय हैं। हम परमात्मा से उनकी दीर्घायु की कामना करते हैं। –

हिज हाईनेस श्री महाराजा साहब सवाई ब्रजेन्द्रसिंह बहादुर भरतपुर नरेश।

2. भारत की एक प्रमुख जाट रियासत के दीवान की हैसियत से मुझे आदरणीय राय बहादुर चौ० सर छोटूराम को उनकी हीरक जयन्ती के शुभ अवसर पर बधाई देने में हार्दिक प्रसन्नता है।

पंजाब और विशेषतः जाट कौम की जो अमूल्य सेवायें उन्होंने अपनी महान् योग्यता से की हैं, उनका वर्णन मेरी सामर्थ्य से बाहर है, लेकिन मैं यह कह सकता हूं कि जो भी व्यक्ति उनके सम्पर्क में आता है उसके दिमाग पर उनकी विशिष्टता की छाप पड़ जाती है।

के० पी० एस० मेनन, आई० सी० एस०, प्राइम मिनिस्टर भरतपुर।

3. पंजाब विधानसभा के अध्यक्ष चौ० सर शहाबुद्दीन ने उनको गुदड़ी का लाल और पंजाब का शेर बताया और कहा कि उनकी योग्यता और कार्यशीलता से उनके विरोधी भी प्रभावित हैं।

4. पंजाब विधानसभा के उपाध्यक्ष सरदार दसौधासिंह ने कहा कि

चौ० साहब ने पंजाब के किसानों के लिए जो सेवायें की हैं उनके वे इतने कृतज्ञ हैं कि छोटूराम उनके लिए दूसरा खुदा है और अक्सर वे उन्हें  छोटा राम भी कहते रहते हैं।

5. चौधरी छोटूराम इस युग की उन जिन्दादिल विभूतियों में से हैं जिन्होंने उत्तरी भारत की बिखरी हुई क्षत्रिय जातियों का संगठन करके क्षत्रिय जातियों की गणना संसार की जीवित जातियों में की है।

राव कृष्णपाल सिंह यादव, आवागढ़ राज्य (उत्तरप्रदेश)।

6. पहले पहल मैंने सर छोटूराम को सन् 1925 में पुष्कर के जाट महोत्सव में देखा था। मैं महाराजाधिराज सर नाहरसिंह जी शाहपुराधीश के साथ इस महोत्सव में शामिल हुआ था।

चौधरी साहब एक ऐसी विभूति हैं जिन पर हम सभी लोगों को गौरव हासिल है।

राव गोपालसिंह राष्ट्रवर खरवा नरेश (राजस्थान)।

7. पंजाब की दलित जाति के नेताओं से मैंने Chaudhary Chhoturam जी के सम्बन्ध में बहुत सी प्रशंसा योग्य बातें सुनी हैं, उनसे मुझे बहुत संतोष हुआ है।

उन्होंने अनेक दलित युवकों को ऊंचे-ऊंचे ओहदे देकर अपनी उदारता और दलितों के प्रति सौहार्द का परिचय दिया है। उन्होंने स्वयं एक गांव में जा अछूतों को कुएं पर चढ़ाया है।

हम उनके दीर्घ जीवन की परमात्मा से प्रार्थना करते हैं।

डाक्टर मानकचन्द एम.एल.ए., मन्त्री, अखंड भारत संघ, उत्तरप्रदेश ब्रांच, वीर भवन आगरा।

8. सैनिक जातियों तथा देहाती लोगों में जिस महान् विभूति के कारण नवजीवन प्राप्त हुआ है, उन चौधरी सर छोटूराम के लिए जीवेम शरदः शतम् की प्रार्थना भगवान् से करते हैं।

कुंवर यतीन्द्र कुमार, मन्त्री, अखिल भारतीय गुर्जर महासभा, लंढौरा हाउस, सहारनपुर।

मोर के शिकार पर पाबंधी – Chaudhary Chhoturam par murder ka aaropy

यह भी पढ़े – Chaudhary Chhoturam

सांपला के बनिये को जवाब

बिडला सेठ को करार जवाब

जाट स्कुल रोहतक

जाट रेजिमेंट दीनबन्धु सर छोटूराम

भाखड़ा बाँध निर्माता सर छोटूराम

कर्जमुक्ति बिल कानून सर चौ. छोटूराम

Chaudhary Chhoturam

Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *