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शहीद की जाति देख श्रधान्जली देते है खट्टर

घटिया स्तर पर जाती हुई देश की राजनीती

शहीद

शहीद शब्द सुनते है आपको अंदाजा हो जाता है कि किसी वीर योद्धेय ने देश समाज के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी है | देश में आज़ादी से पहले भी लाखों लोगों ने अपने जीवन की बलि देकर देश को आज़ाद कराया और आज भी लाखों शहीद इस देश की आज़ादी कायम रखने के लिए रणचंडी पर अपनी कुर्बानी दे रहे है |

आतंकी जब किसी जवान को गोली मारता है

वह उसकी जाति देखकर नही मारता |

न ही कोई जवान अपनी जाति की सोचकर सरहद पर जंग लड़ता|

पर देश के नेता इन वीर जवानों की शहादत को कैसे जातिवाद में धकेल देते है

उसका जीता जगता उदाहरण हरियाणा से लिया जा सकता है |

हरियाणा में 2014 में भाजपा सरकार सत्ता में आई

तब से लेकर आज तक हरियाणा प्रदेश जो अपने सामजिक भाईचारे की मिशाल था वहां आज शहीद जवानों की जाति देखकर मंत्री मुख्यमंत्री श्रधांजली देने जाते है | अभी हाल की घटना देखिये 5 फरवरी को कश्मीर में आतंकी हमला होता है जिसमे एक केप्टन सहित चार जवान शहीद होते है | इनमे हरियाणा के 22 वर्षीय केप्टन कपिल कुंडू शहीद हुए है जो अपने पीछे एक विधवा माँ व जवान बहन छोड़ गये है |

इसी दिन कश्मीर हमले में ही घायल हुए

हरियाणा के रोहतक जिले के बसाना गाँव के मोनू शहीद होते है |

हम मोनू की शहादत को नमन करते है |

ऐसे वीरों के कारण ही हम आज़ादी की खुली हवा में सांस ले रहे है |

पर हरियाणा की भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर

यह सुचना मिलते ही तुरंत हेलीकाप्टर से कलानोर हल्के के उसी गाँव जाते है

और शहीद को श्रधान्जली देकर उनका अंतिम संस्कार करवाके आते है

फर्क सिर्फ इतना था वह राजपूत के घर में जन्मे थे और भाजपा राजपूत जाति की रखैल है|

वही दूसरी तरफ गुडगाँव के रनसीका गाँव के शहीद केप्टन कपिल कुंडू के अंतिम संस्कार में मुक्यमंत्री या मंत्री की तो बात ही छोडो कोई सरकारी अधिकारी तक नही फटकता | दोनों जवान हरियाणा के दोनों ही सेना की तरफ से कश्मीर में लड़ते हुए शहीद हुए पर भाजपा सरकार ने इनमे जमीन आसमान का अंतर कर दिया |

शहीद

2017 में जाट आन्दोलन के दौरान भी भाजप का शहीद के प्रति यही रवैया रहा,

एक तरफ तो उसने शांतिपूर्वक अपना हक मांग रहे 17 जाटों को गोलियों से भुन दिया,

साथ ही साथ हजारों निर्दोष युवाओं को झूठे मुकदमे लगाकर जेल में डाल दिया |

इस आन्दोलन के दौरान भडके दंगों में जहाँ अन्य समुदायों के साथ

जाट समुदाय की दुकाने भी जलाई व लुटी गयी थी

पर जाटों को छोडकर सबको दुगने तीगने मुवावजे दिए गये |

रिफ्यूजी समुदाय की तो खाली पड़ी दुकानों तक के लाखों रूपये के चेक भेजे गये |

वही जब यह साबित हो चूका था कि दुकाने जलाने व लुटने में जाटों के अलावा भी कई जातियों का योगदान था फिर भी इसके लिए सिर्फ जाटों का नाम लेकर बदनाम करने की कोशिस करी गयी | मुरथल सोनीपत में तो सरकार ने नीचपन की हद ही पार कर दी जहाँ झूठे बलात्कार के नाम पर जाट युवाओं को अपराधी घोषित करते हुए मुकदमे में फसाने के गम्भीर प्रयास हुए | बाद में जांच समिति ने बलात्कार की घटना ही न होने की रिपोर्ट सोंपी पर इस बेशर्म सरकार को तनिक भी लज्जा नही आई क्योंकि पदाइशी बेशर्म है |

शहीद

केप्टन कपिल कुंडू के जीवन के बारे में पढने के लिए यहाँ क्लिक करे

इस आन्दोलन के दौरान शहीद हुए जाट समाज के लोगों को मुआवजा या शहीद का दर्जा तो दूर की बात उनकी यादगार के तौर पर रोहतक के दिल्ली बाई पास का नाम जाट शहीद चोंक करने के मुद्दे पर भी सरकार गेम खेलती रही | सुबह प्रशासन ने यहाँ जाट शहीद चोंक का बोर्ड लगवाया पर शाम होते ही अँधेरे में वह बोर्ड उखाड़ फेंका | यह है भाजपा सरकार की मानसिकता |

दूसरी तरफ यूपी के कासगंज में दंगा भडकाते समय मारे गये बजरंग दल से जुड़े एक दंगाई चन्दन गुप्ता को शहीद का दर्जा देने की बात विधानसभा तक में गूंजी बल्कि यूपी के राजपूत जाति के मुख्यमंत्री ने तो उसे दिन के दिन लाखों रूपये के मुआवजे का चेक तक सोंप दिया | क्योंकि वह बनियों का लड़का था |

इस भेदभाव के चलते शहीद कपिल कुंडू की माँ ने मजबूर होकर यह कहना पड़ा उनके घर कोई श्रधान्जली देने नही आया वह ऐसे लोगों को कुछ समझती भी नहीं | एक विधवा लाचार औरत जिसका इकलोता केवल 22 साल का जवान बेटा देश के लिए अपना बलिदान देकर प्रदेश का नाम रोशन कर गया पर यहाँ के भाजपा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर उस जवान के जाट जाति का होने के चलते उसकी शहादत को अनदेखा कर देते है |

Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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