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चौधरी चरणसिंह से सीखे मोदी | भाषण नही राशन से पेट भरता है

 चौधरी चरणसिंह  – ऐसा होता है दिलदार मददगार जाट 

वैसे तो यह कहानी दशको पुरानी है, लेकिन यह आदर्श आज भी उन लोगों के लिए एक महान प्रेरणा प्रस्तुत करता है जिन्होंने  इंसानियत के दर्द को महसूस कर उसका ठोस और कारगर रास्‍ता अपनाया।

चौधरी चरणसिंह

श्री सेवाराम चौधरी रूडकी हरद्वार, व करमसिंह नरवाल यमुनानगर के साथ जाट लेखक चौ. रणधीर देशवाल 

लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि अपने नौकर की जिस  जमीनी जरूरत को चौधरी चरणसिंह ने स्वयं की जरूरत महसूस किया, उनके बाद की पैदा हुई पीढ़ी के वश की बात नहीं।

आप और हम तो क्या कर पाते ऐसा तो चौधरी अजीतसिंह भी नहीं दोहरा पाए |

यह घटना उस समय की है जब चौधरी चरणसिंह प्रधानमन्त्री बन चुके थे

पर उनके संघर्ष के साथी अब तक उनके साथ जुड़े हुए थे |

यह एक सच्चे नेता का स्वाभविक गुण है कि वह

अपने दुःख के समय के साथियों को कभी नहीं भुलाता |

जैसा कि चौधरी चरणसिंह जी के साथ था |

देश का प्रधानमन्त्री बनकर भी उनके अंदर कोई खास फर्क नहीं पड़ा |

अपनी जरूरतों को दरकिनार करके अपने आश्रितों की जरूरतों को समझने व उनके समाधान निकालने में चौधरी चरणसिंह का कोई तोड़ नही था |

उस समय भी उनका पुराना खानदानी नाई ही उनका घरेलू हजाम था जो अक्सर उनके यहाँ बाल काटने आया करता था | चौधरी चरणसिंह आज बुलंदी पर थे पर उन्होंने अपने पुराने साथियों के साथ आज तक पारिवारिक सम्बन्ध बनाये रखा था |

चौधरी चरणसिंह एक गरीब नवाज फरिश्ते

एक दिन वह नाई बहुत खुश था उसने चौधरी चरणसिंह को बताया कि उसकी बेटी की शादी जल्द होने वाली है | अब चौधरी साहब ने उसे बधाई दी और कहा कि वो तुम्हारी नहीं पहले मेरी बेटी है, तुम्हे जिस चीज की जरूरत हो मुझसे कहना |

नाई बोला मैं घर पूछकर कल बताता हूँ और चला गया |

अगले दिन सुबह सुबह वह चौधरी साहब के पास आया और बड़े अधिकार से सब बात बताई | अब नाई ने उन्हें शादी में खर्च हेतु कुछ  हजार रूपये मांग लिए |

मगर चौधरी चरणसिंह के पास प्रधानमन्त्री के तौर पर मिलने वाले वेतन व जीवन भर की जमा पूंजी मिलाकर भी नाई की जरूरत के हिसाब के पैसे न थे |

चौधरी साहब ने कहा देख भाई !

पैसे तो अभी हैं नहीं मगर चिंता मत कर

खुले दिल से शादी कर,

पैसों का इंतजाम मैं खुद देख लूंगा।

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अब उस नाई ने बड़ी मुश्किल से शादी का इंतजाम किया और जब शादी के खर्च का हिसाब जोड़ा तो उसके पसीने छूट गए।

शादी से दो दिन पहले चौधरी साहब से फिर बोला चौधरी साहब शादी में खर्चा ज्यादा होगा और मैं गरीब नाई कैसे लोगों का कर्ज उतार पाऊंगा ?

चौधरी चरणसिंह बोले परसो,  जीमण वार वाले दिन तक सब कुछ ठीक हो जाएगा। इसलिए ज्यादा नहीं मत सोच, खुल मन से ब्याह कर |

सुबह दस बजे के करीब भोज शुरू हुआ। लोगों खाना खाने में व्यस्त थे पर ये क्या ? जिसने भी देखा देखता ही रह गया |

इतने बड़े देश का प्रधानमंत्री खुद अपने घरेलू नाई के यहाँ

दरी पर बैठकर बेटी का कन्यादान लिख रहा था।

सुबह 10 बजे से दोपहर बाद 3 बजे तक चौधरी चरणसिंह ने

पंडाल में एक दरी पर बैठकर कन्यादान लिखा।

जिसने देखा भले ही उसके पास 4 पैसे हो वही कन्यादान डालने पहुंचा |

देखते देखते कन्यादान लाख रूपये से ऊपर निकल गया | 

विदाई के बाद वह नाई चौधरी चरणसिंह के पास आकर खड़ा हो गया उसकी आँख भरी हुई थी और वह बिल्कुल मौन होकर चौधरी साहब को निहार रहा था |

चौधरी बोले क्यों भाई कहा था ना चिंता मत कर, मैं खुद देख लूँगा | नाई उनके गले से लगकर तेज तेज रोने लगा | तभी शादी में आये लोगों ने चौधरी चरणसिंह जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए जिन्हें सुनकर हर व्यक्ति गर्व से चौधरी चरणसिंह जिंदाबाद के नारे लगाने लगा |

जिसने भी यह सुना वह गरीब पिछडो दलितों किसान मसीहा को मन ही मन नमन करने लगा |

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Randhir Deswal

Hi, I am Randhir Singh a Solo Travel Blogger form Rohtak Haryana. I am a writer of Lyrics and Quotes.

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